राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद मनोज झा ने रविवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ के कार्यान्वयन में हो रही देरी पर सवाल उठाए। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि 2023 में जब यह विधेयक पारित हुआ था, तब सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया था।
उन्होंने कहा, “मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बहुत ही विस्तृत और अच्छा पत्र लिखा है। यह बिल 2023 में नए संसद भवन में जाने के बाद पारित किया गया था और हम सभी ने इसका समर्थन किया था। हालांकि, हमारी जैसी पार्टियों का हमेशा से यह मानना रहा है कि ‘कोटे के भीतर कोटा’ के प्रावधान के बिना ऐसी कोई भी पहल सार्थक नहीं होगी, और न ही यह कभी वास्तव में समावेशी स्वरूप को दर्शा पाएगी।”
आगे उन्होंने 30 महीनों की देरी पर केंद्र सरकार को घेरते हुए पूछा, “उस समय सरकार ने कहा था कि पहले जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा और उसके बाद हम महिला आरक्षण लागू करेंगे। हमने 30 महीने क्यों बर्बाद किए? अगर परिसीमन और आरक्षण को जोड़ने का यह कोई बनाया हुआ फॉर्मूला था, तो इस 30 महीने की देरी के लिए कौन जिम्मेदार है? परिस्थितियां नहीं बदली हैं, जनगणना नहीं हुई है और जनगणना आधारित परिसीमन को लेकर भी कोई चर्चा नहीं हो रही है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, “मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि पीएम मोदी का पत्र ईमानदार नहीं था। इस संदर्भ में मैं चाहूंगा कि आप मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा लिखे गए पत्र को देखें। उनका पत्र पूरे विपक्ष की चिंताओं को दर्शाता है।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद का 16 अप्रैल से तीन दिवसीय विशेष सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें मुख्य रूप से महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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बजट सत्र का वित्तीय कामकाज पूरा होने के बाद 2 अप्रैल, 2026 को संसद के दोनों सदन स्थगित कर दिए गए। यह स्थगन का सही समय था- क्योंकि असम, केरल और केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी की विधानसभा चुनावों के लिए मतदान नौ अप्रैल को निर्धारित था, और सांसदों के पास अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर चुनाव प्रचार में शामिल होने के लिए केवल एक सप्ताह का समय बचा था। इसके अलावा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन 30 मार्च से शुरू हो चुके थे और मतदान क्रमश: 23 और 29 अप्रैल को निर्धारित है तथा सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लौटने के लिए उत्सुक थे। आम धारणा यही थी कि अप्रैल के अंत तक अब कोई जरूरी काम नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…
