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यूपी में अब जातियों के बीच ऐसे बंट सकता है आरक्षण कोटा, योगी सरकार ने बनाया ये प्लान

सिफारिशों के लागू होने के बाद इसका फायदा उन दलित और पिछड़ी जातियों को मिलेगा जिनको आरक्षण का पूरा फायदा नहीं मिल रहा था।

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एससी/एसटी और पिछड़ों को कोटे में से कोटा देने की तैयारी में है। इसके लिए रुपरेखा तैयार की जा रही है। पिछले साल गठित की गई सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के लिए शासन स्तर पर हामी भर दी है। कैबिनेट में भी इसपर मुहर लगा दी जाएगी।

सिफारिशों के लागू होने के बाद इसका फायदा उन दलित और पिछड़ी जातियों को मिलेगा जिनको आरक्षण का पूरा फायदा नहीं मिल रहा था। मालूम हो कि दलितों और ओबीसी को मिल रहे आरक्षण में कुछ जातियां ऐसी हैं जिन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा। आरक्षण होने के बावजूद इसके फायदे से वंचित जातियों को फायदा पहुंचाने के लिए दलितों के लिए हुकुम सिंह और ओबीसी पर योगी सरकार की समिति की सिफारिशें लागू की जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि अनुसूचित जाति/ जनजाति के आरक्षण को दो हिस्‍सों में बांटने की तैयारी है। इसके तहत 10 और 11 फीसदी आरक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। वहीं बात करें ओबीसी आरक्षण की तो इसे 7, 11 और 9 प्रतिशत (तीन हिस्सों) में बांटा जाएगा। जबकि अति दलित और अति पिछड़ा वर्ग को अब कोटे में भी कोटा मिल सकता है।

सरकार पहली श्रेणी (7 प्रतिशत) में कुर्मी, यादव, चौरसिया को शामिल करेगी। जबकि श्रेणी (11 प्रतिशत) में कुशवाहा, शाक्य, लोध, शाहू, तेली, गुज्जर, माली आदि तो वहीं तीसरी श्रेणी (9 प्रतिशत) में राजभर, मल्लाह, बिंद, घोसी आदि को शामिल करेगी। वहीं बात करें अनुसूचित जाति के आरक्षण के बंटवारे की तो पहली श्रेणी (10 फीसदी) में अनुसूची ‘ए’ चमार-धूसिया-जाटव और दूसरी श्रेणी (11 प्रतिशत) में अनुसूची ‘बी’- वाल्मीकि, धानुक, खटिक, धोबी सहित 65 जातियां शामिल होंगी

मालूम हो कि हुकुम सिंह समिति 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के निर्देश पर गठित की गई थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि दलितों के आरक्षण को दो श्रेणियों में बांटा जाया। योगी सरकार अब इस समीति के सुझाव पर अम्ल कर नई व्यवस्था को लागू कर रही है।

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