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सामाजिक बुराइयों को पस्त करेंगी ‘महिला कमांडो’

छत्तीसगढ़ के बलोद जिले में शराब और अन्य सामाजिक बुराइयों से लड़ रही ‘महिला कमांडो’ की इन दिनों काफी चर्चा है।

Author रायपुर | August 13, 2016 5:09 AM
(Express File Pic)

छत्तीसगढ़ के बलोद जिले में शराब और अन्य सामाजिक बुराइयों से लड़ रही ‘महिला कमांडो’ की इन दिनों काफी चर्चा है। ये समूह जिले के गुंडरदेही, गुरूर और बलोद विकासखंड के लगभग तीन सौ गांवों के साथ-साथ पड़ोसी जिले दुर्ग के पाटन क्षेत्र के लगभग 150 गांवों में सक्रिय हैं। बुंदेलखंड में खासी लोकप्रियता हासिल कर चुके गुलाबी गैंग की मीडिया में तो खूब चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब लाल पोशाक और लाल टोपी में महिला कमांडो के जज्बे की खूब चर्चा है। ये महिला कमांडो अब विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) बन कर इन सामाजिक बुराइयों को जड़ से उखाड़ फेंकने को तैयार हैं। इस समूह में लगभग आठ हजार महिलाएं साथ मिल कर क्षेत्र में शराब माफियाओं से लोहा ले रही हैं।

रोज शाम लगभग 40 महिलाओं का समूह लाठी और टार्च लेकर शराब माफियाओं के खिलाफ गश्त में निकलता है। इस दौरान महिलाएं शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करती हैं और शराब पीने वालों को इसकी बुराइयों से अवगत कराती हैं। बलोद जिले के पुलिस अधीक्षक शेख आरिफ हुसैन ने इन महिला कमांडो की काम करने की लगन को देखते हुए जिले में ‘मिशन पूर्ण शक्ति’ नाम से एक परियोजना शुरू की है। पुलिस अधीक्षक ने इन महिला कमांडो को एसपीओ बनाने का फैसला किया है। ये पुलिस के साथ मिलकर समाजिक बुराइयों का मुकाबला करेंगी।

पुलिस अधीक्षक आरिफ शेख हुसैन ने कहा, ‘इस परियोजना के तहत पांच विकासखंड की लगभग 12 सौ महिला कमांडो को आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को ‘रेडी टू रियक्ट’ नाम दिया गया था। इस परियोजना के तहत पहले एक सौ महिला कमांडो को एसपीओ बनाया गया है। इसके लिए बलोद और गुंडरदेही ब्लाक के एक-एक गांव बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
से 10-10 महिलाओं का चयन किया गया है।’

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में 2006 में सामाजिक कार्यकर्ता शमशाद बेगम ने अपने गृहग्राम गुंडरदेही में स्व-सहायता समूह की महिलाओं को लेकर ‘महिला कमांडो’ का गठन किया था। इस समूह ने क्षेत्र में शराब और अन्य सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का बीड़ा उठाया और आज इसमें लगभग आठ हजार महिलाएं साथ मिलकर क्षेत्र में शराब माफिया से लोहा ले रही हैं।

बेगम (52) को 2012 में भारत सरकार ने महिलाओं की शिक्षा, पिछड़े वर्ग की उन्नति और अन्य सामाजिक कार्यों के लिए पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। बेगम कहती हैं कि महिला कमांडो में शामिल महिलाओं ने शराब की बुराइयों के कारण बहुत कुछ झेला है। अब वे चाहती हैं कि आने वाली पीढ़ी इस बुराई से दूर रहे। यही कारण है कि ये महिलाएं शराबबंदी का प्रयास कर रही हैं। इसके लिए वह सभी कठिनाइयां झेल रही हैं।

उन्होंने बताया कि यह कार्य ‘सहयोगी जन कल्याण समिति’ के माध्यम से किया जा रहा है। कई बार पहरा देने के दौरान महिलाओं को विपरित परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है। महिलाएं कानून अपने हाथ में नहीं लेतीं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस की सहायता ली जाती है।’ शमशाद बेगम ने कहा, ‘ऐसा नहीं कि महिला कमांडो क्षेत्र में केवल अवैध शराब के खिलाफ लड़ रही हैं। महिलाएं दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों से भी लड़ रही हैं और गांव में सरकार की विभिन्न योजनाओं को लेकर लोगों को जागरूक भी कर रही हैं।’

उन्होंने कहा, ‘मैं दावा नहीं करती कि महिला कमांडो ने कितने गांवों को शराब मुक्त करवाया है लेकिन विश्वास है कि आने वाले समय में इसके बेहतर परिणाम होंगे।’ उन्होंने कहा कि बालोद जिले के पुलिस अधीक्षक ने इन महिला कमांडो को एसपीओ बनाने का फैसला किया है। ये पुलिस के साथ मिलकर समाजिक बुराइयों का मुकाबला करेंगी।

आरिफ हुसैन ने कहा, ‘जिले में इन महिलाओं को एसपीओ बनाने का फैसला किया गया है जिससे यह सरकार के साथ मिलकर और भी बेहतर काम कर सकें। इस परियोजना के तहत पहले एक सौ महिला कमांडो को एसपीओ बनाया गया है। इसके लिए बलोद और गुंडरदेही ब्लाक के एक एक गांव से 10-10 महिलाओं का चयन किया गया है।’

कम्युनिटी पुलिस फंड के माध्यम से एसपीओ महिलाओं को गस्त के लिए लाठी, वर्दी के रूप में लाल साड़ी, लाल टोपी, सीटी और टार्च दिया गया है। आने वाले तीन महीने के दौरान एसपीओ के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा और बाद में इनकी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आने वाले समय में जिले में 10 हजार महिला कमांडो को एसपीओ के रूप में चयन करने के लिए राज्य शासन को 40 लाख रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। हुसैन ने कहा महिला कमांडो के कारण जिले में कुछ हद तक शराब के अवैध कारोबार पर लगाम लगा है साथ ही अन्य अपराधों में भी कमी आई है।

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