सोमवार को नोएडा में कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उनकी पुलिस से झड़प हुई और उन्होंने कई गाड़ियों में आग लगा दी लेकिन नोएडा का यह प्रदर्शन कोई पहला मामला नहीं है। 2026 की शुरुआत से ही औद्योगिक इकाइयों में कर्मचारियों के द्वारा प्रदर्शन किए जाने की खबरें लगातार आ रही हैं।

सबसे पहले 2 फरवरी को बिहार के औद्योगिक शहर बरौनी से विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत हुई और इसके बाद कम से कम कर्मचारियों द्वारा पांच जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए गए।

बरौनी के अलावा ये प्रदर्शन गुजरात के सूरत (हीरा काटने और पॉलिश करने का प्रमुख केंद्र), मानेसर (ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रमुख केंद्र), पानीपत (टेक्सटाइल और रीसाइक्लिंग हब) और नोएडा (फुटवियर और टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग हब) में हुए।

हिंसक प्रदर्शन और पत्थरबाजी

बरौनी में हुए प्रदर्शन में मजदूरों ने हर दिन काम के 8 घंटे तय किए जाने, पीएफ और ईएसआईसी की सुविधा देने की मांग की थी। 23 फरवरी को पानीपत में इंडियन ऑयल की रिफाइनरी में करीब 30,000 ठेका कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। इस दौरान कर्मचारियों ने हिंसक प्रदर्शन किया था और पत्थरबाजी की थी। 27 फरवरी को सूरत के हजीरा में एएम/एनएस (आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील) प्रोजेक्ट साइट पर काम कर रहे लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) के 5000 ठेका कर्मचारियों ने भी हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था।

क्या हैं कर्मचारियों की मांग?

कर्मचारियों की मुख्य मांगें हैं- काम के बेहतर हालात (विशेष रूप से ठेका कर्मचारियों के लिए), न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाना, बेहतर ओवरटाइम भुगतान, लंबित भुगतान का निपटान और नियमित श्रमिकों के जैसी ही सुविधाएं।

कई श्रमिक संघों के सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि श्रमिक नवंबर 2025 में श्रम संहिता लागू होने के बाद वेतन में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे लेकिन वेतन में जितनी बढ़ोतरी की उम्मीद थी, उतनी नहीं हुई है।

हरियाणा सरकार ने बढ़ाया वेतन

हाल ही में जब गैस की किल्लत सामने आई तो इससे मजदूरों की समस्याएं बढ़ गई। मजदूर बढ़ती महंगाई से भी जूझ रहे हैं। पिछले हफ्ते जब हरियाणा सरकार ने न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की थी तो इससे पहले हरियाणा के मानेसर समेत कई औद्योगिक इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। हरियाणा में अब राज्य सरकार ने अनस्किल्ड मजदूरों का मासिक न्यूनतम वेतन 15,220.71 रुपये और हाई स्किल्ड मजदूरों का वेतन 19,442.85 रुपये कर दिया है।

एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने से परेशान

पिछले कुछ दिनों में मजदूर एलपीजी सिलेंडर खरीदने के लिए मदद मांग रहे थे। एलपीजी सिलेंडर की कीमत ब्लैक मार्केट में तीन से चार गुना बढ़ गई है।

नोएडा में पत्थरबाजी और हिंसक प्रदर्शन को लेकर श्रमिक संगठनों के नेताओं का कहना है कि हालात इसलिए भी बिगड़ गए क्योंकि कर्मचारियों के नेताओं को पिछले 5 दिनों से नजरबंद किया गया था। कर्मचारियों की मांग है कि हरियाणा की तरह ही उनकी भी न्यूनतम मजदूरी 35% से ज्यादा बढ़ाई जाए। उनकी नाराजगी है कि नोएडा में 8 अप्रैल से विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे और उसके बाद भी अधिकारियों ने ठेका कर्मचारियों की बात नहीं सुनी।

नोएडा में उग्र प्रदर्शन करने वाले श्रमिक क्यों हैं नाराज?

नोएडा में प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सैलरी इतनी कम है कि उससे रोजमर्रा के खर्चे भी पूरे नहीं हो पा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनियां उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।