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समझौते से पहले ECB आरक्षण का अध्ययन करूंगा: हार्दिक

गुजरात सरकार की ओर से सवर्णों में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ईबीसी) को 10 फीसद आरक्षण घोषित होने के बाद पटेल नेता हार्दिक पटेल ने कहा है कि वह आरक्षण को लेकर जारी गतिरोध खत्म करने के लिए किसी समझौते पर पहुंचने से पहले इस निर्णय का अध्ययन करेंगे।

Author अहमदाबाद | May 1, 2016 4:15 AM
पटेल नेता हार्दिक पटेल

गुजरात सरकार की ओर से सवर्णों में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ईबीसी) को 10 फीसद आरक्षण घोषित होने के बाद पटेल नेता हार्दिक पटेल ने कहा है कि वह आरक्षण को लेकर जारी गतिरोध खत्म करने के लिए किसी समझौते पर पहुंचने से पहले इस निर्णय का अध्ययन करेंगे। वहीं सरकार से बातचीत करने वाले समुदाय के नेताओं का कहना है कि समुदाय की दो प्रमुख मांगें पूरी हो गई हैं।
हार्दिक पटेल ने यहां से करीब 90 किलोमीटर दूर मेहसाणा जिले के विसनगर में एक अदालत के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘मैं पहले सरकार की ओर से किए गए निर्णय का अध्ययन करुंगा। यदि वह समुदाय के पक्ष में है तो मैं निश्चित तौर पर (आरक्षण गतिरोध को लेकर सरकार के साथ) समझौता करुंगा।’

हार्दिक की ‘पाटीदार अनामत आंदोलन समिति’ (पीएएएस) ने शुक्रवार को इस कदम को खारिज करते हुए इसे भाजपा और राज्य सरकार की ओर से उनके समुदाय को भ्रमित करने के लिए एक और लॉलीपॉप बताया था। कृषि प्रधान समुदाय पाटीदारों को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करने के लिए आंदोलन का पीएएएस नेतृत्व कर रहा था। 22 साल के हार्दिक को पड़ोसी जिले में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले के सिलसिले में अदालत लाया गया था। कई आरोपों का सामना कर रहे हार्दिक न्यायिक हिरासत में है। उनपर एक आरोप राजद्रोह का भी है। उन्होंने कहा, ‘मैं समुदाय को 10 फीसद आरक्षण के मामले को उस पर अच्छी तरह से अध्ययन करने के बाद उठाऊंगा। शांति के लिए मुद्दे का हल जरूरी है। यह दोनों ही पक्षों के लिए जरूरी है कि वे मुद्दे पर एक समझौता करें।’

भाजपा सरकार की ओर से सवर्ण जतियों में से गरीबों (जिनके परिवार की वार्षिक आय छह लाख रुपए से कम है) के लिए नौकरी और शिक्षा में ईबीसी (आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग) आरक्षण घोषित होने के बाद यह हार्दिक की पहली प्रतिक्रिया है। इस आरक्षण के दायरे में पाटीदार भी आएंगे। इस बीच आंदोलनरत पटेलों और सरकार के बीच मध्यस्थता कर रहे नेताओं ने शनिवार को मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की। उन्होंने बाद में कहा कि आंदोलन अब समाप्त होना चाहिए क्योंकि समुदाय की दो प्रमुख मांगे पूरी हो गई हैं, इसमें आरक्षण और राजद्रोह के आरोप में जेलों में बंद युवाओं को रिहा करना शामिल था। दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रही समिति के सदस्य महेश सवानी ने कहा कि सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है। छह पाटीदार युवकों में से पांच (जो जेल में बंद थे और उन्हें अदालतों से जमानत मिल गई) को रिहा करने के बाद उसने 10 प्रतिशत ईबीसी आरक्षण घोषित कर दिया है।सवानी ने मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के बाद कहा, ‘मेरा मानना है कि 10 फीसद आरक्षण एक बड़ा कदम है। अब हम ईबीसी आरक्षण पर विस्तृत जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

एक बार वह हमें मिल जाएगा हम समुदाय के सदस्यों से मिलेंगे और उन्हें इसके बारे में समझाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हमारी दो मांगें कि राजद्रोह के आरोप में जेल में बंद नेताओं को रिहा किया जाए और सरकार पटेल युवकों को आरक्षण मुहैया कराये…हमें सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।’ उन्होंने कहा, ‘हार्दिक की रिहायी के बारे में मुख्यमंत्री ने हमसे कहा कि कानूनी प्रणाली में विश्वास रखें। इसलिए हम महसूस करते हैं कि हार्दिक की रिहायी के प्रति सरकार का सकारात्मक रुख और 10 फीसद आरक्षण यह दिखाता है कि आंदोलन अब खत्म होने को है।’ हार्दिक राजद्रोह के दो मामलों में जेल में बंद हैं। यह निर्णय शुक्रवार को गुजरात भाजपा के कोर समूह की बैठक में किया गया। इसमे जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद थे।

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