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3 न्यायाधीशों का पीठ करेगा याकूब मेमन का फैसला

मुंबई विस्फोट मामले में मौत की सजा पाने वाले याकूब मेमन की किस्मत पर मंगलवार को अनिश्चितता पैदा हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी किस्मत पर फैसले के लिए तीन न्यायाधीशों के पीठ का गठन कर दिया।

Author July 29, 2015 11:27 am
याचिका पर जजों की अलग-अलग थी राय

मुंबई विस्फोट मामले में मौत की सजा पाने वाले याकूब मेमन की किस्मत पर मंगलवार को अनिश्चितता पैदा हो गई जब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी किस्मत पर फैसले के लिए तीन न्यायाधीशों के पीठ का गठन कर दिया। इससे पहले दो न्यायाधीशों का पीठ 30 जुलाई को प्रस्तावित सजा पर अमल पर रोक की मांग वाली मेमन की याचिका पर बंट गया।

इस विषय पर न्यायमूर्ति एआर दवे और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ के बीच असहमति के बीच, यह मामला प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू को भेजा गया, जिन्होंने मेमन की किस्मत का फैसला करने के लिए न्यायमूर्ति दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी पंत और न्यायमूर्ति अमिताव राय के पीठ का गठन किया।

मेमन मुंबई विस्फोट मामले में मौत की सजा पाने वाला एकमात्र दोषी है जो गुरुवार को 53 वर्ष का होने वाला है।
जजों का नया पीठ बुधवार को इस बात पर फैसला करेगा कि 30 अप्रैल को मुंबई की टाडा अदालत से जारी मौत वारंट पर रोक लगाई जाए या नहीं और मेमन की याचिका के गुणदोष पर गौर किया जाए या नहीं। मेमन ने दावा किया है कि अदालत के सामने सभी कानूनी उपचार खत्म होने से पहले ही वारंट जारी कर दिया गया।

न्यायमूर्ति एआर दवे ने मौत के वारंट पर रोक लगाए बगैर उसकी याचिका खारिज कर दी, वहीं न्यायमूर्ति कुरियन की राय अलग रही और उन्होंने रोक का समर्थन किया। दोनों न्यायाधीशों के बीच किसी विषय पर अलग अलग राय होने पर पैदा कानूनी स्थिति के बारे में पूछे जाने पर पीठ को बताया गया, ‘यदि एक न्यायाधीश इस पर रोक लगाता है और दूसरा नहीं, तो फिर कानून में कोई व्यवस्था नहीं रहेगी।’

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और मेमन की ओर से पेश हुए राजू रामचंद्रन सहित वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि इस विषय को गौर करने के लिए प्रधान न्यायाधीश के हस्तक्षेप के साथ बड़े पीठ को भेजा जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति दवे का नजरिया था कि 21 जुलाई को मेमन की उपचारात्मक याचिका को खारिज करने में कुछ खामी नहीं थी और महाराष्ट्र के राज्यपाल उसकी दया याचिका पर फैसला कर सकते हैं क्योंकि दोषी कैदी अपने सभी कानूनी उपचारों का प्रयोग कर चुका है।

शीर्ष अदालत द्वारा मेमन की उपचारात्मक याचिका पर फैसले में सही प्रक्रिया का पालन नहीं करने की बात कहने वाले न्यायमूर्ति कुरियन ने कहा कि इस खामी को दूर किया जाना चाहिए और उपचारात्मक याचिका पर नए सिरे से सुनवाई होनी चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में मौत के वारंट पर रोक लगाई जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति दवे ने इस मसले पर मनु स्मृति का एक श्लोक उद्धृत करते हुए कहा, ‘खेद है, मैं मौत के फरमान पर रोक लगाने का हिस्सा नहीं बनूंगा। प्रधान न्यायाधीश को निर्णय लेने दीजिए।’

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