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घायल स्थानीय बीजेपी नेता तेवतिया को देखने के लिए क्यों लगी मंत्रियों और अफसरों की कतार?

बृजपाल तेवतिया भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं।

भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया पर एके 47 समेत अन्य हथियारों से हमला 17 साल पुरानी रंजिश के कारण किया गया था। (Express Photo by Gajendra Yadav)

गुरुवार (11 अगस्त) की शाम उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले में बीजेपी नेता बृजपाल तेवतिया के काफिले पर अज्ञात बंदूकधारियों ने हमला कर दिया। हमले में तेवतिया समेत कुल छह लोग घायल हो गए। फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती तेवतिया की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है। राष्ट्रीय राजनीति में लगभग अनजान तेवतिया को जब अस्पताल में भर्ती कराया गया तो कुछ ही देर के अंदर दो केंद्रीय मंत्री उन्हें देखने पहुंच गए। पहले भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह और उनके बाद संस्कृति मंत्री महेश शर्मा सबसे पहले अस्पताल पहुंचने वालों में थे। इन दोनों के बाद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह और यूपी बीजेपी के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य भी उन्हें देखने गए। केंद्रीय मंत्रियों के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। गाजियाबाद के स्थानीय नेता तेवतिया कभी विधायक या सांसद नहीं रहे हैं फिर भी उनको देखने के लिए वीआईपी नेताओं और अफसरों की क़तार क्यों लग गई?

54 वर्षीय तेवतिया पश्चिमी यूपी के कद्दावर किसान जाट नेता माने जाते हैं। उन्हें राजनाथ सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। बीजेपी के सूत्रों के अनुसार जब राजनाथ साल 2000 में यूपी के सीएम बने थे तो तेवतिया उनके करीब आए। जब राजनाथ 2009 में गाजियाबाद से लोक सभा चुनाव लड़े तो तेवतिया ने उनके लिए जमकर प्रचार किया। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता कहते हैं, “गाजियाबाद में कोई भी तेवतिया के समर्थन के बिना चुनाव नहीं लड़ सकता। इसलिए नोयडा और गाजियाबाद के सभी नेता (महेश शर्मा और वीके सिंह) उनसे मिलने आए।” सूत्रों के अनुसार राजनाथ सिंह के दोनों बेटे भी तेवतिया को देखने अस्पताल गए थे।

तेवतिया के एक करीबी मित्र बताते हैं, “चुनाव के पहले और बाद भी तेवतिया परिवार को स्थानीय लोग काफी पसंद करते हैं, इसलिए जो भी नेता गाजियाबाद से चुनाव लड़ने आते हैं वो भी उन्हें काफी मानते हैं। डॉक्टर महेश शर्मा उन्हें लंबे समय से जानते हैं। दोनों एक ही इलाके से आते हैं और दोनों ही काफी वक्त से राजनीति में सक्रिय हैं।” तेवतिया परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार तेवतिया 2017 के विधान सभा चुनाव की तैयारी शुरू कर चुके थे। वो अपना ज्यादातर समय मुरादनगर में दे रहे थे। बीजेपी की गाजियाबाद इकाई के पूर्व अध्यक्ष अशोक मोगा कहते हैं कि तेवतिया विधान सभा चुनावों के मद्देनजर लोगों से मिलने के लिए हर रोज मुरादनगर में कम से कम 20 जगहों का दौरा कर रहे थे।

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तेवतिया अभी विधान सभा चुनाव नहीं जीत सके हैं लेकिन मुरादनगर में उन्हें “विधायक जी” कहा जाता है। कवि नगर स्थित उनके बंगले पर रोज सैकड़ों लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। बीजेपी की जिला इकाई के एक नेता कहते हैं, “राजनाथ सिंह से अपनी करीबी के चलते वो लोगों की वाजिब समस्याएं हल भी करवा देते हैं। वो स्थानीय लोगों को राजनाथ सिंह से मिलवाने दिल्ली भी ले जाते हैं। स्थानीय सांसद वीके सिंह और मेयर अंशु वर्मा भी तेवतिया की
स्थानीय लोगों की समस्याएं निपटाने में मदद करते हैं।” हमले से कुछ देर पहले ही तेवतिया गाज़ियाबाद कलेक्टरेट पर बुलंदशहर गैंगरेप के मसले पर आयोजित धरने से वापस लौटे थे।

तेवतिया ने अपना राजनीतिक करियर 1995 में नगरपालिका पार्षद चुनाव जीतकर किया था। साल 2000 में भी वो दोबारा पार्षद बने। तेवतिया के एक करीबी सूत्र के अनुसार विधायक बनने की लालसा के चलते 2007 में वो बीजेपी छोड़कर राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) में चल गए थे। किसान नेता होने के नाते वो आरएलडी प्रमुख चौधरी अजित सिंह के भी करीबी हो गए थे। इसके बावजूद 2009 में उन्होंने राजनाथ के लिए प्रचार किया था। उन्होंने बीजेपी में वापसी करते हुए साल 2012 में बीजेपी के टिकट पर मुरादनगर विधान सभा चुनाव लड़ा। इस बार 52 हजार से अधिक वोट पाने के बावजूद वो हार गए। हालांकि इस विधान सभा में बीजेपी को मिला ये अब तक का सबसे अधिक वोट रहा। सूत्रों के अनुसार तेवतिया के पास गाजियाबाद में खेती का काफी जमीन है। वो रियल एस्टेट का कारोबार चलाते हैं। तेवतिया पहले गाजियाबाद के मेहरौली गांव में रहते थे। बाद में वो कवि नगर में रहने लगे।

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