CP Radhna Krishnan Remark on Media: मलयालम दैनिक दीपिका की 140वीं वर्षगांठ के समारोह में देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार ने कहा कि अगर मीडिया सकारात्मक विकास और उपलब्धियों पर पर्याप्त ध्यान देने में विफल रहता है, तो युवा लोग कॉकरोच का अनुसरण कर सकते हैं। इस बयान के जरिए उपराष्ट्रपति सांकेतिक तौर पर सोशल मीडिया के जरिए उपजी कॉकरोच जनता पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता पर तंज कसा है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि रचनात्मक पत्रकारिता ने समाज को आकार देने और युवाओं को सही जानकारी और आदर्शों से अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “सकारात्मक गतिविधियों की अच्छी तरह से रिपोर्टिंग की जानी चाहिए। तभी युवाओं को सही जानकारी मिलेगी अन्यथा, वे रुचि खो देंगे और अंततः गलत राह पर चल पड़ेंगे।”
सीजेपी पर सांकेतिक टिप्पणी
उपराष्ट्रपति ने कहा, “सकारात्मक गतिविधियों की अच्छी तरह से रिपोर्टिंग की जानी चाहिए। तभी युवाओं को सही जानकारी मिलेगी अन्यथा, वे रुचि खो देंगे और अंततः गलत राह पर चल पड़ेंगे।”
उनकी ये टिप्पणी चीफ जस्टिस ऑफ जस्टिस (CJP) के उदय के कुछ दिनों बाद आई है, जो एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है और जिसने वरिष्ठ अधिवक्ताओं की नियुक्ति पर अदालत की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा की गई टिप्पणियों पर विवाद के बीच ऑनलाइन लोकप्रियता हासिल की।
सामूहिक जिम्मेदारी का किया उल्लेख
सीपी राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि रचनात्मक पत्रकारिता समाज में विश्वास पैदा करने में मदद करती है, सामूहिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करती है और नागरिकों को राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि करुणा, वैज्ञानिक प्रगति, सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय उपलब्धियों को उजागर करके समाचार पत्र सामाजिक परिवर्तन के शक्तिशाली साधन बन सकते हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधा कृष्णन ने सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने, शिक्षा का प्रसार करने, सांस्कृतिक जड़ों को संरक्षित करने और रचनात्मक सार्वजनिक चर्चा को प्रोत्साहित करने के लिए ‘दीपिका’ की प्रशंसा भी की।
सिजोफ्रेनिया बताकर सेना से निकाला, छीनी पेंशन, 40 साल बाद अदालत ने विधवा को दिलाया हक
सेना ने एक जवान को सिज़ोफ्रेनिया के कारण सेवामुक्त कर दिया था और उनकी मौत के बाद पत्नी को विकलांगता पेंशन देने से भी इनकार कर दिया। चार दशकों तक केस लड़ने के बाद अब केरल हाई कोर्ट ने जवान की विधवा के पक्ष में फैसला सुनाया है। केरल उच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र की याचिका को खारिज कर दिया और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें 1979 में सिजोफ्रेनिया के कारण सेवामुक्त हुए एक दिवंगत सैन्यकर्मी की विधवा को विकलांगता पेंशन प्रदान की गई थी। पढ़िए पूरी खबर…
