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आडवाणी-जोशी को ‘चेले ने लगाया किनारे’, अटल सरकार में मंत्री रहे यशवंत सिन्हा बोले- ‘मेट्रोमैन’ के लिए BJP ने तोड़ा ये नियम

पूर्व बीजेपी नेता ने लिखा है कि इस बात की तुलना अकबर बैरम खां की कहानी से की जा सकती है, लेकिन बैरम खान की तरह इन लोगों को दिल्ली से नहीं हटाया गया।

Yashwant Sinha,BJP यशवंत सिन्हा ने साल 2018 में बीजेपी से अपने आप को अलग कर लिया था ( सोर्स – एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा ने ई श्रीधरन के 88 साल की उम्र में बीजेपी में शामिल होने के मुद्दे पर भाजपा पर हमला बोला है। NDTV पर उन्होंने एक ब्लॉग लिखा है, जिसमें सिन्हा ने लिखा है कि श्रीधरन के लिए बीजेपी ने पार्टी द्वारा बनाए गए नियम को ही तोड़ दिया है। अपने ब्लॉग में उन्होंने लिखा कि 88 साल के श्रीधरन को पार्टी में शामिल करवा कर उन्हें केरल की राजनीति में उतारने की तैयारी चल रही है। निश्चित रूप से बीजेपी केरल में अपना झंडा गाड़ना चाहती है। जिसमें श्रीधरन उसके काम आ सकते हैं। वैसे भी श्रीधरन ने राज्यपाल बनने से इनकार कर दिया है। लेकिन मुख्यमंत्री के पद से उन्हें कोई परहेज नहीं है।

2014 में पार्टी की तरफ से उम्र का बहाना बनाकर लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को मंत्री बनने और बाद में 2019 में चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। दोनों ही नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया गया। हालांकि बीजेपी ने उसके बाद ही येदियुरप्पा को 75 साल से अधिक उम्र में कर्नाटक में मुख्यमंत्री बनाया था। इसका मतलब तो यही निकाला जा सकता है कि आडवाणी-जोशी को उनके चेले ने ही किनारे लगा दिया। इसके साथ ही दोनों नेताओं की राजनीति का भी अंत हो गया उनके चेले के द्वारा ही।

अकबर बैरम खां से की तुलना: पूर्व बीजेपी नेता ने लिखा है कि इस बात की तुलना अकबर बैरम खां की कहानी से की जा सकती है, लेकिन बैरम खां की तरह इन लोगों को दिल्ली से नहीं हटाया गया। उन्हें पूरी सुविधाओं और पूरी सुरक्षा के साथ सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी गई है। हालांकि हाल के दिनों मेरी मुलाकात उन लोगों से नहीं हुई है। उम्मीद है कि वो लोग ठीक होंगे।

पहले भी टूटे हैं नियम:यशवंत सिन्हा ने लिखा है कि कुछ साल पहले जब नरेंद्र मोदी पार्टी में ताकतवर नहीं थे तब ऐसा नियम बना था कि दो बार से अधिक राज्यसभा, किसी को नहीं भेजा जाएगा। इसके तहत अरुण शौरी और शत्रुघन सिन्हा राज्यसभा जाने से वंचित रह गए थे लेकिन बाद में अरुण जेटली के लिए इस निमय को तोड़ा गया था।

क्या हम कुछ बातों को जनता पर नहीं छोड़ सकते हैं? पूर्व वित्त मंत्री ने लिखा है कि भारत में राजनीतिक दलों की तरफ से कई नियम बनाए ही जाते हैं तोड़े जाने के लिए। एक लोकतंत्र में कुछ बातों को जनता पर नहीं छोड़ सकते हैं? अब देखना रोचक होगा कि श्रीधरन बीजेपी को कितना लाभ दिलवा पाते हैं।

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