क्या लोकसभा सीटों की संख्या होगी एक हजार? कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा पहले जनता की ली जाए राय

कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने मनीष तिवारी के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि सार्वजनिक बहस की जरूरत है। हमारे जैसे बड़े देश को अधिक प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों की आवश्यकता है। लेकिन अगर यह वृद्धि जनसंख्या के आधार पर होती है तो इससे दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व और कम हो जाएगा, जो स्वीकार्य नहीं होगा।

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कांग्रेस नेता मनीष तिवारी (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट कर कहा है कि मुझे संसदीय सहयोगियों की तरफ से विश्वसनीय सूचना मिली है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सीटों की संख्या को बढ़ाकर एक हजार करने की तैयारी है। 1000 सीटों वाले नए संसद कक्ष का निर्माण भी किया जा रहा है। ऐसा करने से पहले एक गंभीर सार्वजनिक परामर्श होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने मनीष तिवारी के ट्वीट के जवाब में लिखा कि सार्वजनिक बहस की जरूरत है। हमारे जैसे बड़े देश को अधिक प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित प्रतिनिधियों की आवश्यकता है। लेकिन अगर यह वृद्धि जनसंख्या के आधार पर होती है तो इससे दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व और कम हो जाएगा, जो स्वीकार्य नहीं होगा। कार्ति चिदंबरम के ट्वीट का जवाब देते हुए तिवारी ने कहा कि प्रस्ताव को लेकर अभी कुछ भी तय नहीं है। इसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तय है या नहीं? जिसके लिए हमारी अध्यक्षा सोनिया गांधी पिछले दो दशक से प्रयासरत हैं।

इधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने रविवार को कहा कि सरकार को या तो पेगासस जासूसी के आरोपों की संयुक्त संसदीय समिति के जरिए जांच करानी चाहिए या उच्चतम न्यायालय से मामले की जांच के लिए किसी मौजूदा न्यायाधीश को नियुक्त करने का अनुरोध करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले को संसद में स्पष्ट करना चाहिए कि लोगों की निगरानी हुई या नहीं।

पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि कोई इस हद तक कह सकता है कि 2019 के पूरे चुनावी जनादेश को ‘‘गैरकानूनी जासूसी’’ से प्रभावित किया गया। लेकिन, उन्होंने कहा कि इससे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जीत हासिल करने में ‘‘मदद’’ मिली हो सकती है जिसको लेकर आरोप लगे थे।

चिदंबरम ने पीटीआई-भाषा के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) द्वारा जांच सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति की जांच से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने कहा कि जेपीसी को संसद द्वारा अधिक अधिकार मिलता है।

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