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सुप्रीम कोर्ट में तांडव की ओर से उतरे बड़े-बड़े वकील, जज को याद दिलाया अर्नब गोस्वामी और अमीष देवगन केस

हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर ठेस पहुंचाने को लेकर वेब सीरीज के निर्देशक और अन्य ने उनके खिलाफ प्राथमिकी को रद्द करने के अनुरोध को लेकर उच्चतम न्यायालय में याचिकाएं दायर की थीं। न्यायालय ने इन याचिकाओं पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों को नोटिए जारी किये।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: January 28, 2021 8:38 AM
Tandav, Tandav movie, Tandav ban, Tandav controversy, Tandav actors,‘तांडव’ के निर्देशक अली अब्बास जफर और अन्य को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से कोर्ट ने किया इनकार। (Photo: Amazon Prime Video/Instagram)

उच्चतम न्यायालय ने वेब सीरीज ‘तांडव’ के निर्देशक अली अब्बास जफर और अन्य को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से बुधवार को इनकार कर दिया। हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर ठेस पहुंचाने को लेकर वेब सीरीज के निर्देशक और अन्य ने उनके खिलाफ प्राथमिकी को रद्द करने के अनुरोध को लेकर उच्चतम न्यायालय में याचिकाएं दायर की थीं। न्यायालय ने इन याचिकाओं पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों को नोटिए जारी किये।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ‘‘वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है’’ और यह कुछ पाबंदियों के अधीन है। न्यायालय ने कहा कि जफर, अमेज़ॅन प्राइम इंडिया की प्रमुख अपर्णा पुरोहित और निर्माता हिमांशु मेहरा, शो के लेखक गौरव सोलंकी और अभिनेता मोहम्मद जीशान अयूब वेब सीरीज के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकियों में संबद्ध अदालतों से जमानत का अनुरोध कर सकते हैं। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की एक पीठ निर्माताओं और वेस सीरीज से जुड़े अन्यों की तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

पीठ ने इन याचिकाओं पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार और शिकायतों की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किये। ‘तांडव’’ में बॉलीवुड कलाकारों सैफ अली खान, डिपंल कपाड़िया और मोहम्मद जीशान अयूब आदि ने काम किया है।

पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से हुई सुनवाई में कहा, ‘‘ हम सीआरपीसी की धारा 482 (आपराधिक मामले को खत्म करने के लिए अदालतों की शक्ति) के तहत अधिकार का उपयोग नहीं कर सकते हैं। हम अंतरिम संरक्षण देने के लिए इच्छुक नहीं हैं।’’ जफर और अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं फली एस नरीमन, मुकुल रोहतगी, सिद्धार्थ लूथरा और सिद्धार्थ अग्रवाल पेश हुए।

रोहतगी ने कहा, ‘‘दिन के अंत में यह केवल एक अपराध का मामला है। यदि एक हत्या के मामले की सूचना 100 बार दी जाती है तो यह 100 अपराध नहीं हो जाते है। यह एक वास्तविक निर्दोष मामला है। हर रोज एक प्राथमिकी होती है तो एक व्यक्ति कहां जायेगा?’’

एक सवाल के जवाब में कि याचिकाएं उच्च न्यायालय में दाखिल क्यों नहीं की गईं, नरीमन ने कहा कि कई राज्यों में प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं और हर दिन संख्या बढ़ रही है। नरीमन ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के मामले का उल्लेख किया जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों में लंबित एफआईआर को संयोजित किया था।

सुनवाई के दौरान नरीमन ने कहा कि जब अपने चैनल पर गोस्वामी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए अपमानजनक शब्दों का उपयोग किया था। इसके बाद उनके खिलाफ राज्य में दर्जनों FIR दर्ज हुई थीं। तब गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट का ही दरवाजा खटखटाया था। उस समय जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने उन्हें तीन सप्ताह तक गिरफ्तारी से सुरक्षा दी थी।

वहीं तांडव के निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने भी अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तर्क को रेखांकित करने की मांग की, लेकिन पीठ ने उनसे कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार पूर्ण नहीं है।” यह कहते हुए कि इसमें स्वतंत्रता और प्राकृतिक न्याय के प्रश्न शामिल हैं, लूथरा ने कहा कि अमीश देवगन मामले में एफआईआर को खारिज नहीं किया गया था लेकिन अदालत ने गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण जारी रखने की अनुमति दी थी। इतना ही नहीं इस मामले को अजमेर स्थानांतरित कर दिया गया था।

अयूब की ओर से पेश अग्रवाल ने वेब श्रृंखला के कथित आपत्तिजनक हिस्से का बचाव करते हुए कहा कि एक अभिनेता के रूप में, उनके द्वारा बोले गए संवादों पर उनका कोई कलात्मक नियंत्रण नहीं है। पीठ ने कहा, ‘‘आप पटकथा पढ़े बिना भूमिका नहीं निभा सकते। आप दूसरों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली भूमिका नहीं निभा सकते।’’ रोहतगी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अंतरिम संरक्षण की जरूरत है क्योंकि उन्हें छह अलग-अलग राज्यों की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है।

‘‘तांडव’’ के निर्माताओं और कलाकारों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में तीन प्राथमिकियां दर्ज है जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भी वेब सीरीज से जुड़े लोगों के खिलाफ इसी तरह की प्राथमिकियां दर्ज है।

(भाषा इनपुट के साथ)

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