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विश्व बाल श्रम दिवस: ग्राम सभा में ‘बचपन’ को तव्वजो दिलाएं

कोडरमा बाल पंचायत की नेता निशा कुमारी ने कहा-बाल श्रम हमारे बचपन को हमसे छीनने वाली एक बुराई है। विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस के अवसर पर हम मांगों का जो घोषणा पत्र जारी कर रहे हैं, इस पर अमल हो।

Author June 13, 2019 2:05 AM
12 जून विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

प्रियरंजन

बाल श्रम से मुक्त होकर मुख्यधारा में लौटे बच्चों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे ग्राम सभा में ‘बचपन’ को तव्वजो दिलाने और बाल श्रम के लिए सीधे जिलाधिकारी को जिम्मेदार बनाने की पहल करें। दरअसल विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस पर देश भर से वे बच्चे बुधवार को दिल्ली में जुटे थे, जो इस दलदल से निकल चुके हैं। उन्होंने बाल श्रम पर एक राष्ट्रीय पंचायत की और इस दलदल में मौजूद बच्चों को बचाने की पहल की। बता दें कि हरेक साल 12 जून विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर एक रिपोर्ट भी जारी की गई जिसने बच्चों के विरुद्ध अपराध में पांच गुणा बढ़ोतरी की तस्वीर पेश की।

बाल श्रम के खिलाफ राष्ट्रीय पंचायत में भाग लेने वाले बच्चों और कार्यकर्ताओं ने चाणक्यपुरी स्थित विश्व युवा केंद्र से सात लोक कल्याण मार्ग को कई और सुझाव दिए। उन्होंने केंद्र की नई सरकार से देश में बाल श्रम और मानव तस्करी के उन्मूलन की दिशा में मौजूद कानूनों के और प्रभावी बनाने और उसके कड़े कार्यान्वयन की अपील की। बाल श्रम के लिए जिला प्रशासन को पूरी तरह से जिम्मेदार बनाने की भी मांग की।

बच्चों के प्रति बढ़ रहे अपराध और संसद में उस पर चर्चा कम होने पर चिंता जताई। हालांकि, मौके पर मौजूद सांसद अन्नपूर्णा देवी ने बिहार, राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत से आए बच्चों ने भरोसा दिया कि वे लोकसभा में बच्चों से संबंधित समस्याओं को उठाएंगी। बकौल सांसद अन्नपूर्णा इस बार बाल श्रम, सुरक्षा और शिक्षा से संबंधित मुद्दों को संसद में चर्चा का विषय बनाएंगी।

उन्होंने इस खतरे से निपटने के लिए केंद्र से इस मुद्दे को अपने 100-दिवसीय कार्य योजना में प्राथमिकता के साथ शामिल करने की मांग की। साथ ही पंचायत में बच्चों ने अपनी मांगों का एक घोषणा पत्र भी जारी किया। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) कन्वेंशन की सिपारिशों को लागू करने की मांग की। इसके अलावा बच्चों के जीवन को बेहतर, सुरक्षित और स्वस्थ बनाने के लिए ग्राम पंचायतों में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित कराने हेतु बाल पंचायत का गठन करने प्रत्येक पंचायत में विलेज माइग्रेशन रजिस्टर बनाए जाने, बच्चों के मुद्दों पर बात करने के लिए साल में दो बार ‘ग्राम सभा’ की विशेष बैठक बुलाने आदि मांगों को घोषणा पत्र में शामिल किया गया है।

कोडरमा बाल पंचायत की नेता निशा कुमारी ने कहा-बाल श्रम हमारे बचपन को हमसे छीनने वाली एक बुराई है। विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस के अवसर पर हम मांगों का जो घोषणा पत्र जारी कर रहे हैं, इस पर अमल हो। ताकि अभावग्रस्त हमारे भाइयों और बहनों को भी स्वतंत्र, शिक्षित और सशक्त होने का मौका मिल सके। निशा ने पंचायतों में बाल मित्र ग्राम सभा बनाने की मांग की। इस पंचायत में कई सत्र थे। प्रमुख लोगों की परिचर्चा भी हुई। इसमें पूर्व केंद्रीय श्रम सचिव एलडी मिश्रा सहित कई विशेषज्ञों के पैनल ने बच्चों से जुड़े सख्त कानूनों को लागू करने के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।

कैलाश सत्यार्थी ने जारी संदेश में कहा कि सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भारत’ बनाने की प्रतिबद्धता जरूरी है। उन्होंने कहा-बाल मजदूरी और तस्करी जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ने के लिए सभी को काम करना पड़ेगा। नीति-निर्माताओं, नागरकि संस्थाओं, कॉरपोरेट घरानों और न्यायपालिका तक को भी जागना होगा है। तभी बाल मजदूरी से मुक्त भारत दिख सकेगा। कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन ने इसका आयोजन किया था।

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