जदयू बिहार में भाजपा के साथ अभी एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। लेकिन इससे पहले वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा थी फिर अचानक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ लिया। उस दौरान इसे लेकर तरह-तरह की खबरें सामने आई, लेकिन पर्दे के पीछे का सच अब सामने आया है।
जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में इसकी वजह बताई है। इंडियन एक्सप्रेस के नेशनल पॉलिटिकल ब्यूरो के चीफ मनोज सीजी ने सवाल किया कि इंडिया गठबंधन की पहली मीटिंग 2023 में नीतीश कुमार के घर पर हुई थी, लेकिन एक साल से कम समय में उन्होंने गठबंधन का साथ क्यों छोड़ दिया, आखिर हुआ क्या था?
नीतीश ने क्यों छोड़ा था इंडिया ब्लॉक?
इस सवाल पर जवाब देते हुए संजय कुमार झा ने कहा कि इंडिया गठबंधन को दो लोगों ने खत्म किया, “उन्होंने नाम ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल है, इन्होंने मिलकर इस गठबंधन को खत्म किया। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री का दावेदार बनाना था, लेकिन कांग्रेस समेत सभी पार्टियों के बीच एक सहमति बन गई थी कि नीतीश कुमार इस गठबंधन के संयोजक हैं। फिर एक मीटिंग में इन दोनों नेताओं ने प्लानिंग के तहत कहा कि नहीं एक दलित संयोजक होना चाहिए, मल्लिकार्जुन खड़गे साहब को होना चाहिए। यह बोलकर दोनों नेताओं ने कांग्रेस को भी बैकफुट पर डाल दिया।”
आगे संजय कुमार ने कहा, “संयोजक बनने न बनने की कोई बड़ी बात नहीं थी, उनकी अपनी इस गठबंधन को लेकर अपनी एक क्रेडबिलिटी थी, वह सभी जगह जा रहे थे, दूसरे नेताओं से बात करने के लिए। सभी को एक साथ एक मंच पर लेकर आए। फिर हम लोगों ने भी देखा कि कहीं कोई जुड़ाव नहीं था। मैंने तो इस गठबंधन को तोड़ने में इन्हीं दोनों की भूमिका देखी।”
दो नेताओं ने मिलकर खत्म किया गठबंधन- संजय कुमार झा
उन्होंने कहा, “कांग्रेस को कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन ममता हमेशा नीतीश कुमार का विरोध करती थीं। ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने मिलकर दिल्ली और मुंबई में यह प्रस्ताव रखा कि दलित को संयोजक बनाया जाए। मेरा मानना है कि इन्हीं दो नेताओं ने गठबंधन खत्म किया।”
आगे जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा, “कांग्रेस के एक नेता और सीपीआई एम के एक नेता यही चाहते थे कि नीतिश कुमार इस गठबंधन के संयोजक बने। लेकिन ये दोनों नेता अचानक से यह प्रस्ताव लेकर आए तो कांग्रेस पर प्रेशर आ गया कि अगर ये दोनों निकल गए तो गठबंधन का क्या होगा। नीतीश कुमार ने देखा कि इंडिया गठबंधन न तो आगे बढ़ रहा और न ही उसके पास कोई विजन है कि करना क्या है। सिर्फ मोदी और बीजेपी के खिलाफ करके बात नहीं चलती। उन्होंने कोशिश की, कई आइडिया लेकर साथ गए भी लेकिन कुछ नहीं हुआ।”
नीतीश ने विपक्षी नेताओं को दिया था एक मंच
जानकारी दे दें कि 2023 के दौरान लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा से अलग होकर नीतिश कुमार महागठबंधन की सरकार चला रहे थे। उस समय नीतीश ने केंद्र की मोदी सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर टक्कर देने के लिए देश भर के नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की। उन्होंने करीबन सभी छोटी-बड़ी पार्टियों के नेताओं से बात की। उनकी मेहनत रंग लाई और 23 जून 2023 में पटना में कई विपक्षी दलों की मीटिंग हुई, जिसके आधार पर इंडिया गठबंधन बना। उस समय भी ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल को लेकर सहमति न बनने की चर्चाएं तेज थी। बाद में नीतीश कुमार के संयोजक बनने पर सवाल उठे। संजय कुमार झा के मुताबिक, इसी के बाद दिल्ली में फिर बैठक हुई और नीतीश का मोह इस गठबंधन से भंग हो गया और फिर एनडीए के साथ आ गए।
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