हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पिछले 11 महीनों में चुनावी राज्य पंजाब में करीब 90 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। इसी दौरान उनकी सरकार ने दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा भी बढ़ाया है। योजना के तहत पात्रता के लिए परिवार की सालाना आय सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये कर दी गई है। हरियाणा बीजेपी के नेताओं का मानना है कि इस फैसले से पंजाब में पार्टी को चुनावी फायदा मिल सकता है।

मुख्यमंत्री सैनी के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे के मुताबिक, योजना का दायरा बढ़ने से हरियाणा की करीब 27 लाख और महिलाएं इसके दायरे में आ जाएंगी। इससे पहले करीब 10 लाख महिलाएं इस योजना का लाभ ले रही थीं।

अत्रे ने दावा किया, ”इससे पंजाब के मतदाता भी प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद होगी कि बीजेपी को मौका देने पर पंजाब में भी हरियाणा जैसी योजनाएं लागू की जा सकती हैं।”

बीजेपी पंजाब में इस योजना के विस्तार को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है। पार्टी, हरियाणा में पात्र महिलाओं को दी जा रही 2100 रुपये की मासिक सहायता की तुलना पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना के तहत दी जा रही 1000 रुपये की मासिक सहायता से करेगी।

बीजेपी नेताओं का मानना है कि यह तुलना पंजाब में राजनीतिक बहस को तेज कर सकती है खासकर इसलिए क्योंकि राज्य में महिला मतदाता एक महत्वपूर्ण चुनावी वर्ग हैं।

दोनों योजनाओं में बड़ा अंतर

दोनों योजनाओं के दायरे और नियमों में काफी अंतर है। पंजाब की योजना 18 साल या उससे अधिक उम्र की लगभग सभी महिलाओं के लिए है। इसमें सिर्फ आयकर देने वाली महिलाएं, सरकारी कर्मचारी और मौजूदा या पूर्व सांसद-विधायक शामिल नहीं हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाली महिलाओं को भी इस योजना का लाभ मिल सकता है।

15 अगस्त तक पंजाब में अनुमानित 98 लाख लाभार्थियों में से करीब 67 फीसदी महिलाओं को आर्थिक सहायता मिल चुकी थी। आम आदमी पार्टी सरकार को उम्मीद है कि आगे चलकर राज्य की करीब 97 फीसदी वयस्क महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कुल 2.15 करोड़ मतदाताओं में 1.02 करोड़ यानी 47.45 फीसदी महिलाएं थीं।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 15 अगस्त को बताया था कि 74.59 लाख महिलाओं ने अब तक योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। वहीं जुलाई-सितंबर तिमाही की सहायता 65.62 लाख महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है।

पंजाब में सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह जबकि अनुसूचित जाति (SC) की महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। वहीं इसके मुकाबले हरियाणा की योजना में सभी पात्र महिलाओं को 2100 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। लेकिन पात्रता की शर्तें ज्यादा सख्त हैं। महिला की उम्र कम से कम 23 साल होनी चाहिए और परिवार की वेरिफाइड सालाना आय 1.80 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यह आय परिवार सूचना डेटाबेस में दर्ज रिकॉर्ड के आधार पर तय की जाती है।

अगर किसी महिला की शादी दूसरे राज्य से होकर हरियाणा में हुई है तो उसे या उसके पति को कम से कम 15 साल तक हरियाणा में रहने की शर्त पूरी करनी होगी। हालांकि एक ही परिवार से लाभ लेने वाली पात्र महिलाओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं है।

बजट की बात करें तो पंजाब ने 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 9300 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। वहीं हरियाणा ने अपनी योजना के लिए 6500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

AAP ने किया विरोध

हरियाणा AAP अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने कहा कि लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ सीमित है क्योंकि इसमें कई पात्रता शर्तें रखी गई हैं। उन्होंने कहा कि 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी नेताओं ने सभी महिलाओं के इस योजना का लाभ देने का वादा किया था। गुप्ता के मुताबिक, पंजाब की योजना के दायरे में राज्य की 95 फीसदी से ज्यादा महिलाएं आ जाएंगी।

वहीं हरियाणा के मुख्यमत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष पर योजना को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने उन दावों को खारिज किया कि लाडो लक्ष्मी योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पर महिलाओं की पेंशन समेत दूसरी सरकारी योजनाओं का फायदा मिलना बंद हो जाएगा।

सैनी ने कहा, ”इस तरह के दावों में कोई सच्चाई नहीं है। लाडो लक्ष्मी योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराने या इसका लाभ लेने वाली सभी महिलाओं को पहले की तरह दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहेगा।”

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