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लेखक तसलीमा नसरीन ने कहा, हत्यारों का समर्थन करते हैं, प्रगतिवादी शायर नहीं आतंकवादी हैं मुनव्वर राणा

तसलीमा ने यह टिप्पणी मुनव्वर राणा के उस बयान के बाद की है, जिसमें उन्होने कहा था कि अगर वे फ्रांस के राष्ट्रपति होता, तो उस कार्टूनिस्ट को फांसी की सजा देते जिसने पैगंबर मुहम्मद का कार्टून बनाया था।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: November 13, 2020 6:08 PM
taslima nasreen, Munawwar Rana , franceलेखक तसलीमा नसरीन ने मुनव्वर राणा को आतंकवादी बताया है।

जानी-मानी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने शायर मुनव्वर राणा को आतंकवादी बताया है। तसलीमा ने यह टिप्पणी मुनव्वर राणा के उस बयान के बाद की है, जिसमें उन्होने कहा था कि अगर वे फ्रांस के राष्ट्रपति होता, तो उस कार्टूनिस्ट को फांसी की सजा देते जिसने पैगंबर मुहम्मद का कार्टून बनाया था। लेखक तसलीमा नसरीन ने कहा कि मुनव्वर राणा हत्यारों का समर्थन करते हैं और वह शायर नहीं आतंकवादी हैं।

तसलीमा ने मुनव्वर राणा के बयान से जुड़ी एक खबर को शेयर करते हुए लिखा ” भारतीय मुनव्वर राणा को एक प्रगतिशील मुस्लिम मानते हैं! लेकिन वह एक आतंकवादी है। उसने कहा था कि अगर वह राष्ट्रपति होता तो फ्रांस के उस कार्टूनिस्ट को मार डालता। वह उन मुस्लिम आतंकवादियों का समर्थन करता है जिन्होंने फ्रांस में लोगों को मार है। इस मूर्ख ने कुछ भी जाने बिना मेरे बारे और मेरे संघर्ष के बारे में भी झूठ बोला है।”

मुनव्वर राणा ने अपने बयान में कहा था कि अगर कोई माता-पिता या भगवान का गंदा कार्टून बनाता तब वह भी उसकी हत्या कर देते। इसे लेकर उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई है। हालांकि इसके बाद उन्होने सफाई भी दी थी। मुनव्वर राणा ने सफाई में कहा था कि मैंने अध्यापक की हत्या का समर्थन नहीं किया। जिसने कार्टून बनाया उसने गलत किया, जिसने हत्या की गलत किया। लेकिन इस तरह की तस्वीरें या कार्टून नहीं बनाने चाहिए कि कोई भी आदमी जुनून में आ सकता है। मैं इस जुनून को जायज नहीं ठहरा हूं। एक धर्म के नाम पर गौरक्षा की आड़ में एक आदमी को सौ-सौ लोग मार देते हैं, उनकी कितनी सजाएं हुईं, कितनी फांसियां हुई? उसका हिसाब दे दें।

तसलीमा ने मुनव्वर राणा से पहले असदुद्दीन ओवैसी को लेकर भी एक ट्वीट किया था। ओवैसी पर हमला करते हुए उन्होंने ट्वीट किया था कि ओवैसी अक्सर कहते हैं कि वो विदेशी हैं और उन्हें भारत में इस्लाम पर बात करने का कोई अधिकार नहीं है। आम तौर पर मुद्दा यह नहीं है कि विदेशी हैं या नहीं, पर सवाल यह है कि क्या वह अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास करते हैं या नहीं। अगर कोई इस्लाम की अलोचना करें तो उस पर हमला करते हैं जिस तरह से उसने मुझ पर हमला किया है।

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