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आज विश्व मधुमेह दिवस, इंसुलिन की बिक्री नौ साल में पांच गुना बढ़ी

अध्ययन की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि 2008 से 2012 के बीच इंसुलिन की बिक्री 151.2 करोड़ रुपए से 218.7 करोड़ रुपए हो गई। 2012 से बढ़ते हुए 2016 में यह बिक्री 842 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई।

Author नई दिल्ली | November 14, 2017 1:20 AM
Artificial pancreas, pancreas, pancreas function, pancreas cancer, pancreas diseases, diseases in hindiकृत्रिम अग्न्याशय से मधुमेह रोगियों को फायदा मिलेगा।

मधुमेह रोगियों की ओर से ली जाने वाली दवाओं और इंसुलिन पर कराए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि नौ साल की अवधि में इंसुलिन की बिक्री में पांच गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं डायबिटीज की ओरल दवाओं में चार साल की अवधि में ढाई गुना की वृद्धि दर्ज की गई। इनमें खासतौर पर नई दवाओं और इंसुलिन की बिक्री तेजी से बढ़ी है जिस पर चिंता जताई गई है। जाने-माने मधुमेह रोग विशेषज्ञ और नेशनल डायबिटीज ओबेसिटी एंड कॉलेस्ट्रॉल फाउंडेशन (एन-डॉक) के अध्यक्ष डॉ प्रो अनूप मिश्र के नेतृत्व में देशभर में मधुमेह-रोधी ओरल दवाओं और इंसुलिन की बिक्री का अध्ययन किया गया और इस रोग की नई दवाओं और इंसुलिन व पुरानी दवाओं के पैटर्न में बदलाव का आकलन किया गया। विश्व मधुमेह दिवस (14 नवंबर) के अवसर पर जारी अध्ययन की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि 2008 से 2012 के बीच इंसुलिन की बिक्री 151.2 करोड़ रुपए से 218.7 करोड़ रुपए हो गई। 2012 से बढ़ते हुए 2016 में यह बिक्री 842 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई। यानी नौ साल में इसमें पांच गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह रोगियों और डॉक्टरों में इंसुलिन बाकी पेज 8 पर के इस्तेमाल के प्रति निष्क्रियता में कमी आना रही। इसके साथ ही रोगियों की संख्या बढ़ना और कंपनियों का बढ़-चढ़कर किया जाने वाला प्रचार भी मुख्य कारणों में हैं।

इसी तरह गोलियों या कैप्सूल के रूप में ली जाने वाली मधुमेह-रोधी दवाओं की बिक्री भी तेजी से बढ़ी है। 2013 में यह बिक्री 278 करोड़ रुपए दर्ज की गई जो 2016 में 700 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई। अध्ययन में यह बात भी सामने आई कि डायबिटीज की वजह से किडनी की पुरानी बीमारियां भारतीयों में अधिक देखी जाती हैं और ऐसे मामलों की पहचान भी तेजी से हो रही है। इस वजह से भी इंसुलिन की उपयोगिता बढ़ती जा रही है। अध्ययन में आॅल इंडियन आॅरिजिन केमिस्ट्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स लिमिटेड (एआइओसीडी) से आंकड़े लिए गए।

फोर्टिस सी-डॉक हॉस्पिटल फॉर डायबिटीज एंड अलायड स्पेशलिटीज के चेयरमैन डॉ मिश्रा ने कहा कि ये आंकड़े इसलिए चिंताजनक हैं क्योंकि अधिकतर भारतीयों को डायबिटीज के इलाज के लिए बहुत ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में चिकित्सकों को ध्यान रखना चाहिए कि केवल अधिक महंगी और नई इंसुलिन तथा दवाएं हमेशा बेहतर नहीं होती और पुरानी दवाएं तथा इंसुलिन भी सही तरीके से इस्तेमाल में लाए जाएं तो प्रभावी हो सकते हैं। जिनके पास धन की कमी है, उनके लिए इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए। डॉ मिश्रा ने अपने अध्ययन के आधार पर नई दवाओं की बिक्री और विपणन के नियमों के संदर्भ में दवाओं के दामों पर नियंत्रण, डॉक्टरों में जागरूकता और फार्मास्टयुटिकल कंपनियों के लिए सख्त नियमों का सुझाव दिया है।

 

 

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