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त्र्यंबकेश्वर के गर्भगृह तक पहुंचीं महिलाएं, पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना की

त्र्यंबकेश्वर थाना प्रभारी एचपी कोल्हे ने बताया कि पुलिसवालों की मौजूदगी में पुणे स्थित स्वराज्य महिला संगठन की वनिता गुट्टे की अगुआई में कार्यकर्ताओं ने सुबह करीब छह बजे भगवान शिव के मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना की।

Author नाशिक | April 22, 2016 3:06 AM
त्र्यंबकेश्वर मंदिर, नासिक। (विकीपीडिया फोटो)

प्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने की कोशिश के दौरान कथित तौर पर हाथापाई के एक दिन बाद गुरुवार को महिला कार्यकर्ताओं ने ‘ड्रेस कोड’ में पुलिस सुरक्षा के बीच भगवान के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। त्र्यंबकेश्वर थाना प्रभारी एचपी कोल्हे ने बताया कि पुलिसवालों की मौजूदगी में पुणे स्थित स्वराज्य महिला संगठन की वनिता गुट्टे की अगुआई में कार्यकर्ताओं ने सुबह करीब छह बजे भगवान शिव के मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना की। गुट्टे ने बताया कि हम खुश हैं कि हमने गर्भगृह में पूजा-अर्चना की है। हम ड्रेस कोड- गीली सूती और सिल्क साड़ियों में पहुंचे थे और न्यासियों ने हमारे साथ अच्छा व्यवहार किया।

कोल्हे ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के लिए मंदिर परिसर में पुलिस जवानों की एक टीम को तैनात किया गया था। देश में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों वाले मंदिरों में से त्र्यंबकेश्वर मंदिर एक है। मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के प्रयास के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ कथित हाथापाई को लेकर बुधवार को त्र्यंबकेश्वर नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष सहित करीब 200 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। मंदिर में प्रवेश करने से रोकने को लेकर गुट्टे ने शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर 14 अप्रैल को पुलिस ने मंदिर ट्रस्ट के कुछ सदस्यों, कुछ स्थानीय पुजारियों और मंदिर के कार्यकर्ताओं सहित करीब 250 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

इस बीच, कार्यकर्ताओं के समक्ष कुछ ग्रामीणों द्वारा कथित तौर पर बाधा पैदा करने को लेकर पुलिस कार्रवाई करने पर स्थानीय लोगों ने शहर में बंद का आह्वान किया, जिसके चलते अधिकतर दुकानें, रेस्तरां बंद रहे। इससे पहले त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट ने प्रसिद्ध भगवान शिव मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं को हर दिन एक घंटा पूजा-अर्चना करने की अनुमति देने का निर्णय किया है। हालांकि गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने के लिए उन्हें गीली सूती या सिल्क के कपड़े पहनने पड़ेंगे।

जनवरी में यह घटना उस समय आई, जब सैकड़ों महिला कार्यकर्ताओं ने शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास किया था। महीनों चले प्रदर्शन और बंबई हाई कोर्ट के आदेश के बाद आखिरकार महिलाओं को आठ अप्रैल को मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिली। अदालत ने कहा था कि मंदिर में प्रवेश हरेक नागरिक का मौलिक अधिकार है। इस निर्णय से अन्य मंदिरों में इस तरह के प्रतिबंधों का सामना कर रहे महिलाओं के लिए रास्ता साफ हो गया।

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