मोपला विद्रोह पर बोले योगी आदित्यनाथ, हिंदुओं की हत्या को जिहादियों ने रची थी साजिश, यह है 1921 की नरसंहार वाली कहानी

1921 के केरल में हुए नरसंहार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिहादियों की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि कई दिनों तक चले नरसंहार में लगभग 10 हजार हिंदू मारे गए थे।

दादरी की एक जनसभा में योगी आदित्यनाथ। फोटो- एक्सप्रेस By प्रेमनाथ पांडेय

केरल के मालाबार में साल 1921 में हुए मोपला विद्रोह को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजनाबद्ध नरसंहार बताया है। उन्होंने कहा कि जिहादियों ने मिलकर हजारों हिंदुओं की हत्या कर दी थी। शनिवार को वह आरएसएस से जुड़ी पत्रिका पांचजन्य के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। योगी ने कहा, ‘हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि हम कैसे पूरी मानवता से जिहादी विचार को खत्म कर सकते हैं ताकि ऐसा माहौल बने कि कभी मालाबार के उस नरसंहार जैसी घटना दोहराई न जाए।’

योगी ने कहा कि जिहादी विचार से मुक्त माहौल बनाने के लिए पूरे देश को साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 75वें साल में हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने इतिहास को अच्छी तरह जानें। क्योंकि जो भी देश अपने इतिहास को याद नहीं रखता, वह अपनी भूमि को भी सुरक्षित नहीं रख सकता।

1921 के नरसंहार के बारे में बोलते हुए योगी ने कहा, 100 साल पहले केरल के मोपला में जिहादी तत्वों ने हजारों हिंदुओं की हत्या कर दी थी। कई दिनों तक लगातार योजनाबद्ध तरीके से हिंदुओं को मौत के घाट उतारता जाता रहा। अनुमान लगाया जाता है कि 10 हजार से ज्यादा हिंदुओं की नृशंस हत्या कर दी गई थी। हजारों माताओं, बहनों को प्रताड़ित किया गया और कई मंदिर तोड़ दिए गए।

यूपी के सीएम ने कहा कि इस नरसंहार को छिपाने के लिए कई लोग सामने आ गए। पूछा गया कि क्या हिंदुओं ने धर्मांतरण करने से इनकार कर दिया गया था, इसलिए उन्हें मार दिया गया? इस सवाल पर कई लोग कहने लगे कि खिलाफत आंदोलन के फेल होने की वजरह से मुस्लिम समुदाय में गुस्सा था। इनका कहा है कि ज़मींदार मुस्लिमों का शोषण कर रहे थे। अगर ऐसा था तो आम हिंदुओं को क्यों मार दिया गया? केवल इसलिए कि उन्होंने धर्मांतरण करना ठीक नहीं समझा? सच ये है कि जिन वामपंथियों ने स्यूडो सेक्युलरिजम को सपोर्ट करने के लिए इतिहास लिखा वे केवल तुष्टीकरण में यकीन रखते थे।।

1971 में केरल की सरकार ने भी इसे स्वतंत्रता सेनाओं का आंदोलन बताया था। हालांकि संघ परिवार का कहना है कि यह केवल हिंदुओं की हत्या का अभियान था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च की कमिटी ने 387 लोगों के नाम संवतंत्रता सेनानियों की लिस्ट से हटाने का प्रस्ताव दिया है। यूपी के सीएम ने कहा कि पहली बार वीर सावरकर ने अपनी किताब में इस नरसंहार कि असलियत लिखी थी।

योगी ने कहा, भीमराव आंबेडकर ने भी अपनी किताब ‘पाकिस्तान ऐंड द पार्टिशन ऑफ इंडिया’ में मालाबार के मोपला में हिंदुओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार का जिक्र किया था। इसके बाद एनी बेसेंट ने भी इस बारे में लिखा है।

बता दें कि 20 अगस्त 1921 में केरल के मालाबार में मोपला विद्रोह की शुरुआत हुई थी। पहले तो यह विद्रोह अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुआ लेकिन फिर इसने सांप्रदायिक रूप ले लिया। मोपला मुसलमानों ने हजारों हिंदुओं की हत्या की और जबरन धर्मांतरण करवाया गया। पहले विश्वयुद्ध में तुर्की की हार के बाद अंग्रेजों ने वहां के खलीफा को कुर्सी से हटाया। इसके बाद खिलाफत आंदोलन की शुरुआत हुई। खिलाफत आंदोलन को महात्मा गांधी का भी समर्थन मिला हुआ था। अंग्रेजों ने इसे कुचलने के लिए बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। बाद में इस आंदोलन का नेतृत्व मोपलाओं के हाथ में चला गया और उन्होंने ऊंची जाति के जमीदार हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे यह आंदोलन सांप्रदायिक दंगा बन गया।

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