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IAF AN-32: वायुसेना के लापता विमान का मिला मलबा! 13 लोग थे सवार

एन-32 रूस निर्मित वायुयान है और वायुसेना बड़ी संख्या में इन विमानों का इस्तेमाल करती है। यह दो इंजन वाला ट्रर्बोप्रॉप परिवहन विमान है।

Author नई दिल्ली | June 3, 2019 8:55 PM
भारतीय वायु सेना AN-32 ट्रांसपोर्ट विमान। (File Photo: REUTERS)

IAF AN-32: भारतीय वायु सेना का रूस निर्मित एएन-32 परिवहन विमान सोमवार दोपहर असम के जोरहाट से उड़ान भरने के करीब 35 मिनट बाद लापता हो गया था, बचाव व राहत दल ने उसका मलता बरामद कर लिया है। सियांग घाटी में मलबा मिलने की बात कही जा रही है। इस विमान में 13 लोग सवार थे। इन 13 लोगों में से किसी की जान बची है या नहीं, इसके बारे में जानकारी अभी सामने नहीं आयी है। वहीं, एयरफोर्स ने अभी मलबा मिलने की पुष्टि नहीं की है।

वायुसेना ने बयान जारी कर कहा, “लापता विमान का पता लगाने के लिए भारतीय वायुसेना और भारतीय सेना ALH हेलीकाप्टर के C-130J, AN-32 और Mi-17 को को काम पर लगाया गया है। दुर्घटना स्थल के संभावित स्थान की कुछ रिपोर्टें प्राप्त हुईं, हालांकि, अभी तक किसी भी मलबे को नहीं देखा गया है। भारतीय वायुसेना लापता विमान का पता लगाने के लिए भारतीय सेना, विभिन्न सरकारी और नागरिक एजेंसियों के साथ सामंजस्य बनाए हुए है। भारतीय सेना के हवाई और जमीनी दलों द्वारा रात भर सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा।”

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस विमान में 13 लोग सवार थे। उन्होंने बताया कि इस विमान ने अरुणाचल प्रदेश के मेनचुका एडवांस्ड लैडिंग ग्राउंड के लिए जोरहाट से दोपहर करीब 12 बजकर 25 मिनट पर उड़ान भरी और करीब एक बजे उसका जमीनी नियंत्रण से संपर्क टूट गया था। इस बाबत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायुसेना के उपप्रमुख से बात भी की और सभी अपडेट की जानकारी लेते रहे।

राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘कुछ समय से लापता वायु सेना के एएन-32 विमान के संबंध में भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल राकेश सिंह भदौरिया से बातचीत की। उन्होंने मुझे वायुसेना के इस लापता विमान को लेकर उठाये गए कदमों की जानकारी दी। मैं इसमें सवार सभी यात्रियों की सुरक्षा के लिये प्रार्थना करता हूं।’’

सूत्रों ने बताया कि विमान में चालक दल के आठ सदस्य और पांच यात्री सवार थे। उन्होंने बताया कि विमान का पता लगाने के लिए भारतीय वायु सेना ने सभी उपलब्ध संसाधन काम में लगा दिए हैं। एएन-32 रूस निर्मित वायुयान है और वायुसेना बड़ी संख्या में इन विमानों का इस्तेमाल करती है। यह दो इंजन वाला ट्रर्बोप्रॉप परिवहन विमान है। मेनचुका एडवांस्ड लैडिंग ग्राउंड चीन की सीमा से अधिक दूर नहीं है। (भाषा इनपुट के साथ)

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