महाराष्ट्र सरकार ने नेशनल हाईवे के किनारे बने अवैध ढाबों, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक ढांचों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य सरकार ने शहरी निकायों को 60 दिनों के भीतर नेशनल हाईवे की राइट ऑफ वे (ROW) यानी सरकार द्वारा अधिग्रहित और आरक्षित जमीन पर बने सभी नए और पुराने बिना लाइसेंस वाले ढांचों को हटाने और गिराने का निर्देश दिया है। साथ ही इस क्षेत्र में नए ढाबे, खाने-पीने की दुकानें या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने पर भी रोक लगा दी गई है।

यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के सड़क सुरक्षा से जुड़े निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में नेशनल हाईवे पर लगातार हो रहे हादसों और सड़क सुरक्षा व्यवस्था में कथित खामियों को लेकर मामले का संज्ञान लिया था।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में नवंबर 2025 में हुए लगातार सड़क हादसों का संज्ञान लिया था। इन हादसों में 2 और 3 नवंबर को कुल 34 लोगों की मौत हुई थी। अदालत ने इन घटनाओं को केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद व्यवस्थागत लापरवाही और बुनियादी ढांचे की गंभीर खामियों से जोड़कर देखा।

अदालत ने कहा था कि इस तरह की लापरवाही लोगों के सुरक्षित आवागमन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। साथ ही, हादसों के बाद अवैध अतिक्रमणों पर कार्रवाई किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की भूमिका और प्रशासनिक विफलताओं पर भी रिपोर्ट मांगी गई थी।

नेशनल हाईवे पर क्यों सख्ती कर रहा है सुप्रीम कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में नेशनल हाईवे की सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत के मुताबिक देश की कुल सड़क लंबाई में नेशनल हाईवे की हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत है, लेकिन सड़क हादसों में होने वाली कुल मौतों में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी है।

अदालत ने चेतावनी दी कि प्रशासनिक लापरवाही या विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण नेशनल हाईवे को ‘खतरे के गलियारे’ में तब्दील नहीं होने दिया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों के सड़क विभागों को कई अहम निर्देश दिए हैं।

हाईवे पर ढाबों और दुकानों को लेकर क्या आदेश है?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नेशनल हाईवे की ROW में बने अवैध और अनऑथराइज्ड ढांचों को हटाने के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की गई है। इसके अलावा इस क्षेत्र में नए ढाबे, रेस्टोरेंट, खाने-पीने की दुकानें या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने पर रोक लगाई गई है।

सरकारों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हाईवे के सुरक्षा क्षेत्र में बिना संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी के किसी तरह का लाइसेंस, एनओसी या व्यापारिक अनुमति जारी या नवीनीकृत न हो। पहले से मौजूद लाइसेंस की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।

हाईवे पर भारी वाहनों के रुकने पर भी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा के लिए भारी और व्यावसायिक वाहनों के नेशनल हाईवे की मुख्य सड़क या पक्के शोल्डर पर रुकने पर रोक लगाई है। ऐसे वाहनों को केवल निर्धारित पार्किंग सुविधाओं पर ही रुकने की अनुमति होगी।

इस नियम को लागू कराने के लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) का इस्तेमाल करने को कहा गया है। इसमें कैमरे, स्पीड डिटेक्टर, वैरिएबल मैसेज बोर्ड, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, जीपीएस आधारित फोटो एविडेंस और ई-चालान जैसी तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है।

अवैध कब्जों की निगरानी कैसे होगी?

हाईवे अथॉरिटीज को नियमित निरीक्षण करने, अतिक्रमण की पहचान करने और अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को नागरिकों की अतिक्रमण संबंधी शिकायतों के लिए व्यवस्था सक्रिय करने और साल में दो बार ड्रोन सर्वे कराने का भी निर्देश दिया गया है।

इसके अलावा प्रत्येक जिले में हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स गठित करने और हाईवे पर चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है। पेट्रोलिंग वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस लगाने का भी निर्देश है।

हादसा होने पर तुरंत मिलेगी मदद

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों के बाद बचाव और राहत व्यवस्था मजबूत करने के लिए भी निर्देश दिए हैं। हाईवे के प्रत्येक 75 किलोमीटर के हिस्से में बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एंबुलेंस और रिकवरी क्रेन उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि दुर्घटना के बाद घायलों को जल्द चिकित्सा सहायता मिल सके और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाया जा सके।

इसके साथ ही हादसों की आशंका वाले ब्लैकस्पॉट और गंभीर दुर्घटना क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है। ऐसे स्थानों पर पर्याप्त रोशनी, स्पीड कैमरे, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव चेतावनी संकेत और सड़क पर ट्रांसवर्स मार्किंग लगाने को कहा गया है।

राज्यों को देना होगा अनुपालन रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले में केंद्र और राज्यों की ओर से उठाए गए कदमों की निगरानी कर रहा है। 13 जुलाई को सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि केवल तीन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों बिहार, कर्नाटक और पुडुचेरी ने अनुपालन हलफनामे दाखिल किए थे।

अदालत ने अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। ऐसा नहीं करने पर संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGPs) को अदालत में पेश होने का आदेश दिए जाने की चेतावनी दी गई थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होनी है।

महाराष्ट्र में कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है?

महाराष्ट्र सरकार की ओर से 60 दिनों में हाईवे की ROW से अवैध ढांचों को हटाने का निर्देश इसी व्यापक सड़क सुरक्षा अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य हाईवे के किनारे अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण को हटाना, भारी वाहनों की अनियंत्रित पार्किंग रोकना और हादसों की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करना है।

सुप्रीम कोर्ट का जोर इस बात पर है कि सड़क सुरक्षा केवल हादसे के बाद कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि हाईवे की योजना, निगरानी, अतिक्रमण हटाने, ट्रैफिक नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं को एक साथ मजबूत किया जाए।

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