Tamil Nadu News: तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी डीएमके के राजनीतिक सलाहकार और पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन स्टालिन के दामाद वी सबरीसन ने तमिलनाडु के मंत्रियों आधव अर्जुन और सीटीआर निर्मल कुमार को कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें उन्होंने अपने खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए माफी की मांग की है, वरना कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके वकील के जरिये भेजे गए इन नोटिसों में मंत्रियों से कहा गया है कि वे 15 दिनों के अंदर अपने बयान वापस लें और माफी मांगें, वरना उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आधव अर्जुन को भेजे नोटिस में क्या कहा गया?
आधव अर्जुन को भेजे गए नोटिस के अनुसार, मंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान सबरीसन पर भ्रष्टाचार के बेबुनियाद आरोप लगाए थे। आधव अर्जुन को भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि मंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान सबरीसन पर भ्रष्टाचार के बेबुनियाद आरोप लगाए, जिन्हें समाचार चैनलों ने दिखाया था।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि टीवीके मंत्री ने कहा कि डीएमके के सभी मंत्रियों ने पिछली राज्य सरकार के सभी 36 विभागों में भ्रष्टाचार के जरिये पैसे इकट्ठा किए और यह पैसा 16-16 विभागों से उदयनिधि स्टालिन और सबरीसन को बांटा। नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई क्षेत्रीय चैनलों ने इस खबर को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाया। इसे चार लाख से ज्यादा बार देखा गया।
सीटीआर को भेजे गए नोटिस में सबरीसन ने क्या कहा?
वहीं, सीटीआर निर्मल कुमार को भेजे गए नोटिस में उनके इस दावे पर आपत्ति जताई गई है कि पिछली डीएमके सरकार के दौरान बिजली की दरों में बढ़ोतरी से सबरीसन को फायदा हुआ था। इसमें आरोप लगाया गया है कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुमार ने कहा था कि डीएमके सरकार के तहत बिजली विभाग की आय और खर्च बढ़ गए थे, जबकि कर्ज भी बहुत ज्यादा बढ़ गया था।
नोटिस में कुमार के हवाले से कहा गया है, “हमें पिछली सरकार के मंत्रियों से पूछना होगा कि बिजली बिल की दरों में बढ़ोतरी का फायदा किसे मिला, क्या यह कोई परिवार है या दामाद है या बेटा है।”
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तमिलनाडु सरकार ने शुक्रवार को बेंगलुरु स्थित केवीएन ग्रुप के चेयरमैन और विजय की रिलीज न हुई आखिरी फिल्म जन नायकन के प्रोड्यूसर के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में राज्य का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया। यह पद कैबिनेट रैंक का होता है और आम तौर पर इस पद पर रहने वाले व्यक्ति को राज्य और केंद्र सरकार के बीच अक्सर जटिल रहने वाले रिश्तों को संभालने की जिम्मेदारी दी जाती है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
