केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद तक मार्च कर रहे युवाओं को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके अगले दिन यानी मंगलवार को विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर के पास धरना देकर सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया। हालांकि, पुलिस ने तीन घंटे के भीतर ही इस विरोध-प्रदर्शन को खत्म करवा दिया और विपक्ष के बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया।
सोमवार को दिल्ली के बीचों-बीच युवाओं की भारी भीड़ जुटने के बाद कांग्रेस को लगा कि वह ऐसी धारणा नहीं बनने दे सकती कि कॉकरोच जनता पार्टी पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई कर रही है। खासकर इसलिए भी क्योंकि गांधी कुछ समय से इन्हीं मुद्दों को उठाते रहे हैं और उन्होंने दो बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम भी किए हैं। पहला तो जून के कोटा में और दूसरा पिछले हफ्ते देहरादून में हुआ था।
मुख्य विपक्षी दल को मजबूत करनी पड़ी स्थिति
सोमवार के विरोध प्रदर्शन के बाद एक तरह से देखा जाए तो मुख्य विपक्षी दल को अपनी स्थिति मजबूत करनी पड़ी। यह तब हुआ जब कांग्रेस से इतर अधिकांश विपक्षी दल भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक और सीजेपी के समर्थन में एकजुट हो गए थे। एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और आम आदमी पार्टी के चीफ अरविंद केजरीवाल मंगलवार को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे विपक्षी नेताओं में शामिल थे।
कांग्रेस सेवा दल ने मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को खाने और पानी देने के लिए अपने वॉलटियर को भेजा। बाद में दिन में कांग्रेस ने अपनी कानूनी टीम को चल रहे प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार, हिरासत में लिए गए और जिन पर हमला किया गया है, उन सभी युवाओं को हर संभव मदद देने का निर्देश दिया। कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने संपर्क किए जाने वाले लोगों के डिटेल शेयर करने की जानकारी दी।
आप ने कांग्रेस पर बोला हमला
आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनका धरना सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश थी। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया, “सीजेपी के धरने को कमजोर करने के लिए मोदी जी ने राहुल गांधी को अपने घर के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत दी है।”
कांग्रेस ने इसकी योजना कैसे बनाई?
पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लिया, उनमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल थे। सरकार का दावा था कि वह संसद में पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा करने की गांधी की मांग मान गई थी, लेकिन आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता अपनी बात से मुकर गए और इस बात पर अड़े रहे कि प्रधान को भी इस्तीफा देना होगा।
दोपहर में राहुल और प्रियंका के आरएमएल अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से मिलने के कुछ घंटों बाद कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल का एक मैसेज मिला, “कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों से अनुरोध है कि वे आज दोपहर 3 बजे 10, राजाजी मार्ग, नई दिल्ली पहुंचें, ताकि कांग्रेस अध्यक्ष को उनके जन्मदिन पर औपचारिक रूप से बधाई दी जा सके।”
कुछ सांसद रह गए हैरान
जब वे खड़गे के घर पहुंचे, तो उन्हें पीएम के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास तक मार्च करने के बारे में बताया गया। इससे कुछ सांसद हैरान रह गए, उनमें से एक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि लीडरशिप ने उन्हें धरने के बारे में पहले से नहीं बताया था ताकि पुलिस को इसकी भनक न लगे।
सांसद ने कहा, “हम सभी को (कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन) खड़गे जी के घर उनके जन्मदिन की बधाई देने के लिए बुलाया गया था। वहां हमें बताया गया कि पीएम के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहा है और हम सभी को वहां जाना है। यह हमारे लिए भी अचानक हुआ।” केरल के सीएम वी.डी. सतीशन केरल हाउस में थे, तभी उन्हें धरने के बारे में पता चला और वे अपने साथियों के साथ शामिल हो गए। हालांकि, कुछ समय बाद वे वहां से चले गए।
अखिलेश और सुप्रिया सुले भी विरोध प्रदर्शन में हुए शामिल
पीएम के घर के बाहर, गांधी को अपनी पार्टी के साथियों को जिप-टाई बांटते हुए देखा गया, ताकि वे अपनी कलाइयां बांध सकें और पुलिस के लिए उन्हें घसीटकर ले जाना मुश्किल हो जाए। विरोध प्रदर्शन वाली जगह से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, “छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है। प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वे बिना जवाब दिए और बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।” उनकी अपील के बाद, सुले और अखिलेश भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए।
राहुल गांधी से जितेंद्र सिंह ने की थी बात
सरकार ने राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन को राहुल गांधी से बात करने और उन्हें मनाने के लिए भेजा। सिंह ने दावा किया कि राहुल गांधी ने शुरू में मांग की थी कि सरकार संसद में नीट के मुद्दे और जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन पर चर्चा करने के लिए सहमत हो। जितेंद्र सिंह ने एक्स पर लिखा, “कुछ ही पलों में, सरकार के शीर्ष नेतृत्व से अनुमति लेने के बाद, राहुल गांधी को भरोसा दिलाया गया कि उनकी मांग मान ली गई है और सरकार संसद में नीट और उससे जुड़े आंदोलन से संबंधित सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है।”
हालांकि, मंत्री ने दावा किया कि जब विपक्ष के नेता को इस बारे में बताया गया, तो वे अपने वादे से मुकर गए और प्रधान के इस्तीफे पर आश्वासन मांगा। जितेंद्र सिंह ने कहा, “जब उन्हें विनम्रतापूर्वक समझाने की कोशिश की गई कि उनके जैसे वरिष्ठ नेता का इतनी जल्दी अपने वादे से मुकर जाना उन्हें शोभा नहीं देता, तो उन्होंने कहा कि यह उनका अधिकार है। जब गृह सचिव ने समझाने की कोशिश की कि यह जगह धरने के लिए उपयुक्त नहीं है, तो उनका जवाब था कि जहां चाहें वहां बैठना भी उनका अधिकार है।”
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दिल्ली पुलिस ने विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया था, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी शामिल थीं। पुलिस ने सभी विपक्षी नेताओं को हिरासत से रिहा कर दिया है। दिल्ली पुलिस राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई थी, जहां से उन्हें रिहा किया गया है। अखिलेश यादव को भी पुलिस छत्रसाल स्टेडियम में लेकर गई थी जहां से उन्हें भी रिहा किया गया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
