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J&K: महिला पत्रकार का पुलिसवालों पर बदसलूकी का आरोप, बोलीं- आज तक ऐसी गालियां किसी ने नहीं दी

पत्रकार ने कहा कि राजबाग स्थित अपने घर से मीडिया सेंटर की तीन किलोमीटर की दूरी तय करने तक उन्हें 15 जगहों पर रोका गया। उन्होंने कहा, 'जहांगीर चौक पर मुस्तैद सुरक्षाबलों ने मुझसे कहा कि मैं लौट जाऊं। मैंने उनसे आग्रह किया को वो मेरे साथ इस तरह का व्यवहार ना करें। कई मिनट तक वे मेरी कार को रोकते रहे और मुझे और मेरे परिवार को गालियां दीं।'

policemanतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में रविवार को एक राष्ट्रीय दैनिक अखबार की महिला पत्रकार को एक पुलिसकर्मी ने गाली दी और बुरी तरह धमकाया। एक अंग्रेजी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है। चंडीगढ़ स्थित द ट्रिब्यून की संवाददाता रिफत मोहिदीन ने कहा कि लगभग आधा दर्जन पुलिसकर्मियों ने उनकी कार पर ‘कई मिनट’ तक लाठियां बरसाईं। इस दौरान वह कार के अंदर बैठी रो रहीं थीं। हालांकि इस दौरान उन्होंने हिम्मत करके पुलिसकर्मियों से कहा कि वो उनके प्रति इस तरह का व्यवहार ना करें।

रिफत ने अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ को बताया, ‘मैंने पहले कभी इस तरह की गालियां नहीं सुनी जो उन्होंने मुझे कहीं। उन्होंने मेरी कार पर डंडे बरसाए। हालांकि शीशों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। मैं रोने लगी मगर कोई मुझे बचाने नहीं आया।’ उन्होंने कहा कि मैं अभी तक सदमे में हूं। अगर मैं अपने परिवार को इस घटना के बारे में बताऊं तो वह मुझे पत्रकारिता करने की अनुमति नहीं देंगे।

पत्रकारों ने सरकारी मीडिया सेंटर में पत्रकारों के घाटी समुदाय को आधिकारिक तौर पर आवंटित किए गए सेलफोन से पुलिस और सूचना विभाग को फोन करने की कोशिश की, लेकिन इस मामले में उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। हालांकि श्रीनगर के पुलिस चीफ हसीब मुगल ने एक टेक्स्ट मैसेज का जवाब जरूर दिया।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त होने के बाद घाटी में पत्रकारों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। घाटी में कई पत्रकारों को अभी तक ‘कर्फ्यू पास’ नहीं मिले हैं। इन्हें इंटरनेट और मोबाइल सुविधाओं का उपयोग करने के लिए मीडिया सेंटर की कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। घाटी में दर्जनों महिला पत्रकार ऐसी हैं जिन्हें अपने पुरुष सहयोगियों के समान ही चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

द टेलीग्राफ ने एक अंतर्राष्ट्रीय न्यूज चैनल की महिला पत्रकार के हवाले से बताया कि हाल ही में श्रीनगर के पुराने क्वार्टर के नौहट्टा में कुछ शॉट्स फिल्माते हुए जब उन्होंने कैमरामैन को देखा तो सुरक्षाबलों ने करीब-करीब उसपर हमला कर दिया था। अखबार ने बताया कि पांच अगस्त को प्रशासन द्वारा कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से रविवार घाटी के पत्रकारों के लिए शायद सबसे बुरा दिन था।

एक स्थानीय संपादक मंजूर जहूर को सुरक्षा बलों के साथ बहस करने के बाद उन्हें शहर से दूर ले जाया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक मीडिया सेंटर में पत्रकारों की उपस्थिति में 80 फीसदी तक की गिरावट आई है। रिफत ने कहा कि राजबाग स्थित अपने घर से मीडिया सेंटर की तीन किलोमीटर की दूरी तय करने तक उन्हें 15 जगहों पर रोका गया। उन्होंने कहा, ‘जहांगीर चौक पर मुस्तैद सुरक्षाबलों ने मुझसे कहा कि मैं लौट जाऊं। मैंने उनसे आग्रह किया को वो मेरे साथ इस तरह का व्यवहार ना करें। कई मिनट तक वे मेरी कार को रोकते रहे और मुझे और मेरे परिवार को गालियां दीं।’

रिफत के मुताबिक, ‘मैंने उनसे कहा कि मेरे पास कर्फ्यू पास है, मगर उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी। मुझे नहीं पता था कि क्या करूं। आखिरकार, सीआरपीएफ के एक जवान ने मुझे जाने देने के लिए कहा। इसके बाद मैंने कहीं पर अपनी कार पार्क की।’

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