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मोदी का सपना होगा साकार, 6 महीने चौबीसो घंटे 8500 लोगों से काम करा अडाणी ने बनाया सबसे बड़ा सोलर पावर प्‍लांट

यह प्लांट 10 किलोमीटर लंबे और 10 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में लगाया गया है।

Note ban Solar Electricity, Solar Electricity news, Solar Electricity latest news, Note ban Solar, Solar Energy newsसोलर प्लेट को एक जगह एकत्रित करते कर्मचारी। (यह सांकेतिक फोटो है।)

दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में दुनिया का सबसे बड़ा पावर प्लांट लगाया है। यह पावर प्लांट इतना बड़ा है कि भारत के कई शहर भी इससे छोटे पड़ जाएंगे। यह पावर प्लांट 10 किलोमीटर लंबे और 10 किलोमीटर चौड़े क्षेत्र में लगाया गया है। कंपनी का दावा है कि तमिलनाडु के रामनाथपुरम में बना यह सोलर पावर प्लांट दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट है। इस सोलर पावर प्लांट में इतनी बिजली बनाई जाएगी कि उससे डेढ़ लाख घरों को रोशन किया जा सकता है।

8500 लोगों से छह महीन तक 16 घंटे और दो महीन तक 24 घंटे काम करवाकर अडाणी ग्रुप ने दुनिया का सबसे बड़ा पावर प्लांट तैयार कर लिया है। एक विश्लेषक ने कहना है भारत में आमतौर पर देखा जाता है कि इन्फ्राइंट्रक्चर प्रोजेक्टों में देरी होती है लेकिन जिस स्पीड से इस 648 मेगावाट के सोलर पावर प्रोजेक्ट को पूरा किया गया है। इससे पता चलता है कि भारत सोलर पॉलर को लेकर कितना गंभीर है। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र दिल्ली की अरुणा कुमाराकांडाथ ने बताया कि सरकार सोलर पावर को लेकर सरकार का प्लान बहुत साफ है और बड़े सोलर पावर प्लांटों पर सरकार का फोकस ज्यादा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी सोलर उर्जा को लेकर बहुत गंभीर हैं और सोलर पावर के टारगेट को पूरा करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

पैरिस क्लाइमेट डील में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत 2030 तक अपनी जरूरत की 40 फीसदी बिजली गैर जीवाश्म ईंधन से बनाएगा। इसके लिए 10 साल का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया गया है। इसके अनुसार भारत 2027 तक अपनी जरूरत का 57 फीसदी हिस्सा गैर जीवाश्म ईंधन से पूरा करेगा। सोलर इंनर्जी पर पूरा फोकस है। अभी इसकी हिस्सेदारी 16 फीसदी की है। 2022 तक 175 गीगावाट सोलर पावर का टारगेट रखा गया है।

इसका लगभग 60 फीसदी टारगेट पूरा करने के लिए 100 गीगावाट बिजली बड़े सोलर पावर प्लांटों से ही आएगी। सरकार इसके लिए देश के 21 राज्यों में 33 सोलर पावर प्लांट लगाने का प्लान कर रही है। हर प्लांट की क्षमता कम से कम 500 मेगावाट की होगी।  भारत में टारगेट्स को ऐसे समय में लाया गया है जब अक्षय ऊर्जा देश में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। भारत दुनिया में तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उसके बावजूद भी भारत के एक तिहाई घरों तक बिजली की पहुंच नहीं है।

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