संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष रविवार को सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने टीएमसी के बागी गुट को बैठक में बुलाया, जबकि उन सांसदों ने हाल ही में अपनी पार्टी छोड़कर कम चर्चित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का ऐलान किया है। सरकार ने सोमवार को संसद के मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई थी।

कांग्रेस सांसद और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि डीएमके और आम आदमी पार्टी जो हाल ही में इंडिया ब्लॉक की बैठकों में शामिल नहीं हो रही हैं। अन्य विपक्षी दलों के साथ सर्वदलीय बैठक से बाहर चली गईं।

जयराम रमेश ने कहा कि सभी विपक्षी दलों ने सर्वदलीय बैठक से कुछ मिनटों के लिए वॉकआउट किया। यह मोदी सरकार के उस फैसले के खिलाफ विरोध का प्रतीक था, जिसमें उन्होंने एनसीपीआई को आमंत्रित किया है, जो कि 20 तथाकथित ‘बागी’ टीएमसी सांसदों के लिए एक पार्किंग स्थल है, जबकि स्पीकर के पास अभी भी अंतिम निर्णय लंबित है।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दल, शिवसेना (यूबीटी) समेत पूरा विपक्ष सर्वदलीय बैठक से विरोध जताते हुए बाहर चला गया, क्योंकि तथाकथित एनसीपी, जो एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है। उनके अनुसार टेबल ऑफिस द्वारा दी गई सूची में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की संख्या 28 दिखाई गई है। इन तथाकथित बागी 20 सांसदों के विलय को स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है।

समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि पूरा विपक्ष एकजुट है। उन्होंने कहा कि चाहे सरकार दलबदल कराने या विभाजन पैदा करने की कितनी भी कोशिश करे।

बैठक में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे CPI(M) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष ने बैठक से इसलिए वॉकआउट किया क्योंकि सर्वदलीय बैठक की पवित्रता धूमिल हो गई है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के विभाजन को न तो संसद ने स्वीकार किया है और न ही अध्यक्ष ने इस पर कोई फैसला सुनाया है, जबकि यह मुद्दा अभी भी अध्यक्ष के समक्ष लंबित है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस मनमाने तरीके से टीएमसी के बागी गुट को आमंत्रित किया है, वह सर्वदलीय बैठक की पवित्रता और विश्वसनीयता के खिलाफ है।

जून में, तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बताया था कि उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर लिया है और वे सदन में एक अलग गुट के रूप में बैठना चाहते हैं। विलय पर निर्णय अध्यक्ष के समक्ष लंबित है।

‘संफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं’, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो पहुंचीं दिल्ली हाई कोर्ट

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने रविवार को दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। जिसमें उन्होंने तत्काल सुनवाई की मांग की है। अपनी याचिका में अंग्मो ने सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से अपनी पसंद के किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर।