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सलमान तो बरी हो गए पर अब्दुल्ला को कौन देगा इंसाफ

मुंबई के बहुचर्चित ‘हिट एंड रन’ मामले में हाई कोर्ट की ओर से फिल्म अभिनेता सलमान खान को सभी आरोपों से बरी किए जाने के बाद उस घटना में बुरी तरह जख्मी हुआ अब्दुल्ला शेख सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने नहीं जा रहा है। उसका कहना है कि पहली बात तो यह कि उसके पास […]

गोण्डा/ लखनऊ | December 12, 2015 12:16 AM

मुंबई के बहुचर्चित ‘हिट एंड रन’ मामले में हाई कोर्ट की ओर से फिल्म अभिनेता सलमान खान को सभी आरोपों से बरी किए जाने के बाद उस घटना में बुरी तरह जख्मी हुआ अब्दुल्ला शेख सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने नहीं जा रहा है। उसका कहना है कि पहली बात तो यह कि उसके पास इतना पैसा नहीं है कि वह सर्वोच्च न्यायालय में अपील करके मुकदमे की पैरवी कर सके। दूसरे, अगर महाराष्ट्र सरकार भी अपील करे तो इससे उसके परिवार का कोई फायदा होने वाला नहीं।

जिले के कोतवाली देहात थाना क्षेत्र स्थित अशरफखेड़ा गांव में अपने आवास पर जनसत्ता से बातचीत करते हुए शेख ने कहा कि अदालत को हमारे भरण-पोषण के बारे में सोचना चाहिए। जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी दूर उसके गांव में जब यह प्रतिनिधि पहुंचा तो अब्दुल्ला अपने घर के पास ही मिला। उसके बच्चे पास ही में खेल रहे थे। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले अब्दुल रऊफ शेख के तीन बेटों में सबसे छोटा अब्दुल्ला शेख पारिवारिक भरण-पोषण के लिए 20 वर्ष की अवस्था में मुंबई चला गया था। वह बांद्रा इलाके में स्थित अमेरिकन एक्सप्रेस बेकरी में नौकरी कर रहा था। 28 सितंबर 2002 की रात खाना खाकर वह मन्नू, मुस्लिम, कलीम, नूरुल्लाह वगैरह करीब डेढ़ दर्जन साथियों के साथ सड़क के फुटपाथ पर सो गया था। सोने के लिए कोई ठिकाना न होने के कारण ये लोग फुटपाथ पर ही सोते थे। रात में ढाई से तीन बजे के बीच अचानक तेजी से चिल्लाने की आवाजें सुनाई देने लगीं। शेख बताता है: अचानक तेज दर्द और चीख-पुकार से आंख खुली तो मैं एक कार के नीचे था। कार बेकरी में घुस गई थी और लोग शोरगुल कर रहे थे कि सलमान खान ने कार चढ़ा दी है।

मेरा दायां पैर कार के पहिए के नीचे था। कार से कुचले गए सभी लोग दर्द से तड़प रहे थे। बेकरी वाले भी वहां पर थे। वे मुझे बचाने के बजाय सलमान खान को कार से निकाल रहे थे। जब सलमान को कार से बाहर निकाल लिया गया, तब मुझे कार के नीचे से घसीटा गया। तब तक मेरा दायां पैर टूट चुका था। तभी सलमान के लिए एक रिक्शा बुुलवाया गया और उन्हें भेज दिया गया। उनके साथ दो लोग और थे, किंतु कार कौन चला रहा था, यह नहीं पता क्योंकि हादसे के वक्त सभी लोग गहरी निद्रा में थे। करीब डेढ़ महीने तक वहां के बाबा अस्पताल में मेरा इलाज चलता रहा। दाएं पैर में राड डाली गई। कुछ वक्त बीता था कि राड में पड़ा एक स्क्रू खाल से बाहर निकल आया। मुझे दुबारा आपरेशन कराना पड़ा। शरीर में तकलीफ बनी रहने के कारण काम न कर सका और घर लौट आया। करीब तीन वर्ष बाद मेरी शादी हो गई। आज मैं सहबान, शहबाज, फरजाना, अरबाज और अफजल नामक पांच बच्चों का बाप हूं। जमीन के नाम पर एक बिस्वा भी नहीं है। उसने बताया कि वह और उसकी पत्नी रेशमा मेहनत मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। पैर पूरी तरह ठीक न होने के बावजूद आजीविका के लिए उसे बार-बार मुंबई जाना होता है, किंतु उस जगह पर जाते समय अब डर लगता है।

मुंबई हाई कोर्ट द्वारा सलमान खान को बरी किए जाने के सवाल पर 36 वर्षीय अब्दुल्ला कहता है कि अदालत ने सलमान को तो बरी कर दिया मगर मुझे न्याय नहीं मिला। अदालत से हमें काफी उम्मीद थी कि कुछ न कुछ मुआवजा जरूर दिलवाया जाएगा, किंतु ऐसा नहीं हुआ। मुआवजे से मेरे बच्चों और बीवी की जिंदगी में थोड़ा सुधार हो जाता। सबसे बड़ा बेटा अभी 12 साल का है। वह इस लायक नहीं कि मेरा किसी प्रकार का सहयोग कर सके। अदालत के फैसले के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील किए जाने के सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा कि हम जमीन पर सोने वाले लोग हैं। सुप्रीम कोर्ट जाने की हमारी औकात नहीं। फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की ओर से अपील किए जाने के बारे में पूछे सवाल पर उसने कहा कि इससे क्या होगा? आरोप साबित होने पर सलमान को तो सजा हो सकती है, किंतु मेरा तो कुछ भला होने वाला नहीं है। मैं चाहता हूं कि मुझे कुछ मुआवजा मिले, जिससे परिवार का भरण-पोषण हो सके। उसने बताया कि अदालत के फैसले के बाद भी क्षेत्र का कोई नेता या जनप्रतिनिधि उसके परिवार का हाल पूछने नहीं आया है।

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