आखिरकार एस. सिद्धारमैया ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी सिद्धारमैया के समर्थक थे। सिद्धारमैया ने कहा था कि अगर राहुल गांधी उनसे पद छोड़ने को कहेंगे तो वे ऐसा करेंगे और आखिरकार उन्होंने अपना पद छोड़ दिया।
डीके शिवकुमार को कांग्रेस के बड़े संकटमोचक के रूप में जाना जाता है। सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी कि सिद्धारमैया को अपना पद छोड़ना पड़ा?
दक्षिण में कर्नाटक ही ऐसा राज्य है जहां पर बीजेपी सरकार बना चुकी है और यहां उसका असर है। कांग्रेस के लिए यह जरूरी है कि 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सत्ता को फिर से बरकरार रखा जाए।
2023 के विधानसभा चुनाव में जब कांग्रेस को जीत मिली थी तब शिवकुमार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे और अभी भी वह इस पद पर हैं। उस वक्त कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार में से किसी एक नेता का चुनाव करना था। राहुल गांधी सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनना चाहते थे जबकि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी डीके शिव कुमार के पक्ष में थे।
सिद्धारमैया को मिली थी सीएम की कुर्सी
कांग्रेस ने एक रास्ता निकाला और सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन तब यह साफ नहीं था कि मुख्यमंत्री पद पर रोटेशनल फॉर्मूला लागू होगा। शिवकुमार ने तब भी मुख्यमंत्री पद हासिल करने के लिए जोर लगाया था जबकि सिद्धारमैया के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने कहा था कि अगर रोटेशनल फॉर्मूला लागू होगा तो शिवकुमार उनकी कैबिनेट में नहीं होंगे हालांकि बाद में दोनों ही नेता न चाहते हुए भी कांग्रेस नेतृत्व की बात मानने को तैयार हो गए।
पिछले साल नवंबर में जब सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हुए तो शिवकुमार ने कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। बिहार के खराब चुनाव नतीजों के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई और यह मामला इस साल हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव होने तक टाल दिया गया। इसी बीच सिद्धारमैया ने कर्नाटक में मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लंबे वक्त तक काम करने का रिकॉर्ड भी बनाया।
कांग्रेस को इस बारे में फैसला करना था और अगले विधानसभा चुनाव के लिए भी तैयारी करनी थी। कांग्रेस के सामने कुछ सवाल थे जैसे- क्या पार्टी 80 साल के नेता के नेतृत्व में चुनाव लड़ सकती है जबकि सिद्धारमैया ऐलान कर चुके थे कि वह दोबारा चुनाव नहीं लड़ना चाहते।
कई राज्यों में नेताओं के बीच घमासान
कांग्रेस इससे पहले छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टीएस सिंह देव और राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच इस तरह के हालात देख चुकी थी। पंजाब में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के चार-पांच महीने पहले ही कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना दिया था। यह फैसला पार्टी को भारी पड़ा था और चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई थी और कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा था।
अहिंदा का समर्थन सिद्धारमैया के साथ
सिद्धारमैया कर्नाटक में पिछड़े वर्ग के सबसे बड़े नेता हैं और अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ों और दलित समुदाय के सामाजिक गठबंधन) का उन्हें समर्थन हासिल है। दूसरी ओर, प्रियंका गांधी और कांग्रेस का एक वर्ग कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन चाहता था उनका कहना था कि शिवकुमार ने पार्टी के लिए काफी काम किया है और उन्हें इसका इनाम मिलना चाहिए। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व चाहता था कि सत्ता का ट्रांसफर बेहतर ढंग से हो।
सिद्धारमैया को राज्यसभा की सीट और राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका देने की पेशकश की गई। उनसे यह भी वादा किया गया कि उन्हें भविष्य में राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया से कहा कि उनके करीबियों और उनके बेटे का भी ध्यान रखा जाएगा।
सिद्धारमैया पद छोड़ने के लिए तैयार हो गए। कुल मिलाकर कर्नाटक में की राजनीति में डीके शिवकुमार युग की शुरुआत हो गई है और देखना होगा कि क्या वह गुटबाजी का सामना कर रहे सरकार और संगठन को एकजुट कर पाएंगे?
कौन हैं डीके शिवकुमार?
2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डीके शिवकुमार डिप्टी सीएम बने थे। शिवकुमार को कांग्रेस के सबसे ताकतवर नेताओं में गिना जाता है। आपको बताते हैं कि कौन हैं शिवकुमार? यहां क्लिक कर पढ़िए पूरी खबर।
