पिछले कई महीनों से पंजाब कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव को लेकर चल रही अटकलों को आखिरकार पार्टी हाई कमान ने गलत साबित कर दिया। कांग्रेस हाईकमान ने फैसला लिया है कि पंजाब में मौजूदा नेतृत्व यानी प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर वह कोई बदलाव नहीं करेगा। इसका मतलब यह है कि प्रदेश अध्यक्ष पद पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग बने रहेंगे।
नेतृत्व में बदलाव की संभावनाओं को तलाशने के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पिछले दिनों पंजाब कांग्रेस के नेताओं के साथ धुआंधार बैठकें की थी। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने कई नेताओं को पंजाब भेजकर वहां से जमीनी फीडबैक भी लिया था लेकिन इसके बाद भी हाई कमान ने प्रदेश संगठन के मुखिया को नहीं बदला।
ऐसी चर्चा थी कि कांग्रेस किसी हिंदू चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। इसके लिए विजय इंदर सिंगला का नाम आगे चल रहा था। जट सिख चेहरे के तौर पर सुखजिंदर सिंह रंधावा का भी नाम था लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
चन्नी को लेकर थी चर्चा
इस तरह की चर्चा जोर-शोर से थी कि जालंधर के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है लेकिन ऐसी तमाम चर्चाएं धरी की धरी रह गई। खुद चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब कांग्रेस में प्रमुख पदों पर जट सिखों के होने का सवाल मजबूती से उठा चुके थे।
पंजाब में 32 से 34% दलित आबादी है और इतने बड़े वोट बैंक को देखते हुए यह माना जा रहा था कि शायद कांग्रेस चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंप दे। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी इस पक्ष में भी थे और 2021 में चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने के फैसले में उनका अहम रोल था लेकिन फिर भी वह इस पर आगे नहीं बढ़ सके। ऐसा ना होने के पीछे जो बड़ी वजह सामने आती है वह है 2022 के चुनाव नतीजे।
अमरिंदर की जगह चन्नी को बनाया था सीएम
याद दिलाना जरूरी होगा कि 2022 के चुनाव से कुछ महीने पहले ही कांग्रेस हाईकमान ने नेतृत्व में बदलाव कर दिया था। मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को इस पद पर बैठाया गया था।
कांग्रेस का यह दांव पूरी तरह फेल रहा था और चरणजीत सिंह चन्नी दोनों सीटों से चुनाव हार गए थे। कांग्रेस को 117 सीटों वाले पंजाब में सिर्फ 18 सीटें ही मिली थी।
कांग्रेस हाईकमान इस बात को जानता था कि एकदम नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में चुनाव मैदान में जाना जोखिम भरा फैसला हो सकता है। हालांकि उसने दलित मतदाताओं को मनाने के लिए चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया है।
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी
पंजाब कांग्रेस में हमेशा गुटबाजी रही है। मौजूदा वक्त में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, विजय इंदर सिंगला के अपने-अपने गुट हैं। हाईकमान को उम्मीद है कि कांग्रेस पंजाब के मौजूदा हालात में आम आदमी पार्टी को सत्ता से हटाकर अपनी सरकार बना सकती है इसलिए कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व कई बार राज्य के नेताओं को चेतावनी दे चुका है कि वे गुटबाजी से बाज आएं और एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरें।
कांग्रेस जानती है कि पंजाब की राजनीति में दलित समुदाय की राजनीतिक अहमियत क्या है। इसीलिए चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाकर दलित समुदाय के साथ ही चन्नी के समर्थकों के बीच भी संदेश देने की कोशिश की गई है कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें किसी भी सूरत में नाराज नहीं करना चाहता।
जट सिख समुदाय की नाराजगी का भी डर
यह भी समझ में आता है कि कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने का फैसला काफी सोच-समझ कर लिया है। पार्टी को इस बात का अंदाजा है कि पिछले चार सालों से ज्यादा वक्त से प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाल रहे अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को चुनाव से ठीक पहले उनके पद से हटाना गलत कदम होगा।
ऐसा करने से प्रदेश के जट सिख समुदाय के साथ ही अमरिंदर सिंह के समर्थकों में भी गलत संदेश जा सकता है और इसका सीधा असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है। पंजाब की राजनीति में जट सिख समुदाय की आबादी 22 से 25% है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर रहते हुए जिला, ब्लॉक लेवल तक कांग्रेस कमेटियों का गठन किया है।
इसके अलावा भी पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर और दूसरी अहम कमेटियों में तमाम जाति समूहों के बड़े नेताओं को जगह देकर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है।
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