दिल्ली में बहने वाली यमुना में उत्तर प्रदेश के गिरने वाले पांच बड़े नालों और इनके उप-नालों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम को लेकर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। यूपी के गिरने वाले पांच बड़े नालों की रोकथाम को लेकर तैयार की गई कार्ययोजना से गृह मंत्रालय नाखुश है। यूपी सरकार को फिर से ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली सरकार के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि दिल्ली यमुना में उत्तर प्रदेश की ओर से पांच बड़े नालों और उनके उप-नालों को जल प्रवाह सीधा होता है। इसकी वजह से यमुना में प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी होती है। इसकी रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश के पांच बड़े नालों और उनके उप-नालों की पहचान की गई थी। इनमें खासतौर पर साहिबाबाद, बंथला, इंद्रपुरी, डीएलएफ अंकुर विहार और लालबाग नाला शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने योजना तैयार की थी
इन नालों को यमुना में गिरने से कैसे रोका जा सके या फिर उसके जल को किस तरह से शोधित कर डाला जाए, इसको लेकर एक कार्ययोजना उत्तर प्रदेश सरकार के शहरी विकास विभाग की ओर से तैयार की गई थी, लेकिन मंत्रालय की हालिया बैठक में इस कार्ययोजना को यमुना नदी में प्रदूषण को कम करने के लिए प्रभावी नहीं माना गया है।
सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई प्रगति समीक्षा बैठक में यूपी सरकार की ओर से तैयार की गई कार्ययोजना को पेश किया गया था लेकिन मंत्रालय इससे संतुष्ट नहीं नजर आया।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय ने यूपी सरकार के शहरी विकास सचिव को इन पांच नालों को दिल्ली यमुना में गिरने से रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने को कहा है। साथ ही यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पांच नालों के उप-नालों की पहचान की है लेकिन मौजूदा हाल में इन नालों की जल गुणवत्ता (बीओडी/सीओडी/ टीएसएस) चिंताजनक स्तर पर है।
इन पांचों नालों के जैव रासायनिक आक्सीजन मांग (बीओडी), केमिकल आक्सीजन डिमांड (सीओडी) और टाक्सिक शाक सिंड्रोम (टीएसएस) का लक्ष्य तय मानकों के स्तर पर लाने के लिए उपयुक्त व्यवस्था बनाने की जरूरत है। इसके लिए यूपी सरकार को अपनी कार्य योजना में बदलाव करना होगा।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि दिल्ली यमुना में प्रदूषण को रोकने के लिए यूपी सरकार को नाला-वार नए सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण और पुराने एसटीपी के उन्नयन की योजना तैयार करनी होगी। एसटीपी में प्रयुक्त होने वाली तकनीक का समुचित अध्ययन किया जाए जिससे बीओडी 10एमजी/लीटर, सीओडी 50 एमजी/लीटर और टीएसएस 10एमजी/लीटर तय मानकों के अनुरूप लाई जा सके।
औद्योगिक इकाईयों से होने वाले प्रदूषण/प्रदूषक तत्वों को कम करने के लिए नाला-वार नए कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगाने के साथ पुराने सीईटीपी के उन्नयन की योजना तैयार की जाएगी। दिल्ली यमुना को प्रदूषित करने से रोकने के लिए वर्तमान में लगे सीईटीपी की वर्तमान कार्य क्षमता, उनमें प्रयुक्त होने वाली तकनीक आदि का भी अध्ययन किया जाएगा।
इससे नए निर्माण/उन्नयन के बाद जल गुणवत्ता मानक स्तर का हासिल करने में आसानी होगी। जल गुणवत्ता की निगरानी सुनिश्चित करने को लेकर सभी पांच नालों के इनफ्लो और आउटफ्लो मापने का एक निष्पक्ष संस्थान द्वारा मूल्यांकन (थर्ड पार्टी आडिट) भी करवाया जाएगा।
यह भी पढ़ें: दिल्ली में गहरा रहा प्रदूषण का संकट, जहरीली हवा को लेकर गंभीर नहीं सरकारें?
दिल्ली में जहरीली हवाओं से लोग बेहाल हैं। उनमें स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं पैदा हो रही हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक कई इलाकों में गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। इसकी वजह से राजधानी का माहौल गंभीर रूप से बिगड़ गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
