मान्यता: भगवान बद्रीश पंचायत की परंपरा

कनखल के गंगा तट पर स्थित बद्रीश पंचायत मंदिर के बारे में मान्यता है कि भगवान बद्रीविशाल के अनन्य भक्त रामानुज संप्रदाय के बैरागी बाबा आचार्य इंद्रमणि महाराज को एक रात बद्रीनारायण भगवान ने स्वप्न में दर्शन दिए और गंगा तट पर बद्री विशाल का मंदिर स्थापित करने के लिए प्रेरित किया था।

बद्रीश पंचायत मंदिर कनखल में स्थित भगवान बद्री विशाल का विग्रह अपनी और हर एक को आकर्षित करता है।

उत्तराखंड के चार धामों में से एक बदरीनाथ धाम मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही तीर्थ नगरी हरिद्वार के उपनगर कनखल में गंगा तट पर स्थित भगवान बद्रीश पंचायत के कपाट वैदिक विधि विधान के साथ खोले जाने की परंपरा 90 सालों से निरंतर चली आ रही है और इसका निर्वहन आज भी हो रहा है। कनखल में जहां सृष्टि के संहारक शिव पूजे जाते हैं वही सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की भी पूजा बद्रीश पंचायत के रूप में होती है

कनखल के गंगा तट पर स्थित बद्रीश पंचायत मंदिर के बारे में मान्यता है कि भगवान बद्रीविशाल के अनन्य भक्त रामानुज संप्रदाय के बैरागी बाबा आचार्य इंद्रमणि महाराज को एक रात बद्रीनारायण भगवान ने स्वप्न में दर्शन दिए और गंगा तट पर बद्री विशाल का मंदिर स्थापित करने के लिए प्रेरित किया था। बद्रीश पंचायत मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित गजेंद्र दत्त जोशी बताते है कि इसके बाद आचार्य इंद्रमणि महाराज हरिद्वार से पैदल चल कर बद्रीनाथ धाम पंहुचे और भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए।

वहां से आने के बाद उन्होंने यहां पर चतुर्भुज बदरीनारायण की स्थापना की उन्होंने यंहा पर बद्रीविशाल जैसा ही भगवान बद्रीनारायण का विग्रह स्थापित किया। सन 1930 में कनखल में आचार्य श्री ने बद्रीश पंचायत की स्थापना की तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि जब बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले जाते हैं और भगवान बद्रीनारायण की विशेष पूजा अर्चना, अनुष्ठान किया जाता है, उसी तरह कनखल में भी बद्रीश पंचायत के कपाट खोले जाते और बद्री स्त्रोत के पाठ के साथ-साथ विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।

90 साल पहले कनखल में बद्रीश पंचायत की स्थापना करने से पूर्व आचार्य इंद्रमणि महाराज ने यहां गंगा के तट पर मां गंगा की घोर तपस्या की थी। इस तपस्या के उपरांत उन्हें भगवान बद्री विशाल ने सपने में दर्शन दिए थे और इस मंदिर की स्थापना के साथ ही यह परंपरा पड़ी कि चार धामों में से एक बदरीनाथ धाम की यात्रा शुरू करने पूर्व कनखल स्थित बद्रीश पंचायत के दर्शन किए जाने लगे और यहीं से बदरीनाथ समेत उत्तराखंड के चार धामों की यात्रा शुरू होती थी।

यह बद्रीश पंचायत मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है जो श्रद्धालु बदरीनाथ धाम के दर्शन करने नहीं जा पाते हैं वह इस बद्रीश पंचायत के दर्शन करके पुण्य लाभ कमाते हैं। इस बद्रीश पंचायत मंदिर में भगवान बद्री विशाल की पूजा साल भर की जाती है और अलकनंदा तट पर स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद भगवान विष्णु के भक्तगण कनखल में गंगा के तट पर बद्रीश पंचायत मंदिर में पूजा अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।

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