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टेरर फंडिंग केस में Yasin Malik को उम्रकैद, 10 लाख रुपए का जुर्माना

यासीन मलिक को दो मामलों में उम्रकैद और पांच मामलों मे में 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने उस पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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अलगाववादी नेता यासीन मलिक (फोटो सोर्स- एएनआई)

टेरर फंडिंग मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। बुधवार (25 मई, 2022) को एनआईए की विशेष अदालत ने विभिन्न मामलों में मलिक पर सजा का एलान करते हुए 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया। बता दें कि उस पर नौ मामलों में ये सजा सुनाई गई है, जिनमें से दो में उम्रकैद और पांच में 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा, सजा के साथ उस पर 10 हजार से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है।

जानें किस मामले में क्या मिली सजा
आईपीसी धारी 120 बी में 10 साल की सजा, 10 हजार रुपये जुर्माना, 121 में उम्रकैद के साथ 10 हजार रुपये जुर्माना, 121 ए में 10 साल की सश्रम कारावास की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना, 13 UAPA में पांच साल की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना,15 UAPA में 10 साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना, 17 UAPA में उम्रकैद और 10 लाख रुपये जुर्माना, 18 UAPA में 10 साल की सजा के साथ 10 हजार रुपये जुर्माना, 38 UAPA में 5 साल की सजा और 5 हजार रुपये जुर्माना और 39 UAPA में 10 साल की सजा के साथ 5 हजार रुपेय जुर्माना लगा।

बता दें कि यासीन मलिक को टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराया गया है। सुनवाई के दौरान यासीन ने कबूल किया था कि वे कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल थे। यासीन मलिक पर आपराधिक साजिश रचने, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने और कश्मीर में अशांति फैलाने की धाराओं में आरोप तय किए गए थे। यासीन मलिक ने कोर्ट में इन आरोपों को कबूल किया था, जिसके बाद 19 मई को मलिक को दोषी ठहराया गया।

अदालत ने उस पर यूएपीए (UAPA) की धारा 16 (आतंकवादी अधिनियम), 17 (आतंकवादी अधिनियम के लिए धन जुटाने), 18 (आतंकवादी कृत्य करने की साजिश) , 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होने के नाते) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) एवं 124-ए (देशद्रोह) के तहत आरोप तय किए थे। उसने कोर्ट के सामने इन आरोपों को स्वीकार कर लिया था और इन्हें चुनौती देने से इनकार किया था।

यासीन मलिक की सजा को लेकर क्या बोलीं महबूबा मुफ्ती
यासीन मलिक की सजा को लेकर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा, “फांसी देने से कश्मीर का मसला हल नहीं होगा, उल्टा खराब ही होगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक सियासी मसला है, यहां पहले भी कई लोगों को फांसी दी गई, उम्र कैद हो गई, लेकिन उससे तो कश्मीर मसला हल नहीं हुआ। मुझे लगता है कि भारत सरकार की जो राजनीति है इसके अंजाम अच्छे नहीं होंगे, बल्कि इससे हालात दिन पर दिन खराब होते जा रहे हैं। सुलझने के बजाय मसला उलझ रहा है।”

बौखलाया पाकिस्तान
यासीन मलिक को लेकर पाकिस्तान बौखला गया है। पाक क्रिकेट टीम के खिलाड़ी शाहिद अफरीदी ने यासीन मलिक के लिए संयुक्त राष्ट्र से गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि यासीन मलिक पर लगे आरोप झूठे हैं और यूएन को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। वहीं, भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने भी यासीन के पक्ष में आवाज उठाई है और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की बात कही।

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