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दिल्ली हारने के बाद मोदी पर क्रिकेट WORLD CUP का खुमार!

दिल्ली की हार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रिकेट विश्व कप के खुमार में डूबते नजर आ रहे हैं। गुरुवार को टीम इंडिया और उसके तमाम खिलाड़ियों के नाम प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर न सिर्फ इन खिलाड़ियों को कप जीत कर लाने की शुभकामनाएं दीं, बल्कि हरेक खिलाड़ी के मजबूत पक्ष की तारीफ करते हुए […]

Author Updated: February 14, 2015 10:44 AM
विश्व कप शुरू होने के एक दिन पहले मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन कर क्रिकेट कूटनीति का नया दौर शुरू किया

दिल्ली की हार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रिकेट विश्व कप के खुमार में डूबते नजर आ रहे हैं। गुरुवार को टीम इंडिया और उसके तमाम खिलाड़ियों के नाम प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर न सिर्फ इन खिलाड़ियों को कप जीत कर लाने की शुभकामनाएं दीं, बल्कि हरेक खिलाड़ी के मजबूत पक्ष की तारीफ करते हुए उनकी हौसला अफजाई की कोशिश भी की।

इस बार भारत समेत पांच सार्क देशों की टीम विश्व कप में हिस्सा ले रही हैं और इस मौकेपर प्रधानमंत्री ने एक बड़ा कूटनीतिक एलान भी किया है। वह यह कि वे देश के नए विदेश सचिव एस जयशंकर को सार्क देशों के बीच आपसी समझौतों को मजबूती देने के लिए जल्द ही ‘सार्क यात्रा’ पर भेजेंगे।

विश्व कप में किसी प्रधानमंत्री की दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। आपसी रिश्तों की बेहतरी के लिए भारत के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति (जिनकी भी सत्ता हो) कई बार साथ बैठकर क्रिकेट मैच देख चुके हैं। इसे दोनों देशों के बीच क्रिकेट कूटनीति का नाम दिया जाता है। प्रधानमंत्री की तरफ से विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों से पहले भारतीय टीम को शुभकामनाएं देने का चलन पहले भी रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्रिकेट विश्व कप को लेकर एक के बाद एक 20 ट्वीट करना खासी दिलचस्पी पैदा करता है।

क्या मोदी दिल्ली की हार के बाद बेफिक्र होने की कोशिश कर रहे हैं और क्रिकेट विश्व कप उन्हें यह मौका दे रहा है? क्या इसके जरिए वे खबरों में अपनी खोई हुई जगह पाना चाहते हैं, क्योंकि टीवी अखबारों में पहले सिर्फ मोदी चल रहे थे और आजकल सिर्फ केजरीवाल चल रहे हैं? क्या भारत में अफीम की तरह का नशा बन चुके क्रिकेट पर फोकस कर वे एक बार फिर से ‘जनता का आकर्षण दूसरी तरफ’ ले जाना चाहते हैं? हार से बेतकल्लुफ दिखना चाह रहे हैं? सवाल तमाम हैं जिनका छोटा जवाब शायद हां में हैं।

दरअसल अरविंद केजरीवाल की भारी जीत ने मोदी की जीत के सामने एक बड़ी लकीर खींच दी। और यह लकीर सीधी भी नहीं है बल्कि मोदी की लकीर को काटती हुई खींची गई है। इधर मीडिया का एक तबका जिस तरह से मोदी की जीत के बाद उनके जयगान में लगा रहा, वैसे ही दूसरा तबका केजरीवाल की जीत के बाद उनके जयगान में जुट गया है। केजरीवाल चढ़ते दिख रहे हैं। मोदी उतरते दिख रहे हैं।

शायद अब मोदी को अहसास हो गया है कि भविष्य की जमीन बनानी और बचानी है तो मीडिया का कोलाहल तो चाहिए ही, जमीन पर काम भी करना होगा। ‘हमारे गांव हमारे शहर हमारे गली हमारे मोहल्ले हमारे स्कूल हमारे अस्पताल’ की सफाई का उद्घोष करते विज्ञापन के सुर आजकल धीमे पड़ गए हैं। झाड़ू ने कुछ और ही बुहार दिया है। मोदी अपने भाषणों में इतने सारे वादे खर्च कर चुके हैं कि बिहार और फिर बंगाल के चुनावों में वे नया क्या बोलेंगे यह सोच कर चिंता होने लगी है। एक सवाल यह भी है कि क्या वे अपनी वही लय-सुर और ताल उसी आत्मविश्वास के साथ वापस हासिल कर पाएंगे जिसे दिल्ली के चुनावी नतीजों ने पददलित कर दिया है?

याद कीजिए कि लोकसभा चुनाव से पहले 20-20 मैच के नतीजों की तरह वे ‘विकास ’ देने की बात कर रहे थे। सत्ता में आ गए तो बेहतर नतीजे के लिए मैच को 50-50 ओवरों तक खींचने की मांग करने लगे। ‘थोड़ा वक्त तो दीजिए। कांग्रेस को साठ साल दिया हमें साठ महीने तो दीजिए… मीडिया ने सौ दिन का हनीमून पीरियड भी नहीं दिया…आदि आदि’ । वैसे केजरीवाल भी वादों के फ्री हिट के साथ सत्ता में पहुंचे हैं। दिल्ली की गीली जमीन पर इस बार उनकी कोशिश पैर जमा कर खेलने की होगी। इस बार टीम पूरी है। एक भी खिलाड़ी कम या चोटिल नहीं। इस बार फिसलने का कोई बहाना नहीं चलेगा।

और मोदी से केजरीवाल का यही मुकाबला 20-20 के दो धुरंधरों को ‘टैस्ट मैच’ में उतरने को मजबूर कर दिया है। रुक कर, हर बॉल देखकर, टिककर, जरूरत पड़े तो बैकफुट पर जाकर, कमजोर बॉल को परख कर और अच्छे बॉल को उचित सम्मान देकर, अतिरिक्तखतरा उठाने की हड़बड़ाहट के बिना दोनों को बैटिंग करना है। अपना स्कोर बड़ा करना है। टॉस जीतकर केजरीवाल ने अभी स्ट्राइक संभाली है। पहले उत्तेजना में दिखते थे, पर इस बार जीत से पैदा हुए ‘एग्रेशन’ को संतुलित करने की कोशिश करते दिख रहे हैं। अच्छा परफार्म करने के लिए यह जरूरी है।

उधर मोदी को अभी कुछ दिनों तक क्षेत्ररक्षण करना है। ऐसी जगह फील्डिंग करनी है जहां वे मैदान में भी दौड़ते-भागते दिखें और टीवी पर भी आएं। फील्डिंग की उनकी हर गलती को एक्शन रिप्ले कर बार-बार देखा जाएगा। खासतौर पर तब जब पैवेलियन के ठीक बगल वाले स्टैंड में संघ भी बैठकर मैच देख रहा है। मोदी की हर गलती से केजरीवाल को अतिरिक्त रन मिलेगा। वैसे भी केजरीवाल दो विकटों के बीच तेजी से दौड़कर एक रन निकालने में महारथ हासिल कर चुके हैं। टैस्ट मैच में यह मजबूती देता है। वैसे केजरीवाल कमजोर बॉल पर छक्का मार कर अंपायर से उसे ‘नो बॉल’ करार देने का जोर भी डालते हैं ताकि एक बॉल में वह सात रन जुटा सकें। नकारात्मक प्रचार के ‘ओवर थ्रो’ का केजरीवाल ने कैसा फायदा उठाया यह तो दिल्ली मैच के नतीजे में हम देख चुके हैं। उन्हें आसानी से आउट करना मुश्किल है। ऐसे में दोनों छोर से कसी गेंदबाजी और कैच लपकने की सिद्धहस्तता ही मोदी के लिए बैटिंग का अगला मौका लेकर आएगा।

इसलिए मोदी चौकस हो रहे हैं। इस हार से अगर वे संभल गए हैं तो वे अपनी टीम के खिलाड़ियों पर अन्यथा दबाव बनाने की बजाय ड्रेसिंग रूम में उन्हें पूरा सम्मान देते हुए उनको जानने-समझने की कोशिश करेंगे। किरण बेदी की तरह बाहर से खिलाड़ी लाने की बजाय अपने खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचान कर उन्हें उसके मुताबिक मौका देने की कोशिश करेंगे। वैसे ही जैसे ट्वीट कर टीम इंडिया के हर खिलाड़ी की खूबी को सराहा है।

जब वे भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की खूबी को इस बारीकी से पहचान और लिख सकते हैं तो अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों और पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं को उनकी खूबी के हिसाब से इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकते। ऐसा हो पाएगा या नहीं एक अलग सवाल है। हो सकता है कि उन्हें डर होगा कि कहीं कोई ऐसा मजबूत खिलाड़ी न निकल आए जो उनकी कप्तानी ही छीन ले। वैसे यह तो होता आया है और होता रहेगा। कपिल देव से लेकर गावस्कर तक और अजहर, गांगुली, तेंदुलकर से लेकर धोनी तक, सबको एक न एक दिन कप्तानी से जाना पड़ता है। याद सिर्फ यह रह जाता है कि कौन अब तक का बेहतरीन कप्तान है। फिलहाल मोदी चाहते हैं कि मीडिया और जनता का ध्यान मोदी-केजरीवाल मैच से दूर रहे। ख़ुद को फिर से संगठित करने के लिए उन्हें थोड़ा समय चाहिए। इसलिए वे क्रिकेट विश्व कप की तरफ ध्यान ले जाना चाह रहे हैं।

अंत में बस इतना कि, प्रधानमंत्री जी आपने टीम में जोश भरने की कोशिश इसके लिए देश आपका शुक्रगुज़ार है। हमारी भी शुभकामना साथ है कि इस बार आप ‘चाय पर चर्चा’ करें ‘वर्ल्ड कप’ हाथ में लेकर… टीम इंडिया के साथ।

उमाशंकर सिंह (टिप्पणीकार एनडीटीवी से संबद्ध हैं।)

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