नागपुर के नव नियुक्त पुलिस आयुक्त और जाने-माने आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल ने नवी मुंबई में सकल हिंदू समाज के एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तारीफ की। इतना ही नहीं उन्होंने इसके संस्थापक डॉ. केबी हेडगेवार को एक दूरदर्शी राष्ट्रवादी बताया। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार और पाटिल को निशाने पर लिया और सिविल सर्विस की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने इस भाषण की जांच की मांग की और पोस्ट किया, “संविधान और खाकी वर्दी की शपथ भूलकर, वे संघ के दरवाजे पर तारीफ के गीत गाते हुए पहुंच गए। एक तरफ संविधान की शपथ लेना और लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाना और दूसरी तरफ खुलेआम आरएसएस की तारीफ करना, यह किस तरह का कर्तव्यनिष्ठ आईपीएस अधिकारी है?”
नांगरे पाटिल से क्या बोले राज ठाकरे
शनिवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे भी इस विवाद में कूद पड़े। उन्होंने नांगरे-पाटिल से कहा, “अगर संघ के प्रति आपका लगाव है, तो उसे अपने तक ही सीमित रखें या अगर आप सार्वजनिक रूप से बोलना चाहते हैं, तो नौकरी से इस्तीफा देकर संघ या बीजेपी में शामिल हो जाएं।” उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नणवीस पर भी निशाना साधा और उनसे पूछा कि क्या किसी पुलिस अधिकारी की दोहरी निष्ठा उन्हें मंजूर है।
ठाकरे ने आगे कहा, “हम सभी को यही लगता था कि नांगरे-पाटिल की वर्दी का खाकी रंग पुलिस फोर्स का है, लेकिन अब हमें पता चला है कि यह रंग तो संघ की पुरानी खाकी वर्दी वाला है।”
पाटिल एक सम्मानित अधिकारी हैं जिन्होंने अपने दो दशक से ज्यादा के करियर में कई अहम पदों पर काम किया है। 26/11 के आतंकी हमलों के दौरान, वे मुंबई शहर के जोन 1 के डिप्टी कमिश्नर थे और उन्होंने ताज महल पैलेस होटल में घुसे आतंकवादियों का मुकाबला किया था।
शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के करीबी माने जाने वाले पाटिल ने तब मुंबई के जॉइंट कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) के तौर पर काम किया था, जब राज्य में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की महा विकास अघाड़ी सरकार सत्ता में थी। पिछले हफ्ते नागपुर तबादले का आदेश मिलने से पहले वे राज्य के एंटी-करप्शन ब्यूरो के प्रमुख थे।
हालांकि, अधिकारी ने विपक्ष की आलोचना का कोई जवाब नहीं दिया है, लेकिन उनके करीबी लोगों का कहना है कि उस कार्यक्रम में दूसरे सरकारी अधिकारी और धार्मिक नेता भी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि भाषण का पूरा वीडियो देखने पर पता चलेगा कि पाटिल ने शांति की वकालत की थी और नफरत के खिलाफ बात की थी। पाटिल के करीबी सूत्रों ने उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने रमजान के दौरान इफ्तार पार्टियों में भी शिरकत की थी।
पाटिल युवाओं का बढ़ाते हैं हौसला
वहीं, महाराष्ट्र पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल को राज्य के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (रेवेन्यू) विकास खड़गे का फोन आया। पाटिल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि खड़गे आर्थिक रूप से पिछड़े नंदुरबार जिले के दौरे पर थे, तभी उन्होंने एक युवा छात्र को आईपीएस अधिकारी की किताब ‘मन में है विश्वास’ पढ़ते हुए देखा। वरिष्ठ अधिकारी ने तुरंत फोन उस युवा को दे दिया और पाटिल ने उसे हौसला बढ़ाने वाली बातें कहीं।
पाटिल के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ऐसी कई बातें और वीडियो हैं जिनमें वे युवाओं का हौसला बढ़ाते और उन्हें कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करते दिखते हैं।
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बेंगलुरु की एक अदालत ने 27 जून को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और यूथ कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड को समन जारी किया। यह समन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ उनकी टिप्पणियों को लेकर दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत पर जारी किया गया। यहां क्लिक कर पढे़ं पूरी खबर…
