शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में कई हस्तियां जंतर मंतर पहुंच चुकी हैं। शुक्रवार को एनसीपी शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले सोनम वांगचुक से मिलने के लिए जंतर मंंतर पहुंचीं।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वो सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने का निवेदन करने के लिए आई हैं। सुप्रिया सुले ने आगे कहा कि सोनम वांंगचुक जो लड़ाई लड़ रहे हैं, वो संसद में भी लगी जाएगी। सोमवार से शुरू हो रहे संसद सत्र में NEET छात्रों की चिंताओं सहित इन सभी मुद्दों को उठाया जाएगा।
पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार भी जंतर मंतर पहुंचे
शुक्रवार को पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार भी जंतर मंतर पहुंचे। उन्होंने एक बयान के जरिए कहा कि जमीर की आवाज पर असहमति जताने वालों की जिंदगी की अहमियत समझी जानी चाहिए और उससे कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
सोनम वांगचुक की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वे उन जन-मुद्दों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं जो उनके दिल के करीब हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारी परंपरा रही है और कई ऐसे मौके आए हैं जब राजनीतिक नेतृत्व ने आगे बढ़कर यह सुनिश्चित किया है कि भारतीयों की कीमती जानें न जाएं।
19 दिन का अनशन युवाओं की चिताओं का प्रतीक है: कुमारी सैलजा
कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में कहा कि सोनम वांगचुक का 19 दिन का अनशन परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा व्यवस्था की कमियों और जिम्मेदारी तय न होने को लेकर लाखों छात्रों व युवाओं की चिंताओं का प्रतीक है। कुमारी सैलजा ने वांगचुक से अपील की कि वह अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त कर दें। साथ ही उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस छात्रों के हितों की रक्षा और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है।
सिरसा से कांग्रेस सांसद सैलजा ने एक बयान में कहा कि बार-बार पेपर लीक होने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे, क्योंकि युवाओं का विश्वास किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ है।
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सोनम के पिता सोनम वांग्याल पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़े रहे और बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। वर्ष 1975 से उन्होंने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
