टीएमसी में पिछले एक महीने में बड़े पैमाने पर बगावत हुई है। पहले 80 में से लगभग 60 विधायकों ने और फिर 20 सांसदों ने भी बगावती रुख अपना लिया। विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता चुना तो बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय करने का ऐलान किया।

बगावत करने वाले अधिकतर विधायकों और सांसदों की नाराजगी टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर है। इस बगावत ने टीएमसी के लिए वजूद का संकट पैदा कर दिया है और इससे अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक चुनौतियां भी बढ़ गई हैं।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले अभिषेक बनर्जी को ही ममता का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था और वह निर्विवाद रूप से पार्टी में नंबर दो की पोजिशन पर थे लेकिन चुनाव में हार के बाद से वह बागियों के निशाने पर आ गए हैं।

हार के लिए अभिषेक को ठहराया जिम्मेदार

19 मई को जब ममता बनर्जी के आवास पर समीक्षा बैठक बुलाई गई थी तो इसमें कई विधायकों ने पार्टी को मिली हार के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया। जब टीएमसी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुना तो पार्टी के दो विधायकों- ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने इस मामले में विधानसभा के स्पीकर से शिकायत की और कहा कि पार्टी की ओर से दिए गए प्रस्ताव में उनके नकली दस्तखत किए गए थे। इसके बाद टीएमसी के विधायकों में बड़े पैमाने पर फूट पड़ गई। इस मामले में सीआईडी ने भी अभिषेक बनर्जी से पूछताछ की।

विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि टीएमसी की दुर्दशा के लिए अभिषेक बनर्जी जिम्मेदार हैं। बनर्जी के साथ ही कई और बागी विधायकों ने भी कहा कि वे ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं लेकिन अभिषेक बनर्जी को स्वीकार नहीं करेंगे।

ममता बनर्जी के वफादार और सांसद कल्याण बनर्जी को जाली दस्तखत के मामले में हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई में हटा दिया गया तो वह नाराज हो गए। कल्याण बनर्जी ने कहा था, “ममता बनर्जी को यह तय करना होगा कि वह अभिषेक के साथ रहेंगी या हमारे साथ।” हालांकि बाद में अभिषेक और कल्याण बनर्जी ने मतभेदों को सुलझा लिया।

यह अवसरवादी रवैया- शोभनदेब चट्टोपाध्याय

सांसदों और विधायकों की बगावत को लेकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि कई बार वह भी कुछ मुद्दों पर सहमत नहीं होते लेकिन हम अनुशासनहीनता किए बिना उन्हें पार्टी के भीतर ही उठाते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद जब पार्टी मुश्किल में हो तो उस पर इस तरह हमले करना ठीक नहीं है और यह अवसरवादी रवैया है।

चुनाव नतीजों के तुरंत बाद कोलकाता नगर निगम ने अभिषेक बनर्जी, उनके माता-पिता को उनकी कंपनी ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ से जुड़े कुल 17 परिसरों में अनाधिकृत निर्माण के मामले में नोटिस जारी कर दिया। पुलिस ने चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक के कथित भड़काऊ बयानों को लेकर एफआईआर दर्ज की और सीआईडी इनकी जांच कर रही है।

सीबीआई और ईडी मवेशी और कोयले की तस्करी के मामलों की भी जांच कर रही है और इसमें अभिषेक बनर्जी का नाम भी शामिल है। इन मामलों में अभिषेक बनर्जी से पहले भी कई बार पूछताछ हो चुकी है।

ममता बनर्जी के करीबी एक नेता के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी के सामने काफी चुनौतियां हैं और टीएमसी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। उनके मुताबिक, एक तरफ सांसद और विधायकों की बगावत से पार्टी टूट रही है तो दूसरी तरफ राज्य और केंद्रीय एजेंसियां अभिषेक बनर्जी को एक के बाद एक मामलों में समन भेज रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि अभिषेक को अभी भी ममता बनर्जी का समर्थन हासिल है।

टीएमसी में बगावत के बीच हालात यहां तक पहुंच गए कि पार्टी के कांग्रेस में विलय की चर्चा भी सामने आने लगी हालांकि पार्टी ने इसे खारिज कर दिया था।

शुभेंदु अधिकारी ने छोड़ दी थी पार्टी

अभिषेक बनर्जी 2014, 2019 और 2024 में डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से चुनाव जीत चुके हैं। एक वक्त में ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे शुभेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय बीजेपी में चले गए थे क्योंकि उन्होंने पार्टी के मामलों में अभिषेक बनर्जी के बढ़ते दखल के सामने झुकने से इनकार कर दिया था।

I-PAC को लेकर पार्टी में नाराजगी

2019 के लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी को पश्चिम बंगाल में 18 सीटें मिलीं तो रणनीति के तहत अभिषेक बनर्जी को टीएमसी में बड़ी जिम्मेदारी दी गई। अभिषेक ने चुनावी तैयारियों के प्रबंधन के लिए पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC की सेवाएं ली। इससे टीएमसी को 2021 के विधानसभा चुनाव में काफी फायदा भी हुआ लेकिन टीएमसी की I-PAC पर बढ़ती निर्भरता की वजह से अभिषेक बनर्जी का पार्टी के पुराने नेताओं के साथ टकराव होने लगा। पुराने नेताओं में से कई ने महसूस किया कि उन्हें हाशिये पर धकेल दिया गया है।

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कोलकाता एयर पोर्ट के बाहर शुक्रवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई जब तृणमूल और भाजपा के समर्थक भिड़ गए। जिससे यात्रियों में दहशत फैल गई और एयरपोर्ट के बाहर में यातायात जाम हो गया। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।