चौड़ी होती खाई

समाजवादी आंदोलन के दिनों में इस तरह की बातें खूब होती थीं कि आजादी के बाद देश में विकास और समृद्धि के एकतरफा बहाव ने एक ही देश में दो देश बना दिया है।

कोविड फैलने से परेशानी।

समाजवादी आंदोलन के दिनों में इस तरह की बातें खूब होती थीं कि आजादी के बाद देश में विकास और समृद्धि के एकतरफा बहाव ने एक ही देश में दो देश बना दिया है। एक तरफ ‘भारत’ है जहां लोग गरीबी की चक्की में लगातार पिस रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ ‘इंडिया’ है जहां कुछ उद्योगपतियों या औद्योगिक घरानों की कमाई तेजी से बढ़ रही है।

हाल में आॅक्सफैम की रिपोर्ट ने इस सच को एक बार फिर से जाहिर किया है। ‘इनइक्वालटी वायरस’ शीर्षक से आई यह रिपोर्ट बताती है कि पूर्णबंदी के दौरान करोड़ों लोगों के सामने भारत में रोजगार का संकट पैदा हो गया लेकिन इस दौरान देश के अरबपतियों ने जमकर चांदी काटी। सौ अरबपतियों ने पिछले साल मार्च से अक्टूबर तक 12 लाख 97 हजार 822 करोड़ रुपए कमाए। यह इतना पैसा है कि 13.8 करोड़ गरीब हिंदुस्तानियों को 94,045 रुपए दिए जा सकते हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना महामारी के दौरान भारत में आर्थिक, शैक्षिक और लैंगिक असमानता और बढ़ गई है। भारतीय अरबपतियों की संपत्ति पूर्णबंदी के दौरान 35 फीसद और 2009 से 90 फीसद बढ़कर 422.9 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई है। 2020 में महामारी के कारण 12.2 करोड़ कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इनमें 75 फीसद यानी करीब 9.2 करोड़ लोग असंगठित क्षेत्र के हैं।

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