Bihar Politics: बिहार में सियासत काफी अस्थिर नजर आ रही है क्योंकि जेडीयू के चीफ नीतीश कुमार राज्य के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने आज बिहार विधान परिषद की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इसके बावजूद ये स्पष्ट नहीं है कि उनका उत्तराधिकारी कौन और कब होगा? नीतीश कुमार के जाने के बाद बिहार में बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने वाली है लेकिन अभी तक ये तय नहीं है, कि आखिर वो कौन होगा।

बिहार की विधान परिषद से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा होना जरूरी था, क्योंकि यह संवैधानिक आवश्यकता थी। हालांकि भारतीय संवैधानिक कानून नीतीश कुमार को कम से कम अभी के लिए मुख्यमंत्री बने रहने की अनुमति देता है।

नितिन नबीन ने भी दिया है इस्तीफा

अहम बात यह है कि नीतीश कुमार ने विधान परिषद से इस्तीफा दिया है तो दूसरी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने विधानसभा सदस्यता छोड़ दी है। दोनों ही दिग्गज नेता राज्यसभा का चुनाव जीत चुके हैं और जल्द ही वे आधिकारिक शपथ लेकर राज्यसभा के सदस्य बन जाएंगे।

गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह ने दिन में मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट कीं। उन्होंने नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि वे सदन के एक अमूल्य नेता रहे हैं और उन्होंने बिहार के हित के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है।

क्यों जरूरी था ये इस्तीफा?

यह इस्तीफा संवैधानिक रूप से अनिवार्य था। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुने गए थे, और संविधान के अनुच्छेद 101(2) के तहत बनाए गए समवर्ती सदस्यता निषेध नियम (1950) के अनुसार किसी व्यक्ति को राज्यसभा चुनाव की घोषणा के 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल में अपनी सीट से इस्तीफा देना होता है। सोमवार, 30 मार्च, वह समय सीमा थी।

क्या मुख्यमंत्री नहीं रहें नीतीश कुमार

अब सवाल यह उठता है कि क्या राज्य विधान परिषद से इस्तीफा देने का मतलब यह है कि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री नहीं रहे? संवैधानिक रूप से इसका जवाब है नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई व्यक्ति राज्य विधानमंडल का सदस्य न होते हुए भी छह महीने की अवधि के लिए मुख्यमंत्री या मंत्री के रूप में कार्य कर सकता है।

नीतीश कुमार 6 महीने तक रह सकते हैं मुख्यमंत्री

इसका अर्थ यह है कि सैद्धांतिक रूप से नीतीश कुमार पटना में मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं और साथ ही 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की तैयारी भी कर सकते हैं। दो तकनीकी बातों को स्पष्ट करना जरूरी है। आप दो सदनों के सदस्य दो सप्ताह से अधिक समय तक नहीं रह सकते; लेकिन आप किसी भी सदन का हिस्सा न रहते हुए छह महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।

मुख्यमंत्री रहते हुए राज्यसभा जाने वाले पहले नेता

तकनीकी औपचारिकताओं को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार का संसद के उच्च सदन में जाना ऐतिहासिक है, क्योंकि वे राज्यसभा में जाने का निर्णय घोषित करने वाले पहले मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। उनसे पहले भी मुख्यमंत्री राज्य से केंद्र में जा चुके हैं। नीतीश कुमार की सेहत हमेशा से चिंता का विषय रही है।

साल 2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद से नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में एक केंद्रीय व्यक्ति बने रहे हैं, कई गठबंधन परिवर्तनों के बावजूद उन्होंने अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखी है।

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बिहार के मंत्री अशोक चौधरी। (इमेज सोर्स- एक्स/Screengrab)

Nitish Kumar Resignation News: बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राज्यसभा में सीट हासिल करने के कुछ ही दिनों बाद सोमवार को बिहार विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इससे राज्य की राजनीति में एक युग का अंत हो गया। इस घटनाक्रम के बाद उनके समर्थकों में मायूसी साफ नजर आ रही है। वहीं, मंत्री अशोक चौधरी उनके इस्तीफे के बाद रोते हुए दिखे। पढ़िए पूरी खबर…