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बदलाव की बयार: अपराध, हिंसा और रोमांच से भरी सीरीज दर्शकों की पसंद बनीं, ‘ओटीटी’ पर गालियां चल रही हैं या गोलियां

अपराध, रोमांच और मारधाड़ से भरपूर फिल्में दर्शक खूब पसंद करते रहे हैं। वजह यह है कि यह रोजमर्रा के जीवन से हटकर एक अलग दुनिया की कहानी कहती है। लिहाजा परदा छोटा हो या बड़ा प्यार और रोमांंस के साथ अपराध और रोमांच हर दौर में दर्शकों की पसंद रहे हैं। इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म की वेब सीरीजों में या तो गोलियां चल रही हैं या गालियां।

दर्शकों की नई पसंद ओटीटी पर सिनेमा और भरपूर रोमांच।

आरती सक्सेना

इन दिनों सिनेमाघरों में नीम सन्नाटा पसरा हुआ है और ड्राइंग रूम टीवी व ओटीटी के कारण आबाद हो रहे हैं, लिहाजा मनोरंजन की दुनिया के कारोबारियों ने अपना मुंह टीवी और ओटीटी की ओर घुमा लिया है। इन दिनों ओटीटी पर या तो गोलियां पसंद की जा रही हैं या गालियां। अपराध और रोमांच में दर्शक डूब-उतर रहे हैं। ‘मिर्जापुर-2’ का खुमार अभी लोगों के सिर से उतरा नहीं है। गुड्डू पंडित के साथ कालीन और मुन्ना त्रिपाठी लोगों के सिर चढ़कर बोल रहे हैं। जैसी दर्शकों की मांग होगी, निर्माता वैसी ही पूर्ति करने के लिए तैयार होंगे। लिहाजा इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपराध और रोमांच से भरी वेब सीरीजों की बहार है। सिर्फ ‘मिर्जापुर’ के दो भाग ही क्यों मई में अमेजन पर दिखाई अनुष्का शर्मा की ‘पाताल लोक’ को भी दर्शकों ने खूब सराहा था। अब ओटीटी प्लेटफॉर्म ऐसी ही कुछ और वेब सीरीज दिखाने के लिए तैयार है।

मसलन अल्ट बालाजी और जी 5 छह नवंबर से रहस्य रोमांच से भरी वेब सीरीज ‘मुम भाई’ दिखाने के लिए तैयार हैं। अंगद बेदी, संदीप धर, सिकंदर खेर, प्रियांक शर्मा की प्रमुख भूमिकाओं वाली वेब सीरीज में 90 के दशक में मुंबई पुलिस और अंडरवर्ल्ड की कहानी होगी। हाल ही में इसका सवा तीन मिनट का ट्रेलर जारी किया गया है। आतंकवाद से निपटने के लिए 90 के दशक में मुंबई पुलिस ने आतंकवाद निरोधी दस्ता बनाया था, अंगद बेदी इसी दस्ते के एक जांबाज बने हैं।

ओटीटी पर दिखाई गई ‘मिर्जापुर’ और ‘मिर्जापुर 2’ के संवाद और किरदारों की खास तौर पर चर्चा होती रही है। ऐसी सीरीज में पार्श्व संगीत जहां जबरदस्त होता है, वहीं निर्देशन और सिनेमेटोग्राफी लाजवाब होती है। इनके लोकप्रिय होने का एक कारण यह भी है कि इनमें परिवेश और भाषा को यर्थाथवादी तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। समाज में व्याप्त मुद्दों से दर्शकों को रूबरू करवाया जाता है।

मगर अभद्र भाषा और हिंसा के कारण ऐसी फिल्में और वेब सीरीज आलोचना का पात्र भी बनती हैं। विवाद भी पैदा होते हैं। मसलन ‘मिर्जापुर’ देखने के बाद वहां की सांसद अनुप्रिया ने इस सीरीज पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई। सीरीज में मिर्जापुर को ऐसा शहर बताया गया, जहां अपराध फल फूल रहा है। सांसद ने इस पर कड़ा एतराज जताया।

रहस्य रोमांच से भरी ऐसी सीरीज और फिल्मों के प्रति सिर्फ दर्शकों का ही आकर्षण नहीं है, निर्माता निर्देशकों में ऐसे विषयों को लेकर चुंबकीय खिंचाव रहा है। खबर है कि फिल्मकार हंसल मेहता कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे एनकाउंटर पर वेब सीरीज बनाने जा रहे हैं। कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे का एनकाउंटर कुछ महीनों पहले चर्चा में था।

रहस्य, रोमांच, अपराध के दौर में एक वेब सीरीज ने अचानक सभी को चौंका दिया। यह वेब सीरीज थी प्रकाश झा की बॉबी देओल निर्देशित ‘आश्रम’। बॉबी ने फिल्मों में कभी इस तरह की भूमिका नहीं निभाई थी, सो दर्शक उन्हें इस रूप में देखकर चौंक गए। ‘आश्रम’ को लोकप्रियता मिली तो निर्माताओं ने इसके दूसरे सीजन की तैयारियां शुरू कर दीं। अगले महीने, 11 नवंबर से इसका दूसरा सीजन शुरू होने जा रहा है।

‘पाताल लोक’, ‘मिर्जापुर’, ‘आश्रम’, ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘जामताड़ा’ जैसी वेब सीरीज की लोकप्रियता बताती है कि दर्शकों में अपराध की अज्ञात दुनिया के प्रति अपार कौतुहल होता है जो आकर्षण की एक वजह बनता है।

अपराध, रोमांच निर्माताओं की पसंद
ओटीटी प्लेटफार्म पर अपराध, रोमांच से भरपूर वेब सीरीज नामीगिरामी निर्माताओं का ध्यान भी आकर्षित कर रही है। यही वजह है निर्माता शाहरुख खान अपने बैनर रेड चिली के तहत नेट फ्लिक्स के लिए ‘बेताल हॉरर’ बनाने जा रहे हैं। राम गोपाल वर्मा बलात्कार की एक घटना से प्रभावित होकर ‘दिशा एनकाउंटर’ बनाते हैं। अक्षय कुमार की ‘लक्ष्मी बम’ दिवाली पर रिलीज होने जा रही है जो हॉरर-सस्पेंस फिल्म है।

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