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शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल की पत्नी भी पहनेंगी आर्मी की वर्दी, SSC एग्जाम और इंटरव्यू भी हुआ क्लियर

मेजर विभूति 17 फरवरी, 2019 को पुलवामा में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में शहीद हो गए थे, तब सेना की 55RR में उनकी तैनाती थी।

मेजर विभूति ढौंडियाल की पत्नी निकिता कौल।

पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए मेजर विभूति ढौंडियाल की पत्नी निकिता कौल भी अब आर्मी की वर्दी में नजर आएंगी। इसके लिए उन्होंने एसएससी इग्जाम और इंटरव्यू भी क्लियर कर लिया है, अब सिर्फ मेरिट लिस्ट का इंतजार है। देहरादून स्थित अपने ससुराल में मौजूद निकिता ने कहा, ‘विभूति की शहादत के छह महीने बाद मैंने एसएससी की परीक्षा के लिए आवेदन किया। खुद को स्वस्थ रखने का ये मेरा तरीका है। जब मैं एग्जाम और इंटरव्यू दे रही थी तब मैं महसूस कर सकती थी कि विभूति उस वक्त कैसा महसूस कर रहे थे। उस वक्त मैंने खुद को उनकी तरह डर और चिंता से खुद को जुड़ा हुआ महसूस किया। इन सब ने मुझे भी ताकत दी।’

मेजर विभूति 17 फरवरी, 2019 को पुलवामा में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में शहीद हो गए थे, तब सेना की 55RR में उनकी तैनाती थी। करीब 20 घंटे चली इस मुठभेड़ में तीन अन्य सैनिक भी शहीद हो गए थे। पति की शहादत के बाद जब पहली बार निकिता ने तिरंगे में लिपटे  उनके पार्थिव शरीर को देखा, तब वो उनके कान के नजदीक पहुंची और कहा, ‘मैं तुमसे प्यार करती हूं।’ आज निकिता भी पति की तरह देश सेवा के लिए आर्मी की वर्दी पहनने के लिए तैयार हैं।

उल्लेखनीय है कि मेजर विभूति का पार्थिव शरीर जब देहरादून लाया गया था तब लोगों ने देश के वीर सैनिक को श्रद्धांजलि देने के लिए सड़क पर लंबी कतार लगा रखी थी। हालांकि उस दिन तब किसी को मालूम नहीं होगा कि शहीद मेजर की विधवा भी आर्मी में शामिल होगी।

निकिता कहती हैं, ‘मैंने समय लिया और सबसे पहले मुझे यह स्वीकार करने की जरुरत थी कि क्या हुआ है। विभूति बहुत सकारात्मक सोच वाले थे। वो चाहते थे कि मैं उनसे भी बेहतर करूं। इसलिए जब भी मुझे भारतीय सेना में शामिल होने के अपने फैसले के बारे में कोई चिंता या संदेह होता तो मैं अपनी आंखें बंद कर सोचती कि विभूति होते तो क्या करते…? सेना में शामिल होने के मेरे फैसले में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।’

बता दें कि भारतीय सेना युद्ध में शहीद सैनिकों की विधावाओं को आर्मी ज्वाइन करने के लिए आयु सीमा में छूट देती है। हालांकि चयन प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होता। निकिता कहती हैं, ‘परीक्षा पास करने के लिए मैंने बहुत मेहनत की। अब मैं एक साल की ट्रेनिंग में श्रेष्ठ होना चाहती हूं। मैं एक ऐसी अधिकारी बनना चाहती हूं जिसपर सभी को गर्व हो… विभूति को गर्व हो।’

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