Maharashtra Politics: भारतीय जनता पार्टी के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में बीजेपी के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार से सवाल किया कि हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को मरणोपरांत भारत रत्न देने का प्रस्ताव लाने में देरी क्यों हो रही है।
मानसून सत्र के आखिरी दिन इस मुद्दे को उठाते हुए मुनगंटीवार ने कहा कि मार्च में विधानसभा में पेश किया गया प्रस्ताव, स्पीकर राहुल नार्वेकर के पहले के आश्वासन के बावजूद अभी तक सदन के सामने नहीं लाया गया है। उन्होंने इस मौके का इस्तेमाल यह सवाल पूछने के लिए भी किया कि क्या सत्ता में आने के बाद सरकार का वैचारिक रुख बदल गया है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा, “अगर सत्ता में आने के बाद आपकी विचारधारा बदल गई है, तो मैं यह मुद्दा दोबारा कभी नहीं उठाऊंगा। लेकिन आपके काम उस विचारधारा से मेल नहीं खाते जिसे आप मानने का दावा करते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “जब कोई पार्टी सत्ता में आती है, तो उसे अपनी विचारधारा नहीं बदलनी चाहिए। अगर इस मुद्दे पर सरकार का रुख बदल गया है, तो उसे खुलकर कहना चाहिए।”
वीर सावरकर को अंग्रेजों के हाथों यातनाएं सहनी पड़ीं- बीजेपी विधायक
इस साल मार्च में मुनगंटीवार ने विधानसभा में सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मरणोपरांत देने का प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने कहा, “वीर सावरकर ने अंग्रेजों के हाथों यातनाएं झेलीं। कम से कम हमें अनजाने में भी अपनी देरी से उन्हें कष्ट नहीं देना चाहिए। हमें केवल एक प्रस्ताव पारित करना है। क्या एक फाइल को भी इतने लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है? दो सत्र हो चुके हैं।”
मुझे बहुत दुख होता है- बीजेपी विधायक
वरिष्ठ भाजपा विधायक ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे बहुत दुख होता है कि सावरकर की विचारधारा के प्रति अपना जीवन समर्पित करने वाले एक कार्यकर्ता के रूप में, हमारी अपनी सरकार इस मामले पर निष्क्रिय बैठी है। मुझे इसका गहरा अफसोस है। अब से मैं इस मुद्दे को दोबारा कभी नहीं उठाऊंगा।”
अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने अध्यक्ष को सूचित किया है कि वह इस मामले को आगे बढ़ा रही है और सदस्यों को आश्वासन दिया है कि अगले सत्र में बीएसी द्वारा इस पर विचार किया जाएगा।
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विनायक दामोदर सावरकर। पिछले कुछ सालों में या यूं कहें कि 2014 में केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनने के बाद इस नाम को लेकर काफी विवाद हुआ है। यह सवाल बार-बार उठता है कि क्या सावरकर ने जेल में रहते हुए बार-बार ब्रिटिश अधिकारियों से माफी की गुहार लगाई थी? क्या उन्होंने महात्मा गांधी के कहने पर दया याचिकाएं दायर की थीं? यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
