मध्य प्रदेश की नागौद रियासत 1950 में औपचारिक रूप से समाप्त हो गई थी। उस समय रियासत के शासक ने भारत में विलय के लिए इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद नागौद राजनीतिक नक्शे से जरूर गायब हो गया, लेकिन राजपरिवार नहीं। आज भी इस राजपरिवार की संपत्ति, प्रभाव और सियासत चर्चा का विषय बनी रहती है।
वर्तमान में परिवार के पास जमीन-जायदाद, संपत्ति और सामाजिक प्रभाव बना हुआ है। विंध्य क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली जमींदार और राजनीतिक परिवारों में इनका नाम आता है। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शाही परिवार में जो विवाद सामने आया है, वह कई साल पुराना है। यहां संपत्ति, उत्तराधिकार और परिवार के कारोबार पर नियंत्रण को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। यही तनाव धीरे-धीरे एक बड़े पारिवारिक संघर्ष में तब्दील हो गया।
इसके बाद इस साल 11 जून को यह विवाद सार्वजनिक रूप से सामने आ गया। उसी दिन सतना जिले की परसमनिया गढ़ी में हुई एक झड़प के दौरान योगिता सिंह को गोली लग गई। पुलिस ने इस मामले में सुनीता सिंह परिहार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सुनीता ने .22 बोर राइफल से गोली चलाई थी।
वहीं योगिता सिंह के परिवार का आरोप है कि सुनीता परिहार और रूपेंद्र कुमार सिंह के बीच करीबी रिश्ते थे। हालांकि रूपेंद्र सिंह के प्रतिनिधियों ने इस आरोप को खारिज किया है। उनका कहना है कि सुनीता परिहार के साथ उनका कोई निजी संबंध नहीं था, बल्कि वह कई वर्षों से उनकी बिजनेस पार्टनर और निवेशक के रूप में जुड़ी हुई थीं।
जानकारी के लिए बता दें कि इस शाही परिवार में विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि कई वर्षों से चला आ रहा है। इसे केवल पति-पत्नी के रिश्ते तक सीमित करके भी नहीं देखा जा सकता। पेट्रोल पंप के संचालन, किले के अंदर रिसॉर्ट बनाने की योजना और परिवार की संपत्तियों पर भविष्य के नियंत्रण जैसे कई मुद्दे समय-समय पर विवाद की वजह बने हैं।
इस पूरे विवाद के मुख्य किरदारों में रूपेंद्र सिंह, योगिता सिंह और सुनीता परिहार शामिल हैं। रूपेंद्र सिंह की बात करें तो उन्हें “बाबा राजा” के नाम से भी जाना जाता है। वह नागौद राजपरिवार के सदस्य हैं और एक मौजूदा बीजेपी विधायक के रिश्तेदार भी बताए जाते हैं। वह कांतिदेव सिंह के पुत्र हैं। कई वर्षों से परसमनिया गढ़ी और परिवार की संपत्तियों का प्रबंधन वही संभाल रहे हैं।
इसके अलावा परसमनिया गढ़ी, उंचेहरा के पास स्थित एक विशाल किला है। इसे आज भी इस परिवार के प्रभाव और विरासत के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है।
योगिता सिंह की बात करें तो वह लंबे समय से इस शाही परिवार का हिस्सा रही हैं। वह राजस्थान के उदयपुर के एक प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं और साल 2000 में उनकी शादी रूपेंद्र सिंह से हुई थी। बाद में वह परसमनिया पंचायत की सरपंच भी बनीं। उनके और रूपेंद्र सिंह के एक बेटे हैं, जिनका नाम पृथुदेव सिंह है।
अगर बात सुनीता परिहार की करें तो वह सतना जिले के उमरी गांव की रहने वाली हैं। शुरुआत में वह सामाजिक कार्यों और एनजीओ गतिविधियों से जुड़ी थीं। इसके बाद धीरे-धीरे वह रूपेंद्र सिंह के कारोबारी दायरे में शामिल हो गईं।
रूपेंद्र सिंह के प्रतिनिधि ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा था कि वह केवल उनकी वर्किंग पार्टनर नहीं हैं, बल्कि कई कारोबारों में वित्तीय साझेदार भी हैं। उन्होंने पेट्रोल पंप और परसमनिया गढ़ी में प्रस्तावित रिसॉर्ट परियोजना में भी निवेश किया हुआ है।
वैसे इस शाही परिवार के विवाद का एक बड़ा केंद्र पेट्रोल पंप भी है। रूपेंद्र सिंह के प्रतिनिधि के मुताबिक, पेट्रोल पंप का मालिकाना हक योगिता सिंह के पास था, लेकिन उसके संचालन और प्रबंधन को लेकर समय-समय पर विवाद होते रहे।
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा था कि पेट्रोल पंप की प्रोपराइटर योगिता सिंह थीं, लेकिन इसके संचालन और प्रबंधन को लेकर कई मतभेद थे। यही मतभेद दोनों पक्षों के बीच बार-बार विवाद की वजह बनते रहे।
इस पूरे मामले में सुनीता परिहार की भूमिका को समझना भी जरूरी है। प्रतिनिधि के मुताबिक, सुनीता परिहार कारोबारी गतिविधियों में सक्रिय थीं और उन्होंने आर्थिक निवेश भी किया था। कुछ समय के लिए पेट्रोल पंप का संचालन बंद भी रहा, जिसे बाद में दोबारा शुरू किया गया।
पेट्रोल पंप के अलावा परिवार के पुराने किले को लेकर भी विवाद था। दरअसल, परिवार की योजना थी कि किले के कुछ हिस्सों को हॉस्पिटैलिटी और रिसॉर्ट प्रोजेक्ट में बदला जाए। रूपेंद्र सिंह के प्रतिनिधि के अनुसार, इस प्रस्तावित रिसॉर्ट परियोजना में भी सुनीता परिहार निवेशक थीं।
बात अगर रूपेंद्र और योगिता सिंह के रिश्तों की करें तो उनके संबंधों में तनाव 2024 तक काफी बढ़ चुका था। रूपेंद्र सिंह के प्रतिनिधि ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि दोनों का तलाक नहीं हुआ है, लेकिन रूपेंद्र सिंह ने 2024 में अलगाव की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी थी। पिछले कुछ समय से योगिता सिंह उनके साथ नहीं रह रही थीं। दोनों के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे।
अब बात करते हैं 11 जून की घटना की। रूपेंद्र सिंह की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया कि उनके साले नागेंद्र सिंह राठौर और दो अन्य लोगों ने उन पर हमला किया। एफआईआर के मुताबिक, टूटे हुए कांच, झूमर के हिस्सों और स्टील की बोतल से उन पर वार किया गया। रूपेंद्र सिंह का दावा है कि उनके शरीर के कई हिस्सों में चोटें आईं और उन्हें धमकियां भी दी गईं।
वहीं पूरे मामले में योगिता सिंह की तरफ से दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इसी झड़प के दौरान उन्हें गोली मारी गई थी। इसके बाद पुलिस ने सुनीता परिहार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वर्तमान में इस शाही परिवार से जुड़े कई लोगों का मानना है कि पृथुदेव सिंह भविष्य में रूपेंद्र सिंह की शाखा के वारिस माने जाते हैं। यानी आगे चलकर परिवार की संपत्तियों के उत्तराधिकारी वही हो सकते हैं। इसी वजह से पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव बढ़ने के बाद भी बेटे के भविष्य को लेकर लगातार बातचीत होती रही।
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए राजपरिवार के एक सदस्य ने कहा कि रूपेंद्र और योगिता की आखिरी मुलाकात जयपुर में एक पारिवारिक समारोह में हुई थी। वहां रूपेंद्र सिंह ने कहा था कि वह अब योगिता के साथ नहीं रह सकते, लेकिन उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया था कि उनके बेटे को संपत्ति नहीं मिलने का कोई खतरा नहीं है। हालांकि इससे विवाद खत्म नहीं हुआ।
वहीं पूरे मामले में योगिता सिंह के परिवार का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि विवाद को सिर्फ कारोबार से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। उनके मुताबिक, सुनीता परिहार की बढ़ती भूमिका, परिवार के कारोबार में उनकी भागीदारी और किले में उनकी मौजूदगी भी तनाव के बड़े कारणों में शामिल थीं।
ये भी पढ़ें- लंदन में सड़कों पर उतरे हजारों कश्मीरी
