महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच गतिरोध का असर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए काटे गए नाम का मुद्दा सत्ता विरोधी लहर पर भी हावी होता दिख रहा है। दोनों राज्यों में महिला प्रत्याशियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। बावजूद इसके पश्चिम बंगाल में महिला उम्मीदवार 17.86 फीसदी हैं, जबकि तमिलनाडु में यह आंकड़ा केवल 11.01 फीसदी है।
महिला उम्मीदवारों की संख्या 33 फीसदी से कम
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, कांग्रेस समेत वामदलों ने 33 फीसदी से कम महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने सबसे अधिक 17.86 फीसदी महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया है। इसके बाद भाजपा के 11.22 फीसदी और कांग्रेस के 12.32 फीसदी महिला उम्मीदवार मैदान में हैं। वाम दलों सहित अन्य छोटे दलों में भी यह आंकड़ा 15 फीसदी से कम है।
दूसरी ओर तमिलनाडु में महिला राजनीतिक भागीदारी ऐतिहासिक रूप से धीरे-धीरे बढ़ी है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति अभी भी सीमित है। 1967 में जहां महिला प्रत्याशियों की हिस्सेदारी मात्र 1.41 फीसदी थी। वहीं 1970 और 1980 के दशकों में इसमें बढ़ोतरी के बाद महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़कर भी तीन फीसदी से कम रहा। 1991 तक चुनावों में महिलाओं की हिस्सेदारी 3.6 फीसदी , जबकि बड़े बदलाव के बाद 1996 में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 15.16 फीसदी हो गई थी। लेकिन वर्तमान में यह घटकर 11.01 फीसदी पर है।
क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?
भारतीय प्रबंधन संस्थान (कोलकाता) के राजेश भट्टाचार्य ने कहा, “महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के गिरने के असर कुछ हिस्सों में पड़ सकता है। लेकिन, पहले से ही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान काटे गए नामों का इस चुनाव पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। तृणमूल कांग्रेस को लेकर शुरुआती दौर में विरोध था, लेकिन फिलहाल एसआईआर का मुद्दा हावी होता दिख रहा है। इसमें काटे गए नाम से जुड़े परिवार के सदस्यों के रोष का मतदान पर बड़ा असर दिख सकता है। महिला आरक्षण से काफी अधिक परिसीमन के मुद्दे पर लोगों में रोष है।”
राजनीतिक मामलों के जानकार एम इस्लाम ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर विरोध का कुछ जगहों पर भाजपा या दूसरे दलों को फायदा मिल सकता है। लेकिन परिसीमन और एसआईआर के मुद्दे सभी पर हावी हैं। परिसीमन के मुद्दे को बंग भंग का नाम देते हुए प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को साधने में जुटी है।
(यह भी पढ़ें- बंगाल की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता है प्रेसिडेंसी डिवीजन)
पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनावों में बीजेपी और टीएमसी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बंगाल की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता प्रेसिडेंसी डिवीजन से होकर गुजरता है। पढ़ें पूरी खबर
