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गणतंत्र दिवस: सांस्कृतिक विरासत की बहुरंगी छटा के साथ, राजपथ पर दिखा देश का दमखम

गणतंत्र दिवस परेड में 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों व अर्द्धसैनिक बलों की नौ झांकियों का प्रदर्शन किया गया। लद्दाख पहली बार संघ शासित राज्य के तौर पर राजपथ पर हुए समारोह में शरीक हुआ।

Rafael Fighter Aircraftगणतंत्र दिवस पर राजपथ पर आकाश में राफेल लड़ाकू विमान ने भी उड़ान भरी। (फोटो-पीटीआई)

आजादी के बाद पहली बार कोरोनाकाल में देश का 72वां गणतंत्र दिवस समारोह बदले अंदाज में मनाया गया। कोविड-19 के कारण उत्पन्न परिस्थिति के मद्देनजर इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में कोई विदेशी शासनाध्यक्ष मुख्य अतिथि के रूप में नहीं थे। देश के अतिथि भी सीमित संख्या में बुलाए गए थे। राजपथ पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तिरंगा फहराया व परेड की सलामी ली। इस अवसर पर ऐतिहासिक विजय चौक पर देश के शौर्य व एकता में पिरोई विविधता वाली भारत की अनूठी सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक युग की उपलब्धियां, भविष्य के राष्ट्र का खाका और देश की सुरक्षा व सैन्य क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

राजपथ पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं के साथ भव्य परेड देखा। राजपथ पर भारत की संस्कृति के रंगों और रक्षा क्षेत्र की ताकत का प्रदर्शन किया गया। अत्याधुनिक हथियारों, मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और भारतीय सैनिकों के दस्तों ने किसी भी चुनौती से निपट सकने की देश की ताकत का अहसास कराया। सबसे अंत में रोमांच से भर देने वाले युद्धक विमानों को राजपथ के उपर से हैरतअंगेज कारनामों के साथ उड़ान भरते देखा गया। इन विमानों की ताकत के साथ ही वायुसेना के पायलटों का हुनर और जांबाजी का अहसास हुआ।

परेड शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार गणतंत्र दिवस पर केसरिया रंग की जामनगर की खास पगड़ी, पारंपरिक कुर्ता पाजामा और जैकेट पहने इंडिया गेट पहुंचे। इंडिया गेट पर स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पहुंच कर उन्होंने देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत सहित तीनों सेनाओं के प्रमुख भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने शहीदों के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा। उन्होंने आगंतुक पुस्तिका पर संदेश भी लिखा।

करीब 10 बजे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान की धुन के बीच 21 तोपों की सलामी के साथ परेड शुरू हुई। परेड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल विजय कुमार मिश्रा थे। परेड में बांग्लादेश सशस्त्र सेना के 122 जवानों के मार्चिंग दस्ते ने हिस्सा लिया। बांग्लादेश की इस टुकड़ी का नेतृत्व कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल अबू मोहम्मद शाहनूर ने किया। इस वर्ष भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों के पचास साल पूरे हो रहे हैं। यह बांग्लादेश की आजादी का भी 50वां साल है।

गणतंत्र दिवस परेड में 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों व अर्द्धसैनिक बलों की नौ झांकियों का प्रदर्शन किया गया। लद्दाख पहली बार संघ शासित राज्य के तौर पर राजपथ पर हुए समारोह में शरीक हुआ। राज्य के भविष्य का खाका पेश करते सीमा सुरक्षा बलों के ऊंट सवार दस्ते और बैंड ने अद्भुत नजारा पेश किया।

गणतंत्र दिवस परेड देखने आई करीब 25 हजार की संख्या में लोग भावविभोर होकर आकाश की ओर टकटकी लगाए हुए थे। जब रफाल ने आसमान में ब्रह्मास्त्र आकृति का निर्माण किया और कुछ दूरी तक नीचे की ओर आकर फिर 90 डिग्री पर ऊपर की ओर उठा तब लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। परेड में एक डकोटा विमान के साथ दो एमआई 17 वी5 हेलिकॉप्टरों ने ‘रुद्र’ आकृति बनाई। डकोटा विमान ने 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

दिल्ली तमिल एसोसिएसन स्कूल, यमुना बिहार राजकीय विद्यालय के छात्रों के अलावा पूर्वी सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता, माउंट आबू पब्लिक स्कूल व विद्या भारती स्कूल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गणतंत्र दिवस परेड समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उपस्थित दर्शकों का अभिवादन किया। वे कुछ दूर तक पैदल चले।

झांकियों ने जीत लिया दिल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह के मद्देनजर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई थी जिसके तहत हजारों सशस्त्र कर्मी कड़ी निगरानी कर रहे थे। अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास के अपने भरोसे को बनाए रखते हुए, डीआरडीओ एक बार फिर प्रतिष्ठित गणतंत्र दिवस परेड 2021 के लिए दो महत्वपूर्ण झांकियां लेकर आया। उनमें वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों का प्रदर्शन करते हुए, लाइट कॉम्बैट एअरक्राफ्ट-एलसीए का उड़ान भरना और विमान वाहक पोत पर उतारना शामिल है।

गणतंत्र दिवस परेड में उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, दिल्ली, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश सहित कई राज्यों की सांस्कृतिक विविधता व उपलब्धियों की झांकी प्रस्तुत की गई। दिल्ली की झांकी में शाहजहानाबाद के पुनर्निर्माण, उत्तर प्रदेश की झांकी में सांस्कृतिक धरोहर और राममंदिर को प्रस्तुत किया गया। महाराष्ट्र की झांकी में भक्ति आंदोलन, उत्तराखंड की झांकी में केदारनाथ मंदिर व राज्य पशु कस्तुरी मृग, त्रिपुरा की झांकी में पर्यावरण अनुकूल परंपरा का चित्रण था।

जबकि पंजाब की झांकी नौवें सिख गुरु तेगबहादुर जी को समर्पित थी। जबकि तमिलनाडु की झांकी पल्लव शासकों के समय बने मंदिरों, गुजरात की झांकी में सूर्य मंदिर की झलक प्रस्तुत की गई, वहीं असम की झांकी में वहां की अर्थव्यवास्था का मूल आधार चाय बागान, पश्चिम बंगाल की झांकी का विषय ‘परिवर्तन के लिए’ था। छत्तीसगढ़ की झांकी संगीत की मधुरतम धुनों पर आधारित थी, वहीं कर्नाटक की झांकी में विजयनगर शहर की तस्वीरऔर सिक्किम की झांकी में लहबसोल त्योहार की झलक प्रस्तुत की गई। इसके अलावा जैव प्रौद्योगिकी विभाग की झांकी में आत्मनिर्भर भारत अभियान-कोविड से जुड़ी प्रस्तुति थी। श्रम मंत्रालय की झांकी में श्रम सुधारों को दर्शया गया। परेड में गढ़वाल राइफल्स, जाट रेजिमेंट, महार रेजिमेंट के अलावा सिख, असम व जम्मू कश्मीर राइफल्स के रेजिमेंटल दस्ते व एनएसजी के दस्ते ने भी हिस्सा लिया।

रफाल के उड़ान भरते ही आसमान में टिकीं नजरें
राजपथ पर परेड की खासियत रहे हाल ही में फ्रांस से आए रफाल विमान, जिन्होंने हैरतअंगेज करतब और आकाश में वायु सेना की शक्तिका प्रदर्शन किया। जमीन से 300 मीटर की उंचाई पर 780 व 900 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से जब राफाल ने उड़ान भरी तो लोग इस हैरत अंगेज कारनामें को देखते रह गए। राजपथ पर करतब दिखाने के लिए फलौदी से रफाल ने उड़ान भरी और दिल्ली तक का सफर चंद मिनटों में तय कर लिया।

मंगलवार को गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय वायु सेना के 38 विमानों ने हिस्सा लिया जबकि भारतीय सेना के चार विमान इसमें शामिल हुए। हाल ही में वायुसेना में शामिल किए गए रफाल लड़ाकू विमान ने परेड में हिस्सा लिया और एकल प्रदर्शन के तहत आकाश में ब्रह्मास्त्र आकृति और चार अन्य लड़ाकू विमानों के साथ ‘एकलव्य’ आकृति बनाने का अद्भुत नजारा प्रस्तुत किया। एकलव्य आकृति का निर्माण करने में रफाल विमान का साथ दो जगुआर और दो मिग-29 विमानों ने दिया। रफाल की अगुआई में इन लड़ाकू विमानों ने ‘वी’ आकृति का निर्माण किया। इसकी अगुआई कैप्टन रोहित कटारिया ने की।

ब्रह्मोस मिसाइल का भी प्रदर्शन किया गया। भारतीय वायु सेना में शामिल किए गए चिनूक और अपाचे युद्धक हेलिकॉप्टर के साथ एमआई-17 हेलिकॉप्टर गणतंत्र दिवस की भव्य सैन्य परेड में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। चिनूक दूरदराज के स्थानों तक व्यापक स्तर पर सामग्री को पहुंचा सकता है। अपाचे हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाला हेलिकॉप्टर है जो दुश्मनों पर कहर ढा सकता है। गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सी-130जे, जगुआर, सुखोई विमानों ने अद्भुत प्रदर्शन कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया । परेड में सुखोई 30 एमकेआई, मिग 29, सी 17 ग्लोबमास्टर, सी 130जे विमानों ने भी हिस्सा लिया। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाक प्रणाली का भी प्रदर्शन किया गया।

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