गुरुवार से संसद का विशेष सत्र शुरू हो रहा है। इसमें महिला आरक्षण विधेयक पेश किया जाएगा। साथ ही, जनगणना के बाद प्रस्तावित परिसीमन और लोकसभा सीटों के संभावित विस्तार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। इस बीच खबर है कि लोकसभा में मोदी सरकार एक “शेड्यूल” लेकर आ सकती है। शेड्यूल का मतलब होता है कि किसी अतिरिक्त प्रावधान के तहत विधेयक से जुड़ी विस्तृत जानकारी देना।

असल में, लोकसभा में केंद्र सरकार तीन बिल पेश करने जा रही है, जिनमें महिला आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर काफी कुछ बताया जाएगा। लेकिन लोकसभा सीटों में क्या बदलाव आ सकता है, इसे लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसी वजह से सरकार अलग से एक शेड्यूल लाकर हर तरह की शंकाओं को दूर करना चाहती है। नाम न बताने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक सूत्र ने कहा कि किसी के मन में कोई भ्रम नहीं रहने दिया जाएगा, सब कुछ कानून के तहत किया जाएगा। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में वर्तमान में लोकसभा की 39 सीटें हैं, यानी कुल सीटों में उसका हिस्सा करीब 7.2% है। सरकार का कहना है कि अगर परिसीमन होता है और लोकसभा सीटें बढ़ती भी हैं, तब भी यह हिस्सा लगभग 7.2% ही रहेगा। अनुमान है कि हर राज्य की सीटें करीब 50% तक बढ़ सकती हैं। ऐसे में तमिलनाडु के खाते में 57 से 58 सीटें आ सकती हैं।

दक्षिण के राज्यों को क्यों डर?

तमिलनाडु को लेकर ज्यादा चर्चा इसलिए है क्योंकि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन इस मुद्दे पर विरोध जता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया, तो उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की सीटों में बड़ा बदलाव हो सकता है।

सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को यह जानकारी भी दी है कि संघीय संतुलन बनाए रखने के लिए सीटें बढ़ाई जा रही हैं। साथ ही, कुल सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। यह भी कहा गया है कि परिसीमन की प्रक्रिया राज्यों के भीतर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव करेगी और यह 2011 की जनगणना के आधार पर ही होगा। अभी तक 2001 की जनगणना के आधार पर राज्यों के भीतर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्समायोजन किया जाता था।

जानकारी के लिए बता दें कि 1971 की जनगणना के बाद पहली बार परिसीमन हो रहा है। 1976 और 2001 में इसे 25-25 साल के लिए फ्रीज कर दिया गया था। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान न हो, क्योंकि वहां जनसंख्या उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही थी जितनी कुछ अन्य राज्यों में बढ़ रही थी।

संसद का नंबर गेम समझें

अगर सरकार इस संविधान संशोधन बिल को पास कराना चाहती है, तो उसे दोनों सदनों में जरूरी समर्थन जुटाना होगा। इसके लिए सभी दलों से बातचीत की जा रही है। नंबर गेम की बात करें तो संविधान संशोधन के लिए करीब 360 वोटों की जरूरत होगी। बीजेपी के पास वर्तमान में 240 सीटें हैं। अगर एनडीए के सहयोगियों को जोड़ दिया जाए, तो यह संख्या 293 तक पहुंचती है। वहीं, विपक्ष के पास कुल 241 सीटें हैं। ऐसे में सरकार को इस अहम बिल को पास कराने के लिए विपक्ष से भी समर्थन जुटाना पड़ सकता है।

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