ताज़ा खबर
 

नोटबंदी के बाद हाल और बुरा: बेरोजगारी का आंकड़ा दो साल में सबसे ज्‍यादा, नई नौकरी पाने वाले भी घटे

सीएमआईई के मुताबिक इस साल अक्टूबर में देश में बेरोजगारी की दर 6.9 फीसदी पर पहुंच गई है जो पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

देश में नोटबंदी लागू किए आज (08 नवंबर, 2018) दो साल हो रहे हैं। साल 2016 में पीएम नरेंद्र मोदी ने 08 नवंबर को ही रात आठ बजे नोटबंदी लागू करने की घोषणा की थी। इन दो वर्षों में रोजगार पाने वालों के लिए संकट और गहराता चला गया है। थिंक टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) के मुताबिक इस साल अक्टूबर में देश में बेरोजगारी की दर 6.9 फीसदी पर पहुंच गई है जो पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा है। सीएमआईई के मुताबिक देश में बेरोजगारी को लेकर हालात बदतर हैं। श्रमिक भागीदारी भी घटकर 42.4 फीसदी पर पहुंच गया है जो जनवरी 2016 के आंकड़ों से बी नीचे है। श्रमिक भागीदारी का आंकड़ा नोटबंदी के बाद बहुत तेजी से गिरा है। उस वक्त यह आंकड़ा 47-48 फीसदी था जो दो सालों के बाद भी हासिल नहीं कर सका।

सीएमआईई के मुताबिक श्रमिकों के कामधंधों में थोड़ा सा सुधार सितंबर महीने में देखने को मिलता है लेकिन अगले ही महीने यानी अक्टूबर 2018 में यह सबसे निचले पायदान पर पहुंच जाता है। नई नौकरी पाने वालों का भी आंकड़ा गिरा है। थिंक टैंक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2018 में कुल 39.7 करोड़ लोगों के पास रोजगार थे जो पिछले साल यानी अक्टूबर 2017 से 2.4 फीसदी कम है। अक्टूबर 2017 में यह आंकड़ा 40.7 करोड़ था। सीएआईई के मुताबिक एक साल में आई यह कमी लेबर मार्केट में मांग में आई गिरावट की वजह से दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नौकरी पाने की टकटकी लगाए बेरोजगारों के आंकड़ों में भी एक साल में बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2017 के जुलाई में ऐसे बेरोजगारों की संख्या 1.4 करोड़ थी जो 2018 के अक्टूबर में बढ़कर 2.95 करोड़ हो गई। 2017 के ही अक्टूबर में यह आंकड़ा 2.16 करोड़ हो गया था।

सीएमआईई द्वारा जारी बेरोजगारी के आंकड़ों पर टीओआई से बात करते हुए सीआईईएल के एचआर सर्विसेज के सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा कहते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अमूमन सभी सेक्टर्स में अक्टूबर से दिसंबर तक रोजगार सृजन का वक्त होता है लेकिन ताजा रिपोर्ट से स्थिति गंभीर लगती है। बतौर मिश्रा हर साल तकरीबन 1.3 करोड़ लोग देश के लेबर मार्केट में एंट्री करते हैं, बावजूद इसके बेरोजगारी का दर नहीं सुधर सका। उनके मुताबिक अभी भी पावर, इन्फ्रास्ट्रक्चर और आईटी इंडस्ट्री पटरी पर नहीं आ सकी है। संभवत: बेरोजगारी बढ़ने का यह भी एक कारण हो सकता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App