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आखिर नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने पीएम नरेंद्र मोदी को तोहफे में साइकिल ही क्‍यों दी?

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए भारत में भी साइकिलिंग को बढ़ावा मिलना चाहिए।
Author June 29, 2017 20:06 pm
मार्क ने मोदी को तोहफे में साइकिल दी। (Source: Twitter)

प्रभुनाथ शुक्ल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान वहां के प्रधानमंत्री मार्क रुट की तरफ से एक साइकिल भेंट की गई। आपको साइकिल का तोहफा भले ही छोटा लगता हो, लेकिन इसके पीछे नीदरलैंड की बड़ी खासियत छुपी है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने आखिर मोदी को साइकिल ही क्यों भेंट किया, दूसरे नायाब तोहफे भी शामिल हो सकते थे।

दुनिया में सभी मुल्कों की अपनी एक खासियत होती है। वहां के कुछ खास संस्कृति और रीति-रिवाज अपने आप में बेमिसाल होते हैं। जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी तीसरी दुनिया के सबसे शक्तिशाली अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की पत्नी मेलानिया को कश्मीर और हिमाचल की हाथ से बनी खास शाल तोहफे में दिया। जबकि ट्रंप को पंजाब के होशियापुर में लकड़ी की खास पेटी तोहफे में भेंट की। वैसे ही नींदरलैंड की खास पहचान साइकिल मोदी को मार्क रुट ने दिया।

नीदरलैंड में 36 फीसदी आबादी ऑफिस जाने या दूसरे कामों में साइकिल का प्रयोग करती है। साइकिलिंग वहां का फैशन नहीं, बल्कि संस्कृति बन गई है। लेकिन दुर्भाग्य से बढ़ते प्रदूषण के बाद भी भारत में इस गौर नहीं किया जा रहा है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को जो साइकिल भेंट की, उसमें लाइट लगी है, जो साइकिल चलाते वक्त जलेगी। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए भारत में भी साइकिलिंग को बढ़ावा मिलना चाहिए।

सरकार के स्तर पर स्वच्छता और योग की तरह इस पर भी जागरूकता अभियान चलाना चाहिए, लेकिन भारत में साइकिल बदलते दौर में गरीबी का सामाजिक पैमाना मानी जाती है। जबकि योग का सबसे सुलभ और आराम दायक साधन साइकिलिंग है।

साइकिल का प्रचलन 19वीं सदी में यूरोप से शुरू हुआ। चीन और नीदरलैंड में साइकिल आज भी मुख्य साधन है। 1839 में स्काटलैंड के एक मिस्त्री ने पैडल से चलने वाल साइकिल का निर्माण किया। कहा जाता है कि 1763 मंे फ्रांस के पियरे लैंडमेंट ने इसकी खोज की थी। भारत में 1960 से 90 तक अधिकांश परिवारों के यातायात का मुख्य साधन साइकिल थी। देश में शुरू हुए उदारीकरण के बाद बाइक युवाओं की पहली पसंद बनी। देश में राजमार्गो के निर्माण के दौरान साइकिल परिपथ को भी बनाना चाहिए, जिससे सुरक्षित साइकिलिंग के प्रति लोगों का रुझान बढ़ेगा।

गाजियाबाद में दो साल पूर्व साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए एक ग्रुप का गठन किया गया था। उस दौरान इस समूह में 1100 के करीब लोग शामिल थे। 2014 में इसका गठन किया गया। 22 से 45 वर्ष की उम्र के लोग साइकिल से ऑफिस जाते थे। इनकी संख्या कुल 20 फीसदी थी। विलासिता की दुनिया से हमें बाहर आना होगा, तभी हम बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण से बच सकते हैं।

दुनियाभर में 30 करोड़ से अधिक बच्चे वायु प्रदूषण से प्रभावित हैं। सात में से एक बच्चा जहरीला धुंआ निगलने को बाध्य है। दुनियाभर में प्रदूषण की वजह से पांच साल की उम्र में छह लाख बच्चों की मौत हो जाती है। उप्र की समाजवादी सरकार लखनऊ में साइकिल परिपथ बनाने का काम शुरू किया था, लेकिन इसका संबंध पर्यावरण से कम राजनीति से अधिक दिखा।

आपको याद होगा 2017 की ठंड में दिल्ली में प्रदूषण का लेवल पीएम 2.5 से 10 फीसदी तक पहुंच गया था। कई इलाकों में दृश्यता शून्य हो गई थी। सड़कों पर पानी की फुहारें करनी पड़ी थी। प्रदूषण की स्थिति 12 गुना अधिक हो गई। प्रदूषण की वजह से केजरीवाल सरकार को ऑड-इवेन फार्मूला तक अमल में लाना पड़ा, जिस पर अदालत ने भी तीखी टिप्पणी की थी।

आकंड़ों के अनुसार, दिल्ली में 60 लाख से अधिक दुपहिया वाहन पंजीकृत है। प्रदूषण में इनकी भागीदारी 30 फीसदी है। दिल्ली में कारों से 20 फीसदी प्रदूषण फैलता है, जबकि दुपहिया वाहनों से 30 फीसदी भागीदारी है। दिल्ली में 85 लाख गाड़िया हर रोज सड़कों पर दौड़ती हैं। जबकि 1400 से अधिक कारें खरीदी जाती है। दिल्ली चीन की राजधानी बीजिंग से भी अधिक प्रदूषित शहर हो चला है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के 20 प्रदूषित शहरों में 13 भारतीय शहरों को भी रखा है। वैश्विक स्तर पर ग्लोबल वार्मिग बढ़ रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 2021 तक छह डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ सकता है। भारत में 50 हजार लोगों की मौत प्रदूषण से होती है। भारत को छोड़ दुनियाभर में साइकिलिंग सबसे अधिक पसंद की जाती है। हमारे पड़ोसी मुल्क चीन में आज से 15 साल पूर्व 27 करोड़ साइकिलें थीं। सिर्फ बीजिंग में 70 लाख साइकिलें थी, अब तक तो काफी अधिक हो गई होंगी। यहां हर दो व्यक्ति के पास एक साइकिल थी।

तकनीकी संपन्न देश जापान में 95 फीसदी आबादी साइकिल का उपयोग करती है। यहां प्रति हजार आबादी पर 450 से अधिक साइकिल है। अमेरिका में एक हजार आबादी पर 75 से अधिक साइकिलें हैं। नीदलैंड में आम आदमी से लेकर अफसर और नेताआंे की साइकिलिंग पहली पंसद है, जबकि भारत में साइकिलिंग को इतना महत्व नहीं दिया जाता है। जिमखानों में भी साइकिलिंग की सुविधा उपलब्ध होती है।

योग का सबसे बेहतर माध्यम साइकिलिंग है। भारत में भी साइकिलिंग को अनिवार्य बनाने के लिए सरकार को आना चाहिए। योग गुरु बाबा रामदेव को भी अपने योग में साइकिलिंग को बढ़ावा देना चाहिए। दुनियाभर के 200 से अधिक देश भारत की योग क्षमता के कायल बन गए हैं। भारत आज योग गुरु बन गया है। नीदरलैंड ने प्रधानमंत्री मोदी को प्रतीक रूप में साइकिल भले तोहफे में दी हो, लेकिन साइकिल वहां की जीवनचर्या में शामिल है।

भारत में भी साइकिलिंग को बढ़ावा मिलना चाहिए। ग्रामीणांचलों में आज भी साइकिल यातायाता का अहम साधन है। दूर तलक की यात्रा के लिए बाइक का उपयोग भले किया जाता हो, लेकिन सामान्य यातायात के लिए साइकिल का प्रयोग किया जाता है। साइकिल के अधिक प्रयोग से जहां प्रदूषण का लेवल कम होगा, वहीं पेट्रोल की खपत में भी भारी कमी आएगी।

दूसरी सबसे बड़ी बात बढ़ते प्रदूषण पर आसानी से लगाम लगाई जा सकती है। इसलिए शहरों में साइकिलिंग और साइकिल रिक्शा को अधिक बढ़ावा मिलना चाहिए। मोदी को इस तोहफे के माध्यम से नींदरलैंड के जरिए पर्यावरण प्रदूषण को संरक्षित करने के लिए कमद उठाने चाहिए और इस पर विचार करना चाहिए।

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