Women Panelist challenges Karni Sena over padmavat row, Supreme court verdict - टीवी डिबेट में महिला पैनलिस्ट का करणी सेना को खुला चैलेंज- जाऊंगी फिल्म देखने, दम हो तो रोककर दिखाना - Jansatta
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टीवी डिबेट में महिला पैनलिस्ट का करणी सेना को खुला चैलेंज- जाऊंगी फिल्म देखने, दम हो तो रोककर दिखाना

पैनलिस्ट राखी ने कहा, "आप जनता को धमकी दे रहे हैं। सभी चैनलों पर जा-जाकर कह रहे हैं कि जो भी फिल्म देखने जाएगा उसके साथ बुरा सलूक किया जाएगा।" राखी ने कहा, "मैं भी सुमित अवस्थी की तरह फिल्म देखने जाऊंगी, दम है तो रोककर दिखाना।"

टीवी डिबेट में सामाजिक कार्यकर्ता वाई राखी और करणी सेना के महासचिव सूरजपाल अम्मू बहस करते हुए।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने मंगलवार (23 जनवरी) को राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की उस याचिका को ठुकरा दिया जिसमें 18 जनवरी के फैसले में सुधार करने की अपील की गई थी। कोर्ट ने कहा कि फिल्म तय तारीख 25 जनवरी को ही रिलीज होगी। इस के साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकारों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के फैसले के बावजूद करणी सेना के लोग फिल्म का ना सिर्फ विरोध कर रहे हैं बल्कि फिल्म देखने वालों को धमकी भी दे रहे हैं। मीडिया में दिनभर इस बात पर चर्चा होती रही कि क्या करणी सेना संविधान और सुप्रीम कोर्ट से ऊपर है। न्यूज 18 इंडिया के खास कार्यक्रम ‘हम तो पूछेंगे’ में एंकर एवं होस्ट सुमित अवस्थी ने जब यही सवाल पूछा तो शो में पैनलिस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता वाई राखी ने लाइव डिबेट में करणी सेना के महासचिव सूरजपाल अम्मू को खुली चुनौती दे डाली।

पैनलिस्ट राखी ने कहा, “आप जनता को धमकी दे रहे हैं। सभी चैनलों पर जा-जाकर कह रहे हैं कि जो भी फिल्म देखने जाएगा उसके साथ बुरा सलूक किया जाएगा।” राखी ने कहा, “मैं भी सुमित अवस्थी की तरह फिल्म देखने जाऊंगी, दम है तो रोककर दिखाना।” उन्होने कहा, “मैं यह पूछना चाहती हूं कि आप टीवी चैनल्स पर बैठकर देशभर को धमकी दे रहे हो। एक महिला (पद्मावती) का सम्मान करना चाहते हो और बाकी महिलाओं का अपमान करना चाहते हो। यह नहीं चलेगा।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से मुंह की खाने के बाद करणी सेना के लोग सड़कों पर उतर आए हैं और लोगों से फिल्म ना देखने की अपील कर रहे हैं। साथ ही धमकी भी दे रहे हैं कि जो भी फिल्म देखने जाएगा, उसे करणी सेना की ताकत का अंजाम भुगतना पड़ेगा। बता दें कि सेंसर बोर्ड से पास होने के बावजूद चार राज्यों ने इस फिल्म को प्रदर्शित न करने का फैसला किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले फैसले में राज्य सरकारों द्वारा लगाई गई रोक को हटाते हुए फिल्म को पूरे देश में रिलीज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है।

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