दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में बुरी तरह हारने और एक दशक से ज्यादा समय में पहली बार सेंट्रल पैनल में कोई सीट न जीत पाने के कुछ हफ्ते बाद सोमवार को राहुल गांधी ने कांग्रेस की एनएसयूआई प्रभारी कन्हैया कुमार और अध्यक्ष विनोद जाखड़ को तलब किया। पता चला है कि विपक्ष के नेता ने दोनों नेताओं से हार का कारण पूछा।

एनएसयूआई यानी नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया कांग्रेस की स्टूडेंट विंग है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राहुल गांधी का छात्र संपर्क अभियान छात्रों की गूंज अलग-अलग शहरों में काफी भीड़ जुटी है और विपक्ष व कॉकरोच जनता पार्टी एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेदो को लेकर उसे घेरने की तैयारी कर रहे हैं।

सीजेपी ने नीट पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन किया

कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट पेपर लीक के विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था। इसकी वजह से धर्मेंद्र प्रधान को जुलाई में केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और विभिन्न मुद्दों पर युवाओं की असंतोष की भावना सामने आई थी।

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी, कन्हैया कुमार और जाखड़ से एनएसयूआई की हार को लेकर नाराज थे, जबकि कांग्रेस युवाओं और जेन-जी मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नेताओं ने विपक्ष के नेता को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिन्होंने उनसे डीएसयू चुनावों में हार के कारणों के बारे में सवाल पूछे हैं।

दीपांशु शौकीन को टिकट क्यों नहीं दिया गया

यह भी पता चला है कि गांधी ने जाखड़ और कन्हैयार कुमार से यह भी पूछा कि निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले दीपांशु शौकीन को टिकट क्यों नहीं दिया गया। दोनों नेताओं ने राहुल गांधी को बताया कि शौकीन की ओर से रखी गई शर्त अनुचित थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, गांधी इस मामले को जिस तरह से संभाला गया उससे संतुष्ट नहीं थे।

एनएसयूआई चार सदस्यीय डीयूएसयू केंद्रीय पैनल में एक भी पद जीतने में असफल रही। आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद जीते, जबकि शौकीन उपाध्यक्ष चुने गए।

शौकीन 2023 से छात्र राजनीति में सक्रिय हैं और अपने कॉलेज में छात्र प्रतिनिधि के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने 2023 और 2024 के चुनावों में एनएसयूआई के लिए प्रचार किया और 2025 में पार्टी का टिकट पाने की कोशिश की, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ। इस साल, कथित तौर पर फिर से टिकट न मिलने के बाद, उन्होंने निर्दलीय तौर से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमिताभ दुबे ने एनएसयूआई की ओर से शौकीन को टिकट न दिए जाने की खबरों को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया। दुबे ने एक्स पर लिखा, “उन्हें अध्यक्ष पद का टिकट दिया गया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने का फैसला किया। वे अध्यक्ष क्यों नहीं बनना चाहते थे?”

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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव यानी ‘डूसू’ हम जीते। ‘जेन-जी’ हमारे साथ..! ‘डूसू’ हम हारे, लेकिन जरा से अंतर से हारे। इस तरह ‘जेन-जी’ हमारे भी साथ..! हर बंदा ‘जेन-जी’ का भजन करने में लगा है, जैसे ‘जेन-जी’ ही उसका उद्धार करेगी। सर जी! ‘जेन-जी’ को इतना सिर न चढ़ाओ कि कल को उतार भी न सको। एक बार फिर पूर्व उपराष्ट्रपति ने एक विवाद खड़ा किया। उन्होंने नेहरू का हवाला देते हुए कहा कि दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता ज्यादा खतरनाक है..! प्रतिक्रिया में सत्ता प्रवक्ता पूर्व उपराष्ट्रपति के ऐसे ही कुछ बयानों की लाइन लगाकर उनको ‘हिंदू विरोधी’ सिद्ध करने लग जाते हैं और ‘ध्रुवीकरण’ होने लगता है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…