ताज़ा खबर
 

युवा शक्ति: ऑनलाइन शिक्षण में बेहतर भविष्य

ऑनलाइन शिक्षा कंप्यूटर आधारित शिक्षण व्यवस्था पर आधारित होती है। इसलिए यह वैकल्पिक शिक्षा को बढ़ावा देती है। क्योंकि इसका दायरा एक कमरे तक ही सीमित नहीं होता है। अत: प्राय: यहां उत्कृष्ट सामग्री और शिक्षण को ही प्राथमिकता दी जाती है।

Author Published on: June 4, 2020 12:31 AM
घर में कंप्यूटर पर ऑनलाइन पढ़ते बच्चे।

तकनीक की चौथी पीढ़ी के आगमन के साथ ही शिक्षा क्षेत्र होने वाले बदलावों की झलक पूरी दुनिया में मिलने लगी थी। लेकिन कोरोना विषाणु संक्रमण और इसके प्रसार के लिए लगाई गई पूर्णबंदी ने इस तकनीक को न केवल और बढ़ने का अवसर दिया बल्कि अब वैश्विक स्तर पर चर्चा भी होने लगी कि भविष्य के शिक्षण का माध्यम यह आनलाइन प्रणाली ही होगा। यह प्रणाली पूरी तरह स्मार्ट तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स पर आधारित होगी। फोर्ब्स की ताजा रिपोर्ट को यदि हम माने तो कोरोना काल के दौरान दुनिया के 90 फीसद से अधिक लोग आनलाइन शिक्षण-प्रशिक्षण के माध्यम से घर बैठे शिक्षा ले रहे हैं।

वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए भारतीय साफ्टवेयर कंपनी टीसीएस ने भी घोषणा की है कि वह 2025 तक अपने 75 फीसद से अधिक कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति देगी। कंपनी इस दिशा में काम करना भी प्रारंभ कर चुकी है। टीसीएस का मानना है कि इससे न केवल संसाधनों के खर्च में कमी आएगी बल्कि सड़कों पर यातायात में भी कमी भी आएगी। साथ ही साथ 50 फीसद से अधिक का अतिरिक्त खर्च भी इसके माध्यम से बचाया जा सकता है।

29 अप्रैल, 2020 को जारी अपने परिपत्र के अनुसार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने यह घोषणा कर दी है कि कोरोना और पूर्णबंदी को देखते हुए आने वाले समय में हमें आनलाइन शिक्षण की ओर अधिक ध्यान देना होगा और इसके लिए वर्तमान संकाय सदस्यों को सूचना-प्रौद्योगिकी से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। आगामी सत्र से 25 फीसद से अधिक शिक्षण का कार्य आनलाइन होगा जबकि 75 फीसद कक्षा शिक्षण पर आधारित होगा।

इतना ही नहीं यूजीसी अपने इस परिपत्र में एमफिल और पीएचडी जैसी डिग्री की मौखिक परीक्षा को भी आनलाइन ही लेने की अनुमति दे दी है। यही कारण है कि अब दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थान भी आनलाइन परीक्षा कराने की तैयारी भी कर चुके है। इससे साफ जाहिर होता है कि यूजीसी भी धीरे-धीरे आनलाइन शिक्षण की ओर अपने कदम बढ़ा रहा है। इसके साथ ही केंद्र सरकार भी आनलाइन पोर्टल जैसे स्वयं और मूक जैसे प्लेटफार्म से डिग्री प्राप्त करने और शिक्षा ग्रहण करने को दे रही है।

आनलाइन शिक्षण के लाभ
यह बात सही है कि जो प्रभाव एक विद्यार्थी के दिलो-दिमाग पर कक्षा आधारित शिक्षण में पड़ता है, वह आनलाइन शिक्षण के माध्यम से कभी नहीं आ सकता। लेकिन यह बात भी सच है कि आनलाइन शिक्षा प्रणाली ने संचार माध्यमों का उपयोग करके विद्यार्थियों और शिक्षकों को काम करने कि जो सुविधा प्रदान की है, वह कक्षा आधारित शिक्षण के माध्यम से कभी संभव नहीं हो सकता है। आनलाइन शिक्षण के माध्यम से शिक्षक दुनियाभर में कहीं से भी पढ़ा सकता है। ई-लर्निंग दूरस्थ शिक्षा का भी एक प्रकार है। इसलिए कोई भी व्यक्ति कहीं भी बैठकर शिक्षा प्राप्त कर सकता है।

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार : आनलाइन शिक्षा कंप्यूटर आधारित शिक्षण व्यवस्था पर आधारित होती है। इसलिए यह वैकल्पिक शिक्षा को बढ़ावा देती है। क्योंकि इसका दायरा एक कमरे तक ही सीमित नहीं होता है। अत: प्राय: यहां उत्कृष्ट सामग्री और शिक्षण को ही प्राथमिकता दी जाती है।

सभी के लिए सामान्य रूप से सुलभ : आनलाइन शिक्षण में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। इसमें अमीर और गरीब जैसी कोई खाई नहीं होती। यदि किसी के पास इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटर या मोबाइल की व्यवस्था है तो वह कहीं भी बैठकर के इस सुविधा का लाभ उठा सकता है। यह आफलाइन शिक्षण के मुकाबले काफी सस्ता माध्यम है, क्योंकि इसमें रहने-खाने की व्यवस्था अलग से नहीं की जाती। कोई भी छात्र दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर कहीं से भी कोई भी शिक्षा हासिल कर सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े लोग भी इसका लाभ ले सकते है। यह सुविधा चौबीस घंटे, सातों दिन सभी के लिए उपलब्ध होती है।
सामाजिक परिस्थिति को ऊपर उठाने में सहायक : भारत जैसे देश में जहां आज भी लड़कियों को शहरों आदि में पढ़ाना उचित नहीं समझा जाता है। उनके लिए यह व्यवस्था बहुत ही कारगर है, क्योंकि इसका फायदा कोई भी व्यक्ति एक इंटरनेट युक्त मोबाइल के माध्यम से कहीं भी ले सकता है।

शिक्षकों के लिए भी फायदेमंद : आनलाइन शिक्षा का विद्यार्थियों के साथ-साथ उन शिक्षकों को भी बहुत फायदा होगा, जो विश्वविद्यालय की राजनीति के चलते अपनी जगह नहीं बना पाते हैं। आॅनलाइन शिक्षा ऐसे शिक्षकों के लिए एक वरदान की तरह है जो अपने विषय के ज्ञान में पूरी तरह से पारंगत हैं लेकिन भाई-भतीजावाद, सिफारिश आदि के कारण अपनी जगह नहीं बना पाते हैं। ऐसे में यह शिक्षण व्यवस्था उन सभी शिक्षकों के लिए स्वर्णिम अवसर लेकर आती है जिनमें खुद की काबिलियत है।

भविष्य
कोरोना विषाणु संक्रमण जैसी महामारी और महंगी होती शिक्षा व्यवस्था को देखते हुए कहा जा सकता है कि आॅनलाइन शिक्षण का भविष्य बेहतर ही होगा। जो भी शिक्षक और विद्यार्थी इस क्षेत्र में जाना चाहते हैं, यदि वह समय के अनुसार अपने आपको ढाल लेते हैं तो उसका भविष्य भी उज्ज्वल होगा। इस क्षेत्र में आने वाले समय में अवसरों की कोई कमी नहीं होगी।
– डॉ. संजय सिंह बघेल
(शिक्षक, दिल्ली विश्वविद्यालय)

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 कोरोना के बीच मुंबई पर कुदरत का कहर! 110Km प्रति घंटे की रफ्तार संग ‘निसर्ग’ ले उड़ा घरों की छत, गिरे पेड़; एयरपोर्ट पर फिसला कार्गो प्लेन
2 लैला के प्‍यार में पागल थे जॉर्ज फर्नांडिस, जिस नीतीश को बनाया उन्‍होंने ही कैसे लगाया किनारा, पढ़िए पूरा किस्सा
3 गुजरातः कैमिकल फैक्ट्री में धमाके के बाद लगी भीषण आग, 5 लोगों की मौत; 40 लोग घायल