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केशुभाई को गुरु मानते हैं पीएम मोदी, आखिर क्या हुआ कि अधूरे कार्यकाल में ही उन्हें हटाकर मोदी बन गए थे गुजरात के सीएम

गुजरात के पूर्व सीएम केशूभाई पटले के निधन पर पीएम मोदी ने दुख व्यक्त किया। वह केशूभाई को अपना राजनैतिक गुरु मानते थे। हालांकि केशूभाई को अपना अधूरा कार्यकाल छोड़ना पड़ा था और इसके बाद मोदी गुजरात के सीएम बन गए थे।

Keshubhai patel, narendra modiकेशुूभाई को गुरु मानते हैं मोदी, फिर क्यों उनकी ही कुर्सी पर बैठ गए थे?

गुजरात के दो बार मुख्यमंत्री रहे केशुभाई पटेल का गुरुवार सुबह निधन हो गया। सितंबर में वह कोरोना की चपेट में आ गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘केशुभाई के निधन से मैं बेहद दुखी हूं। वह अद्भुत नेता थे और उन्होंने समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा। उन्होंने गुजरात के विकास के लिए काम किया और गुजरातियों को सशक्त किया।’हालांकि हैरान करने वाली बात यह है कि केशुभाई के अधूरे कार्यकाल में ही मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री  पद की कुर्सी क्यों संभाल ली?

गुजरात भूकंप के बाद साल 2001 में पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली थी। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके बहुत करीबी संबंध रहे हैं। केशुभाई जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे। वह दो बार गुजरात के सीएम बने। पहली बार जब वह मुख्यमंत्री बने तो सात महीने के कार्यकाल के बाद ही शकर सिंह वाघेला से विवाद के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। दोबारा वह 1998 में मुख्यमंत्री चुने गए। 2001 में उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया। हालांकि माना जाता है कि उन्होंने 2001 मे भुज में आए भयानक भूकंप के दौरान कुप्रबंधन को लेकर अपना त्यागपत्र सौंपा था।

जब अटल मोदी से बोले- बहुत मोटे हो गए हो

कहा जाता है कि गुजरात भूकंप के बाद प्रदेश में तत्कालीन सीएम केशुभाई के खिलाफ असंतोष था। वहीं दो उपचुनावों और स्थानीय चुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने बदलाव की भूमिका तय की। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। नरेंद्र मोदी गुजरात से संगठन का काम करके उस दौरान दिल्ली में थे। अटल ने कहा, दिल्ली में पंजाबी खाना खाकर काफी मोटे हो गए हो, गुजरात लौट जाओ। शायद मोदी को भी नहीं पता था कि उन्हें कौन सी जिम्मेदारी दी जा रही है। कई लोग यह भी दावा करते हैं कि मुख्यमंत्री बनने के लिए शंकरलाल वाघेला के विद्रोह के बाद मोदी ने लॉबीइंग की थी।

मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी से उनके रिश्ते खराब होते गए। 2002 में वह चुनाव नहीं लड़े और 2007 में इनडायरेक्ट तरीके से कांग्रेस के समर्थन में थे। 2012 में बीजेपी से इस्तीफा देकर उन्होंने अलग पार्टी बना ली। हालांकि एक बार फिर 2014 में वह बीजेपी से जुड़ गए। 1977 में वह पहली बार राजकोट से लोकसभा का चुनाव जीते थे। इसके बाद 1978 से 95 तक कालावाड़, गोंदल और विसावदर से विधानसभा चुनाव जीतते रहे। वह 1995 में पहली बार गुजरात के सीएम बने थे।

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